हरियाणा के किसानों को रजिस्ट्रेशन का एक और मौका, 27 सितंबर तक खुला MFMB पोर्टल, जानें क्या करना होगा

हरियाणा के किसानों को रजिस्ट्रेशन का एक और मौका, 27 सितंबर तक खुला MFMB पोर्टल, जानें क्या करना होगा

हरियाणा सरकार ने मेरी फसल-मेरा ब्योरा (MFMB) पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन से छूटे किसानों को एक और मौका दिया है. किसान 21 से 27 सितंबर तक अपनी जमीन और खरीफ फसलों का रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे. जानिए आवेदन कहां करना है, वेरिफिकेशन कैसे होगा और सरकारी खरीद के लिए रजिस्ट्रेशन क्यों जरूरी है.

MFMB Poral ReopenMFMB Poral Reopen
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Sep 21, 2026,
  • Updated Sep 21, 2026, 6:55 PM IST

हरियाणा सरकार ने उन किसानों के लिए 'मेरी फसल-मेरा ब्योरा' (MFMB) पोर्टल फिर से खोल दिया है जो पहले अपनी जमीन और फसलों का रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाए थे. यह सुविधा 21 सितंबर से 27 सितंबर तक उपलब्ध रहेगी, जिससे छूटे हुए पात्र किसान अपना रजिस्ट्रेशन पूरा कर सकेंगे. सरकार के इस कदम के बारे में आपको ये बातें जाननी चाहिए.

MFMB पोर्टल क्या है और यह क्यों जरूरी है?

MFMB पोर्टल हरियाणा सरकार की एक पहल है, जिसका मकसद किसानों को अपनी उपज बेचने और अलग-अलग सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में मदद करना है.

इस पहल के तहत, किसानों को पोर्टल पर बोई गई फसलों के साथ-साथ अपनी जमीन और बैंक खाते की जानकारी खुद दर्ज करनी होती है. पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के बाद, किसान सब्सिडी, फसल विविधीकरण (crop diversification) के लिए प्रोत्साहन और पराली प्रबंधन (stubble management) में मदद पाने के पात्र हो जाते हैं. रेगुलेटेड बाजारों (regulated markets) में उपज बेचने के लिए पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है.

MFMB पोर्टल को दोबारा क्यों खोला गया है?

सरकार ने उन किसानों को एक और मौका देने के लिए MFMB पोर्टल फिर से खोला है जो 31 जुलाई की समय-सीमा तक अपनी खरीफ 2026 की फसलों का रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाए थे. कृषि और किसान कल्याण विभाग ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि सरकारी खरीद प्रक्रिया में भाग लेने वाले किसानों के लिए फसल का रजिस्ट्रेशन जरूरी है.

इस कदम का मकसद उन छूटे हुए किसानों की मदद करना है जिन्हें सरकारी खरीद के दौरान मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. विभाग के अनुसार, किसानों को अपने संबंधित उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) कार्यालयों में जाना होगा और आवेदन जमा करना होगा. इस आवेदन में जमीन की पूरी जानकारी (जैसे खेवट और खसरा नंबर) और खेती वाले विशिष्ट क्षेत्र का विवरण शामिल होना चाहिए.

इसके बाद SDM अपने तय लॉगिन क्रेडेंशियल के जरिए पोर्टल पर आवेदन का विवरण दर्ज करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि जमीन से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी सही ढंग से दर्ज हो गई है. वे तय दिशानिर्देशों के अनुसार, संबंधित राजस्व अधिकारियों के माध्यम से तीन दिनों के भीतर दावों की जांच शुरू करेंगे.

छूटे हुए किसान को क्या करना होगा?

यह सुविधा उन किसानों के लिए खोली गई है जो खरीफ 2025–26 सीजन के लिए पहले अपनी फसलों का रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाए थे. जिन किसानों ने पहले ही अपनी जमीन और फसल का विवरण सफलतापूर्वक रजिस्टर कर लिया है, उन्हें उसी जमीन या फसल क्षेत्र का दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं है.

SDM यह भी सुनिश्चित करेंगे कि खरीफ 2026 के दौरान पहले से रजिस्टर की गई किसी जमीन या फसल क्षेत्र का दोबारा रजिस्ट्रेशन न हो. अगर किसी खास जमीन के हिस्से पर सीजन के दौरान पहले ही किसी दूसरे किसान ने दावा किया है, तो उसी जमीन के हिस्से को दोबारा रजिस्टर नहीं किया जाएगा.

ऐसी समस्याओं का सामना कर रहे किसान पोर्टल पर तय किसान लॉगिन के जरिए अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे.

क्या आवेदन करने के बाद रजिस्ट्रेशन अपने आप मान्य हो जाएगा?

नहीं. सिर्फ़ आवेदन जमा करने से फसल का रजिस्ट्रेशन फाइनल नहीं हो जाता. विभाग ने साफ किया है कि जमीन और फसल की जानकारी का सफलतापूर्वक सत्यापन (वेरिफिकेशन) होने के बाद ही रजिस्ट्रेशन को मान्य माना जाएगा.

एक बार दावा वेरिफिकेशन हो जाने के बाद, अनुमानित उत्पादन की जानकारी तैयार की जाएगी और उसे ई-खरीद पोर्टल के साथ साझा किया जाएगा. इससे पात्र किसानों को खरीद प्रणाली में शामिल करने और उन्हें खरीद प्रक्रिया के माध्यम से अपनी उपज बेचने में मदद मिलेगी.

वेरिफिकेशन क्यों जरूरी है?

सरकार का मकसद डुप्लिकेट या गलत रजिस्ट्रेशन को रोकना है. इसलिए, जमा की गई जमीन और फसल की जानकारी की जांच सैटेलाइट डेटा और फ़ील्ड निरीक्षण के जरिए की जाएगी.

विभाग की तय प्रक्रिया के अनुसार, वेरिफिकेशन की प्रक्रिया ज्यादा से ज्यादा तीन दिनों के भीतर पूरी की जानी चाहिए.

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