
उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) की महानिदेशक डॉ. संजय सिंह की अध्यक्षता में आयोजित 'क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप' की बैठक में राज्य के मौसम और फसलों की स्थिति पर गहरा विचार-विमर्श किया गया. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 26 जुलाई से मॉनसूनी गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है. 24 से 30 जुलाई के दौरान प्रदेश के अधिकांश कृषि जलवायु क्षेत्रों में औसत साप्ताहिक बारिश सामान्य रहने के आसार हैं. इस अवधि में तराई, पश्चिमी मैदानी उत्तरी भाग, बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 30 से 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है, जबकि अन्य इलाकों में अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 से 28 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है.
वहीं, 31 जुलाई से 6 अगस्त के दूसरे हफ्ते में विंध्य, मध्य मैदानी और बुंदेलखंड क्षेत्रों में सामान्य से थोड़ी अधिक बारिश हो सकती है. गौर करने वाली बात यह है कि 1 जून से 23 जुलाई तक राज्य में सामान्य से 19 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. इस कम बारिश को ध्यान में रखते हुए उपकार ने किसानों को ताकीद की है कि वे जल-संरक्षण के तरीके अपनाएं और कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता दें.
धान के रकबे में आई कमी की भरपाई और कम बारिश वाले इलाकों के लिए उपकार ने किसानों को खास हिदायतें दी हैं. जहां रोपाई में देरी हुई है, वहां 100-125 दिनों वाली किस्मों जैसे सी.ओ.-51, नरेन्द्र-80, आई.आर.-50, शुष्क सम्राट और मालवीय धान-917 की सीधी बुवाई करें. रोपाई से पहले पौधों की जड़ों को 4 ग्राम ट्राइकोडर्मा प्रति लीटर पानी या 0.2% कार्बेन्डाजिम के घोल में उपचारित जरूर करें. धान के खेतों में नमी बनाए रखें और दरारें न पड़ने दें. कल्ले फूटते समय यूरिया की टॉप-ड्रेसिंग करें और यूरिया या डीएपी के विकल्प के रूप में नैनो यूरिया व नैनो डीएपी का छिड़काव करें.
कम बारिश की स्थिति में दलहनी, तिलहनी और मिलेट्स की फसलें सबसे माकूल विकल्प हैं. अरहर की देर से पकने वाली किस्मों जैसे नरेन्द्र अरहर 2, मालवीय चमत्कार की बुवाई मेड़ों पर करें, जबकि उर्द मैश-1190, पंत उर्द-12 और मूंग विराट, मेहाके बीजों को ट्राइकोडर्मा या कार्बेंडाजिम और राइजोबियम कल्चर से शोधित करके बुवाई करें. तिल की उन्नत किस्मों गुजरात तिल-6, प्रगति और ज्वार/रागी जैसे वर्षा, सी.एस.वी.-15 की बुवाई जल्द पूरी करें और दलहनी-तिलहनी खेतों में जल निकासी का माकूल इंतजाम रखें ताकि पानी ठहरने न पाए.
गन्ना और मक्का की फसल में सही वक्त पर पोषण और सही देखरेख से पैदावार बढ़ाई जा सकती है. बसंतकालीन गन्ने में तेजी से बढ़त के लिए नमी की हालत में नैनो यूरिया और नैनो डी.ए.पी. 2.5 मिली प्रति लीटर पानी का पत्तियों पर छिड़काव करें और पेड़ी फसल के लिए NPK 19:19:19 2 किग्रा/एकड़ का प्रयोग करें. वहीं मक्का में 30-35 दिन घुटने के बराबर ऊंचाई की फसल होने पर 75 किग्रा/हेक्टेयर यूरिया की टॉप-ड्रेसिंग करें और खरपतवार नियंत्रण के लिए एट्राजीन 2 किग्रा/हेक्टेयर का प्रयोग करें.
मौसम में नमी और तापमान के बदलाव से बीमारियों और कीड़ों का अंदेशा बढ़ जाता है, जिसके लिए उपकार ने कारगर उपाय सुझाए हैं. धान में पत्ती लपेटक और तना छेदक के लिए क्लोरोपायरीफॉस और जीवाणु झुलसा दिखने पर स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट+टेट्रासाइक्लिन के साथ कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव करें.
गन्ने में लाल सड़न वाले पौधों को उखाड़कर नष्ट करें और थायोफिनेट मिथाइल की ड्रेचिंग करें, जबकि मिलीबग के लिए इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव करें. मक्का में फाल आर्मीवर्म से बचाव के लिए फेरोमोन ट्रैप 35-40/हेक्टेयर लगाएं या ब्रोफ्लानिलाइड का छिड़काव करें, और उर्द-मूंग में सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए डाइमेथोएट 30 EC का छिड़काव करें.