अगले दो हफ्ते सामान्य से कम बारिश के आसार, ICAR ने धान समेत कई फसलों के लिए जारी की एडवाइजरी

अगले दो हफ्ते सामान्य से कम बारिश के आसार, ICAR ने धान समेत कई फसलों के लिए जारी की एडवाइजरी

आईसीएआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ वाटर मैनेजमेंट ने ओडिशा के किसानों के लिए मौसम आधारित कृषि सलाह जारी की है. 13 अगस्त तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई गई है. किसानों को धान, दलहन, भिंडी, बैंगन और गन्ने की फसलों के लिए विशेष सलाह दी गई है.

धान की बुवाई में देरीधान की बुवाई में देरी
क‍िसान तक
  • भुवनेश्वर ,
  • Aug 05, 2026,
  • Updated Aug 05, 2026, 2:23 PM IST

ओडिशा के किसानों के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत आने वाले इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ वाटर मैनेजमेंट (IIWM), भुवनेश्वर ने मौसम आधारित कृषि परामर्श (एग्री एडवाइजरी) जारी किया है. संस्थान के अनुसार 13 अगस्त 2026 तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है, इसलिए किसानों को फसल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है.

एडवाइजरी के अनुसार, 6 अगस्त तक राज्य के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, लेकिन कुल बारिश की गतिविधि सामान्य से कम रहने की संभावना है. वहीं 7 से 13 अगस्त के बीच भी ओडिशा के अधिकांश क्षेत्रों में बारिश की कमी बनी रह सकती है. हालांकि दक्षिण आंतरिक और तटीय ओडिशा के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना जताई गई है.

धान किसानों को क्या सलाह?

आईसीएआर ने धान की खेती करने वाले किसानों को खेतों में जलभराव रोकने के लिए बेहतर जल निकासी व्यवस्था रखने की सलाह दी है.

  • निचले क्षेत्रों में 20 से 25 दिन पुराने धान के पौधों की रोपाई करें.
  • रोपाई 20×15 सेंटीमीटर की दूरी पर करें.
  • खेत में 2 से 5 सेंटीमीटर पानी का स्तर बनाए रखें.
  • भारी बारिश के दौरान यूरिया और पौधे बचाने वाले केमिकल का छिड़काव टालें.
  • लीफ ब्लास्ट, बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट, स्टेम बोरर और लीफ फोल्डर जैसे रोगों और कीटों की निगरानी करें.

दलहन फसलों के लिए सलाह

मूंग और उड़द की खेती करने वाले किसानों को बीज उपचार करने की सलाह दी गई है.

  • प्रति एकड़ 10 किलोग्राम बीज का उपयोग करें.
  • कतार से कतार की दूरी 30 सेंटीमीटर रखें.
  • बुवाई से पहले कार्बेन्डाजिम या कार्बोक्सिन-थायरम मिश्रण से बीज उपचार करें.
  • अंतिम जुताई के समय गोबर की खाद या कम्पोस्ट डालें.
  • सूखे की स्थिति में सिंचाई का इंतजाम करें.

सब्जी उगाने वाले किसानों के लिए चेतावनी

भिंडी और बैंगन की खेती करने वाले किसानों को खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखने को कहा गया है.

  • भिंडी की बुवाई 60×30 सेंटीमीटर दूरी पर करें.
  • सूखे के दौरान जरूरी सिंचाई दें.
  • ड्रिप सिंचाई की सुविधा होने पर नियमित रूप से कम मात्रा में पानी दें.
  • बैंगन की पौध रोपाई भी 60×30 सेंटीमीटर दूरी पर करने की सलाह दी गई है.

बागवानी फसलों पर भी ध्यान

संस्थान ने केले, पपीते, बेलदार सब्जियों और अन्य बागवानी फसलों को बारिश और तेज हवाओं से बचाने के लिए सहारा (स्टेकिंग) देने की सलाह दी है. साथ ही बगीचों, नर्सरियों और निचले इलाकों में जल निकासी की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है.

गन्ना किसानों के लिए सलाह

गन्ने की फसल में सूखे की स्थिति बनने पर फरो सिंचाई या ड्रिप सिंचाई का उपयोग करने की सलाह दी गई है. विशेषज्ञों ने कहा है कि खेत में पानी जमा न होने दें और निकासी व्यवस्था दुरुस्त रखें.

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम के बदलते रुख को देखते हुए किसान नियमित रूप से स्थानीय मौसम अपडेट और कृषि विभाग की सलाह पर नजर रखें, ताकि फसलों को नुकसान से बचाया जा सके और उत्पादन पर असर न पड़े.

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