
हर रोज पशुओं को तीन तरह की खुराक देने का नियम है. जैसे हरा चारा, सूखा चारा और दाना-मिनरल्स. लेकिन इसमे भी मौसम के हिसाब से बदलाव होता रहता है. क्योंकि पशुपालक अपने पशुओं को हर वो चीज खिलाता है जिससे दूध उत्पादन बढ़ने के साथ ही दूध में फैट और एसएनएफ की मात्रा भी बढ़े. खासतौर से बरसात के दिनों में इस पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है. क्योंकि एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक बरसात के दिनों में गाय-भैंस का दूध पतला हो जाता है और फैट-एसएनएफ की मात्रा भी घट जाती है. और इसके लिए पशुपालक रोजाना की खुराक में बदलाव करने लगते हैं. हालांकि बदलाव करने के पीछे एक बड़ी वजह खुराक के दाम भी होते हैं.
मौसम के हिसाब से खुराक में शामिल चीजों के दाम घटते-बढ़ते भी रहते हैं. इसी के चलते ही पशुपालकों को चारे और दाने में बदलाव करने की सलाह दी जाती है. अक्सर ऐसा होता है कि बरसात के दिनों में दाना महंगा हो जाता है. लेकिन ज्यादा और क्वालिटी के दूध उत्पादन के लिए दाने वाले पोषण की बहुत जरूरत होती है. और इसी की भरपाई के लिए दाने की जगह पशुपालक दलहनी चारा खिलाना शुरू कर देते हैं. हालांकि ऐसा करते वक्त एक्सपर्ट की सलाह लेना जरूरी हो जाता है.
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