एक तरफ 47000 करोड़ रुपये की दालों का आयात, फ‍िर आंदोलन के ल‍िए क्यों मजबूर हैं मूंग क‍िसान?

एक तरफ 47000 करोड़ रुपये की दालों का आयात, फ‍िर आंदोलन के ल‍िए क्यों मजबूर हैं मूंग क‍िसान?

एक ओर भारत 2025-26 में दलहन आयात पर करीब 47-48 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रहा है, वहीं दूसरी ओर मूंग किसानों को अपनी फसल MSP पर बेचने के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है. जुलाई में अधिकांश राज्यों में मूंग के दाम MSP से 1,000 से 2,500 रुपये प्रति क्विंटल तक नीचे रहे. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब तूर, उड़द और मसूर की 100 प्रतिशत खरीद संभव है तो मूंग को इससे बाहर क्यों रखा गया है?

India Pulse Import Policy and domectic productionIndia Pulse Import Policy and domectic production
प्रतीक जैन
  • Noida,
  • Jul 31, 2026,
  • Updated Jul 31, 2026, 2:03 PM IST

एक तरफ भारत साल भर में लगभग 47000 करोड़ रुपये की दालें दूसरे देशों से खरीद रहा है तो दूसरी ओर ब‍िडंबना देख‍िए क‍ि अपने देश के दलहन उत्पादक क‍िसानों को अपनी फसल बेचने के ल‍िए सड़क पर संघर्ष करना पड़ रहा है. आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ रहा है. ताजा उदाहरण मध्य प्रदेश का है, जहां सरकारी न‍ियमों और प्रपंचों से परेशान क‍िसानों को मूंग खरीद के मुद्दे पर आंदोलन करना पड़ा. मूंग एक दलहन फसल है. एक तरफ हम दलहन का आयात कर रहे हैं तो फ‍िर दूसरी ओर राज्यों के कुल उत्पादन का स‍िर्फ 25 फीसदी खरीद का न‍ियम क्यों बनाया गया है? यह न‍ियम कोई भगवान ने बनाया है. इसे इसी देश के नौकरशाहों ने तैयार क‍िया है. ऐसे में उसे बदलकर मूंग की शत प्रत‍िशत खरीद की गारंटी देने में हर्ज क्या है? 

यह कैसा व‍िरोधाभाष है क‍ि हम अपना पैसा दूसरे देशों के दलहन क‍िसानों को देने के ल‍िए तैयार हैं लेक‍िन अपने देश की सभी दलहन फसलों की खरीद सुन‍िश्च‍ित करने का फैसला नहीं ले पाते? ऐसे ही नहीं हर साल दलहन आयात पर देश का खर्च बढ़ रहा है. इसके ल‍िए कहीं न कहीं हमारी खरीद और प्राइस पॉल‍िसी भी ज‍िम्मेदार द‍िखाई देती है.  ज‍िन फसलों के ल‍िए क‍िसानों को प्रोत्साह‍ित क‍िया जाना चाह‍िए, उन फसलों को उगाने पर क‍िसानों को उसे बेचने के ल‍िए संघर्ष करना पड़ रहा है.

फिलहाल आंदोलन से पीछे हटे किसान

हालांकि, मध्य प्रदेश में मूंग की 100 प्रतिशत खरीद को लेकर आंदोलन फिलहाल थम गया है. राज्य सरकार ने केंद्र की 25 प्रतिशत खरीद के अलावा, 35 प्रतिशत और खरीद करने का वादा किया है यानी कुल 60 प्रतिशत खरीद पर सहमति बनी है. लेकिन किसानों की मूल मांग अब भी अधूरी है.

किसान चाहते हैं कि सरकार मूंग की भी 100 प्रतिशत MSP पर खरीद की गारंटी दे, ठीक वैसे ही जैसे केंद्र सरकार तूर (अरहर), उड़द और मसूर के लिए कर रही है. जब देश हर साल दलहन आयात पर हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रहा है और सरकार आत्मनिर्भरता की बात कर रही है, तब मूंग को 100 प्रतिशत खरीद के दायरे से बाहर क्यों रखा गया है? 

बाजार में भाव MSP से 2,500 रुपये तक नीचे

केंद्र सरकार ने 2026-27 के लिए मूंग का MSP ₹8,780 प्रति क्विंटल तय किया है, जबकि 2025-26 में यह ₹8,768 प्रति क्विंटल था. यानी इस बार केवल ₹12 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई. दूसरी ओर एगमार्कनेट पोर्टल पर उपलब्‍ध प्राइस ट्रेंड डेटा बताता है कि जुलाई 2026 में देश के ज्‍यादातर प्रमुख मूंग उत्पादक राज्यों में इसके थोक भाव MSP से काफी नीचे चल रहे हैं. 

मध्य प्रदेश : ₹6,645.90 प्रति क्विंटल
राजस्थान : ₹6,357.90 प्रति क्विंटल
छत्तीसगढ़ : ₹6,266.28 प्रति क्विंटल
हरियाणा : ₹6,441.09 प्रति क्विंटल
पंजाब : ₹6,707.75 प्रति क्विंटल
उत्तर प्रदेश : ₹6,922.08 प्रति क्विंटल
गुजरात : ₹7,770.57 प्रति क्विंटल

जुलाई में मूंग का राष्ट्रीय औसत थोक भाव ₹7,670.43 प्रति क्विंटल रहा, जो MSP से करीब ₹1,110 प्रति क्विंटल कम है. कई राज्यों में किसानों को MSP से ₹2,000 से ₹2,500 प्रति क्विंटल तक कम कीमत मिल रही है. 

शिवराज का पत्र और 25 प्रतिशत खरीद का नियम

मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री के पत्र के जवाब में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 29 जुलाई 2026 को लिखे पत्र में कहा कि PM-AASHA के प्राइस सपोर्ट स्‍कीम (PSS) के दिशा-निर्देशों के अनुसार सामान्य स्थिति में खरीद की मंजूरी 25 प्रतिशत तक दी जाती है. उन्होंने यह भी लिखा कि मध्य प्रदेश को इस बार 4.54 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीद की स्वीकृति दी गई है, जो सभी राज्यों में सबसे अधिक है.

वहीं, केंद्र सरकार खुद कहती है कि वह तूर, उड़द और मसूर का एक-एक दाना किसानों से खरीदेगी. इन दालों के लिए 100 प्रतिशत खरीद की व्यवस्था की गई है, ताकि देश दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सके. यह व्यवस्था पहले 2024-25 से शुरू की गई और बाद में अगले चार वर्षों तक जारी रखने की घोषणा भी की गई. एक तरह से सरकार ने साफ किया है कि अगर दलहन में आत्‍मनिर्भर बनना है तो उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ किसानों को खरीद की गारंटी देना जरूरी है. 

लेकिन, फिर मूंग किसानों के साथ सरकार अलग व्‍यवहार क्यों कर रही है? मूंग भी देश की प्रमुख दलहन फसल है. कई राज्यों में किसान बाजार में MSP से काफी कम दाम पर बेचने को मजबूर हैं. ऐसे में उनका तर्क है कि अगर तूर, उड़द और मसूर के लिए 100 प्रतिशत खरीद संभव है तो मूंग के लिए भी वैसी ही व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती?

आयात पर 47-48 हजार करोड़ रुपये का खर्च

केंद्रीय वाणिज्‍य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने बीते साल दलहन आयात पर लगभग ₹47,000-48,000 करोड़ रुपये खर्च किए. सरकार लगातार दलहन में आयात पर निर्भरता कम करने और आत्मनिर्भरता की बात कर रही है तो मूंग किसानों के साथ भेदभाव क्‍यों?

संसदीय समिति भी दे चुकी है सुझाव

बता दें कि संसद की कृषि से जुड़ी स्थायी समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि दलहन और तिलहन के लिए PM-AASHA के तहत खरीद की सीमा मौजूदा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि किसानों को बेहतर मूल्य मिले और आयात पर निर्भरता घटे.

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