इस साल देश में मॉनसून अपने चरम पर रहा. कई इलाकों में सामान्य से अधिक बरसात हुई तो कई जगहों में बाढ़ की तबाही भी देखी गई. अधिक बारिश और बाढ़ के चलते सबसे अधिक नुकसान किसानों को उठाना पड़ा है. कई जगहों में जलजमाव के कारण फसलें नष्ट हुई हैं तो कई जगह मिट्टी का कटाव देखा गया है. बिहार, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में लाखों एकड़ फसलें नष्ट हुई हैं. इसके अलावा आम लोगों के जीवन में भी बाढ़ से काफी नुकसान हुआ है. इस खबर में एक ऐसे उपाय के बारे में बताने जा रहे हैं जिसको अपनाकर किसान बाढ़ से कुछ हद तक निजात पा सकते हैं.
आपको बता दें कि वाटर रीचार्जिंग सिस्टम अधिक पानी और बाढ़ जैसी स्थिति से किसानों की फसल सुरक्षा के लिए एक प्रभावी उपाय हो सकता है. यह सिस्टम वर्षा जल को इकट्ठा करने में मदद करता है, जिससे बाढ़ का खतरा कम होता है. हालांकि ज्यादातर किसान इसके बारे में कम जानते हैं. बता दें कि अगर आपके खेत एक चक हैं तो आपको अधिक फायदा होगा. किसान अपने खेतों के ढालदार निचले हिस्सों में गड्ढे खोदें और एक सिस्टम के तरह वाटर रिचार्जिंग सिस्टम बनाएं इससे जलभराव की स्थिति बनने पर पानी जमीन के भीतर चला जाएगा और बाढ़ की संभावना कम होगी.
वाटर रिचार्जिंग सिस्टम का फायदा भारी बारिश से होने वाले फसल के नुकसान से बचाता है. इस तकनीक से खेत में पानी भरने की बजाय जमीन के भीतर चला जाता है. ये तकनीक किसानों के लिए बहुत असरदार हो सकती है. आइए जान लेते हैं कि इसके और क्या फायदे हैं.
ये भी पढ़ें: Bihar: बिहार में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना शुरू, सितंबर से 10 हजार रुपए की पहली किस्त
हालांकि इस सिस्टम के तहत धीरे-धीरे पानी जमीन के भीतर जाता है जिसके कारण बड़े पैमाने की बाढ़ को कंट्रोल कर पाना आसान नहीं होता है. स्थानीय कृषि विशेषज्ञों या जल संरक्षण विभाग से संपर्क करके आप इसके बारे में अधिक जानकारी ले सकते हैं. इसके अलावा जल शक्ति अभियान या मनरेगा के तहत इसके निर्माण में भी मदद मिल सकती है.
ये भी पढ़ें: