सावधान! एक चिंगारी से जल सकती है पूरी गेहूं की फसल, जानें बचाव के अचूक उपाय

सावधान! एक चिंगारी से जल सकती है पूरी गेहूं की फसल, जानें बचाव के अचूक उपाय

मार्च-अप्रैल की गर्मी में गेहूं की सूखी फसल में आग लगने का खतरा बढ़ जाता है. ट्रांसफार्मर, ढीले बिजली तार और कृषि मशीनों से निकलने वाली चिंगारी से बड़ा नुकसान हो सकता है. जानिए विशेषज्ञों के बताए आसान और असरदार उपाय, जिससे आप अपनी फसल को आग से सुरक्षित रख सकते हैं.

fire in wheat cropfire in wheat crop
क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Mar 27, 2026,
  • Updated Mar 27, 2026, 6:21 PM IST

भारत में गेहूं की सुनहरी फसल का पकना किसान के लिए खुशहाली का संकेत होता है, लेकिन यही वह समय है जब साल भर की मेहनत पर आग का खतरा मंडराने लगता है. मार्च और अप्रैल के महीनों में जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, खेतों में नमी पूरी तरह खत्म हो जाती है और तेज हवाएं चलने के कारण आग लगने की आशंका 80 प्रतिशत तक बढ़ जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार, देश में गेहूं के खेतों में आग लगने की 65 फीसदी घटनाएं पुराने बिजली के ट्रांसफार्मर और ढीले तारों में होने वाले शॉर्ट-सर्किट की वजह से होती हैं. जब जर्जर तार आपस में टकराते हैं, तो उनसे निकलने वाली चिंगारी सूखी फसल को पल भर में राख के ढेर में बदल देती है. यह केवल फसल का नुकसान नहीं है, बल्कि किसान के पसीने की कमाई, भारी लागत और उसके भविष्य के सपनों की एक साथ बर्बादी है.

ट्रांसफार्मर के पास बरतें ये विशेष एहतियात 

इस प्राकृतिक और तकनीकी आपदा से बचने के लिए किसानों को सबसे पहले अपने खेत की बिजली व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए. यदि आपके खेत के बीच या किनारे पर ट्रांसफार्मर लगा है, तो फसल पकते ही उसके आसपास की कम से कम 10 फीट की फसल को पहले ही काट लें और उस जगह को पूरी तरह साफ कर दें. इससे यदि ट्रांसफार्मर से चिंगारी निकलती है तो फसल जलने से बच जाएगी.

इसके साथ ही, बिजली विभाग के साथ निरंतर संपर्क में रहें और जर्जर तारों या ढीले कनेक्शन की शिकायत तुरंत दर्ज कराएं. मानवीय लापरवाही भी एक बड़ा कारण है. राहगीरों या मजदूरों द्वारा अनजाने में फेंकी गई जलती हुई बीड़ी, सिगरेट या माचिस की तीली सूखे खेतों में दावानल फैला सकती है. खेत की मेड़ और आसपास की सफाई रखना इस जोखिम को काफी हद तक कम कर देता है.

छोटी सी ढील पड़ सकती है महंगी

फसल कटाई के दौरान इस्तेमाल होने वाले आधुनिक कृषि यंत्र जैसे कंबाइन और थ्रेशर भी आग का कारण बन सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि मशीनों की बेल्ट की टाइटनेस की नियमित जांच करना अनिवार्य है. यदि बेल्ट ढीली है, तो घर्षण से पैदा होने वाली चिंगारी सूखी फसल में आग लगा सकती है. ट्रैक्टर के साइलेंसर का मुंह हमेशा ऊपर की ओर रखें और मशीनों को कभी भी क्षमता से अधिक ओवरलोड न करें ताकि इंजन से निकलने वाली चिंगारी सीधे जमीन पर न गिरे. एक स्मार्ट और प्रभावी तरीका यह है कि खेत के चारों ओर 5 से 6 फीट चौड़ी खाली पट्टी बना दें या ट्रैक्टर के पीछे रोटावेटर लगाकर मेड़ों के पास जुताई कर दें. यह खाली जमीन आग के रास्ते में एक मजबूत बाधा का काम करती है और उसे एक खेत से दूसरे खेत तक फैलने से रोकती है.

सही समय पर कटाई और आपातकालीन तैयारी 

अंतिम चरण में, फसल की सही समय पर कटाई करना ही सुरक्षा का सबसे बड़ा मंत्र है. जैसे ही गेहूं की बालियां पूरी तरह पीली पड़ जाएं और दाने कठोर हो जाएं, कटाई में बिल्कुल देरी न करें. अधिक समय तक खड़ी सूखी फसल न केवल आग के प्रति संवेदनशील होती है, बल्कि चूहे और पक्षी भी उसे नुकसान पहुंचाते हैं. असिंचित (बिना सिंचाई वाले) खेतों की कटाई प्राथमिकता के आधार पर पहले करें क्योंकि वहां फसल जल्दी सूखती है. किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए खेत पर हमेशा पानी की भरी हुई टंकियां और रेत की बोरियां तैयार रखनी चाहिए ताकि आग को शुरुआत में ही बुझाया जा सके. कृषि विभाग और बिजली निगम के बीच बेहतर तालमेल और किसानों की व्यक्तिगत सतर्कता ही इस 'अग्नि परीक्षा' में उनकी मेहनत को सुरक्षित खलिहान तक पहुंचा सकती है.

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