सोयाबीन फसलदेश भर में 24 जुलाई तक लगभग 113.65 लाख हेक्टेयर के विशाल रकबे में सोयाबीन की बुवाई हो चुकी है. हमारे देश में खाने के तेल की जरूरतों को पूरा करने के लिए सोयाबीन की फसल बहुत ही अहम भूमिका निभाती है. जिन किसानों ने बुवाई का काम पूरा कर लिया है, उनके लिए अब आने वाला समय बहुत ही अहम है. खेत में केवल बीज बो देने से किसान की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती, बल्कि बेहतरीन और रिकॉर्ड तोड़ पैदावार हासिल करने के लिए सही समय पर सही कदम उठाना बेहद जरूरी होता है. शुरुआती दिनों में फसल की सही तरीके से देखभाल करना बहुत जरूरी है ताकि सोयाबीन के पौधे मजबूत बन सकें और आगे चलकर ज्यादा से ज्यादा फलियां आ सकें. बुवाई के तुरंत बाद खेत में सबसे बड़ा मसला खरपतवार यानी फालतू घास-फूस का निकलना होता है, इसके साथ ही फसल को सही मात्रा में खाद देना भी बेहद जरूरी है.
भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान इंदौर के कृषि विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि अगर खरपतवार का सही समय पर इलाज नहीं किया गया, तो फसल को खाद और पानी का पूरा फायदा कभी नहीं मिल पाएगा. जैसे-जैसे खेत में फालतू घास बड़ी होती है, वह जमीन की ताकत चूसने लगती है, जिससे हमारे सोयाबीन के पौधे कमजोर रह जाते हैं. इससे निपटने के लिए किसान हाथों से निराई-गुड़ाई कर सकते हैं. यह बहुत ही पुराना और असरदार तरीका है, जिसमें मजदूर खुरपी से फालतू घास को जड़ से उखाड़ फेंकते हैं. अगर आपका खेत बड़ा है और समय कम है, तो आप बैलों या ट्रैक्टर की मदद से कतारों के बीच डोरा या कुल्पा चला सकते हैं. इससे मिट्टी भुरभुरी होती है, खरपतवार कट जाता है और जड़ों में हवा का गुजर बेहतर होता है.
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक जिन किसानों की सोयाबीन फसल 10 से 20 दिन की हो चुकी है और अभी तक खरपतवार नियंत्रण की कोई दवा नहीं डाली है, उनके लिए रासायनिक तरीका अपनाना एक बेहतरीन विकल्प है. इस समय खड़ी फसल में अनुशंसित खरपतवारनाशक दवा का छिड़काव किया जा सकता है. आप इमेज़ेथापायर या क्विजालोफॉप-इथाइल जैसी दवाओं का उपयोग कर सकते हैं, जो फालतू घास को जड़ से समाप्त कर देती हैं.दवा छिड़कते समय पानी की मात्रा का ध्यान रखें. हाथ वाली नेपसेक मशीन से एक हेक्टेयर खेत में 450 से 500 लीटर पानी मिलाएं. वहीं अगर पावर स्प्रेयर का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो 120 से 150 लीटर पानी काफी रहता है. दवा का बेहतर असर पाने के लिए हमेशा फ्लैट फैन या फ्लड जेट नोजल का ही प्रयोग करें.
फसल से बेहतर उत्पादन हासिल करने के लिए सही मात्रा में खाद का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है, क्योंकि बिना अच्छी खुराक के पौधे कभी बेहतर उपज नहीं दे सकते. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार सोयाबीन के लिए संतुलित अनुपात में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सल्फर देना चाहिए. अगर आपने बुवाई के समय पूरी खाद नहीं दी है, तो अब खेत में सही तरीके से खाद डालें. प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 56 किलो यूरिया, 375 से 400 किलो सिंगल सुपर फास्फेट और 67 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश खेतों में डालें. इसके अलावा सड़ी हुई गोबर की खाद या मुर्गी की खाद जैसी ऑर्गेनिक खाद बहुत फायदेमंद होती है. ध्यान रखें कि खाद हमेशा पौधों की जड़ों के करीब ही डालें, ताकि फसल को तुरंत ताकत मिले और सोयाबीन के दाने मोटे व भारी बनें.
मानसून के मिजाज और भारी बारिश की संभावना को देखते हुए खेत में जल निकासी का बहुत ही पुख्ता इंतजाम रखें. बारिश का जमा हुआ फालतू पानी खेत से बाहर निकालना बेहद जरूरी है, वरना सोयाबीन के पौधे गलकर पूरी तरह खराब हो सकते हैं.अगर जड़ों के पास पानी भरा रहा तो पौधों को हवा नहीं मिलेगी और बीमारियां तेजी से फैलेंगी. अगर आप इन सभी जरूरी बातों का ध्यान रखेंगे, तो आपकी मेहनत का बेहतरीन नतीजा मिलेगा. सही समय पर खरपतवार का सफाया, खाद का सही संतुलन और खेत से फालतू पानी निकालने का सही प्रबंधन करके आप बेहद कम लागत में सोयाबीन की एक बहुत ही शानदार, सेहतमंद और भारी मुनाफा देने वाली फसल आसानी से प्राप्त कर सकते हैं.
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