छत पर उगाएं सब्जी आजकल बढ़ती आबादी और कम होती जगह के कारण शहरों में रहने वाले लोगों के लिए घर पर सब्जियां उगाना आसान नहीं रह गया है. वहीं, बाजार में मिलने वाली सब्जियों में रासायनिक दवाओं के इस्तेमाल को लेकर भी लोगों की चिंता बढ़ रही है. ऐसे में केरल कृषि विश्वविद्यालय (KAU) ने एक अनोखी पहल शुरू की है, जिससे लोग कम जगह में भी सालभर ताजी, पौष्टिक और कीटनाशक-मुक्त सब्जियां उगा सकेंगे. विश्वविद्यालय ने 'पंचकम' नाम का एक नया होम गार्डन मॉडल तैयार किया है. इस मॉडल का उद्देश्य लोगों को अपनी छत, बालकनी या घर के छोटे से खाली हिस्से में पांच खास फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि परिवार को सालभर पौष्टिक सब्जियां मिल सकें.
केरल कृषि विश्वविद्यालय के अनुसार, 'पंचकम' मॉडल में कम से कम पांच गमलों या जमीन के छोटे से टुकड़े में पांच फसलें उगाने की सलाह दी गई है. इनमें सहजन (मोरिंगा), पपीता, मिर्च, करी पत्ता और लोबिया शामिल हैं. इन पांचों फसलों का चयन उनके पोषण मूल्य और केरल की जलवायु के अनुसार किया गया है. इनकी मदद से परिवार को रोजमर्रा की जरूरत के लिए पोषक तत्वों से भरपूर सब्जियां आसानी से मिल सकती हैं.
विश्वविद्यालय का कहना है कि यह मॉडल खासतौर पर उन परिवारों के लिए तैयार किया गया है जिनके पास खेती के लिए ज्यादा जमीन नहीं है. इसे अपनाने के लिए केवल करीब आधा सेंट जमीन या फिर घर की छत या बालकनी में रखे पांच बड़े गमले ही काफी हैं. यानी शहरों में रहने वाले लोग भी बिना ज्यादा जगह के अपना छोटा-सा किचन गार्डन तैयार कर सकते हैं.
केरल कृषि विश्वविद्यालय ने बताया कि इस मॉडल में शामिल सभी फसलें पोषण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं.
इन पांच फसलों को नियमित रूप से उगाने से परिवार को संतुलित और पौष्टिक भोजन मिल सकता है.
केरल कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति टी. सजिता रानी ने कहा कि यह पहल लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे परिवार अपने घर में ही सुरक्षित और ताजी सब्जियां उगा सकेंगे. उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति को प्रतिदिन लगभग 300 ग्राम सब्जियां खानी चाहिए, लेकिन केरल में औसतन लोग केवल 100 से 120 ग्राम सब्जियों का ही सेवन कर पाते हैं. 'पंचकम' मॉडल का उद्देश्य इसी पोषण संबंधी कमी को दूर करना है.
'पंचकम' मॉडल की अवधारणा केरल कृषि विश्वविद्यालय के सब्जी विज्ञान विभाग के एमेरिटस प्रोफेसर टी. प्रदीप कुमार ने विकसित की है. उनका मानना है कि अगर हर परिवार अपने घर में इन पांच फसलों की खेती शुरू कर दे, तो न केवल पौष्टिक भोजन मिलेगा बल्कि बाजार पर निर्भरता भी कम होगी. वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि घर पर उगाई गई सब्जियों में रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं होता, जिससे परिवार को सुरक्षित भोजन मिलता है. इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर सब्जियां उगाने से परिवहन की जरूरत कम होती है, जिससे पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है.
केरल कृषि विश्वविद्यालय का मानना है कि 'पंचकम' मॉडल भविष्य में शहरी खेती को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा सकता है. इससे सीमित जगह वाले घरों में भी लोग आसानी से पौष्टिक सब्जियां उगा सकेंगे, परिवार की पोषण सुरक्षा मजबूत होगी और स्वस्थ खानपान की आदत को बढ़ावा मिलेगा. ऐसे में 'पंचकम' मॉडल उन लोगों के लिए एक सरल और उपयोगी पहल है, जो कम जगह में भी अपना किचन गार्डन बनाकर सालभर ताजी, पौष्टिक और सुरक्षित सब्जियों का लाभ उठाना चाहते हैं.
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