FMD Disease से दहशत! चपेट में आया मिथुन, बढ़ी चिंता

FMD Disease से दहशत! चपेट में आया मिथुन, बढ़ी चिंता

अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी में फुट-एंड-माउथ डिजीज (FMD) का प्रकोप सामने आया है. बीमारी से अब तक 267 मिथुन की मौत हो चुकी है, जबकि 1,402 पशु प्रभावित हुए हैं. 21 गांवों में बीमारी फैलने के बाद पशु चिकित्सा विभाग ने इलाज और निगरानी तेज कर दी है.

FMD की चपेट में मिथुनFMD की चपेट में मिथुन
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Sep 21, 2026,
  • Updated Sep 21, 2026, 4:45 PM IST

अरुणाचल प्रदेश के दिबांग घाटी जिले में फुट-एंड-माउथ डिजीज यानी FMD का प्रकोप सामने आया है. पिछले करीब दो महीनों में इस बीमारी से 267 मिथुन की मौत हो चुकी है, जबकि 1,402 मिथुन इससे प्रभावित हुए हैं. बीमारी को देखते हुए पशु चिकित्सा विभाग ने प्रभावित गांवों में इलाज, निगरानी और बचाव का काम तेज कर दिया है. अधिकारियों के मुताबिक, जिले के अब तक 21 गांवों में खुरपका-मुंहपका रोग के मामले सामने आए हैं.

जिले में इस बीमारी का पहला मामला जुलाई के आखिरी सप्ताह में सामने आया था. इसके बाद मिथुन के बीमार होने और मौत की जानकारी मिलने पर पशु चिकित्सा विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में भेजी गईं. इन टीमों के पास जरूरी दवाइयां और सैंपल लेने की किट उपलब्ध कराई गई हैं. इसके अलावा केंद्र की एक विशेषज्ञ टीम ने भी प्रभावित इलाकों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया है.

जांच में FMD के सीरोटाइप 'O' की पुष्टि

बीमारी की पहचान के लिए लिए गए सैंपल की जांच ओडिशा स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फुट एंड माउथ डिजीज (NIFMD) में की गई. जांच में पुष्टि हुई कि मिथुन में बीमारी FMD के सीरोटाइप 'O' के कारण फैली है. 20 सितंबर की विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, बीमारी से प्रभावित 1,402 मिथुन में से 1,225 का इलाज किया जा चुका है, जबकि 267 मिथुन की मौत हुई है.

इलाज और निगरानी में जुटी टीमें

प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए चार सदस्यों वाली रैपिड रिस्पॉन्स टीम (RRT) स्थानीय पशु चिकित्सा कर्मचारियों के साथ मिलकर काम कर रही है. टीमें प्रभावित इलाकों में पशुओं का इलाज करने के साथ-साथ निगरानी और पशुपालकों के बीच जागरूकता अभियान भी चला रही हैं. जिला पशुपालन और पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. डैमो रिबा ने बताया कि विभाग स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है और बीमारी को फैलने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.

टीकाकरण में सहयोग की अपील

खुरपका-मुंहपका एक तेजी से फैलने वाली वायरल बीमारी है, जो मिथुन और मवेशियों जैसे खुर वाले पशुओं को प्रभावित करती है. बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण को बेहद जरूरी उपाय माना जाता है. डॉ. रिबा के अनुसार, पशु चिकित्सा विभाग साल में दो बार किसानों और पशुपालकों के घर जाकर मुफ्त नियमित टीकाकरण अभियान चलाता है. उन्होंने पशुपालकों से अपील की है कि वे टीकाकरण अभियान में पूरा सहयोग करें, ताकि पशुओं को इस बीमारी से सुरक्षित रखा जा सके.

गलत आंकड़ों से बचने की अपील

विभाग ने पशुधन की संख्या और बीमारी से हुई मौतों के आंकड़ों को लेकर भी लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है. डॉ. रिबा ने कहा कि विभाग के पास मिथुन और मवेशियों का परिवार, व्यक्ति और गांव के स्तर पर विस्तृत रिकॉर्ड मौजूद है, इसलिए पशुओं की संख्या या मौत से जुड़े किसी भी आंकड़े की जानकारी आधिकारिक विभागीय रिकॉर्ड से ही सत्यापित करनी चाहिए. फिलहाल पशु चिकित्सा विभाग प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रहा है. अधिकारियों का कहना है कि बीमारी को नियंत्रित करने और जिले के पशुधन को सुरक्षित रखने के लिए इलाज, टीकाकरण और जागरूकता से जुड़े कदम लगातार जारी हैं. (PTI)

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