Cyclone Alert: किसानों के लिए एडवाइजरी जारी, गेहूं-चना की बुआई टालने की सलाह

Cyclone Alert: किसानों के लिए एडवाइजरी जारी, गेहूं-चना की बुआई टालने की सलाह

चक्रवात के खतरे को देखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है. गेहूं, चना और मसूर की बुआई नवंबर के पहले सप्ताह तक टालने, खेतों में जल निकासी करने, पकी फसलों को सुरक्षित रखने और पशुओं को बारिश व तेज हवाओं से बचाने की सलाह दी गई है.

धर्मेंद्र सिंह
  • Raipur ,
  • Oct 29, 2026,
  • Updated Oct 29, 2026, 9:35 AM IST

छत्तीसगढ़ में चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए किसानों और पशुपालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने किसानों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं.विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना को देखते हुए फसलों को नुकसान से बचाने के लिए पहले से तैयारी करना जरूरी है. किसानों को खेतों में जल निकासी की व्यवस्था करने, पकी फसलों की कटाई और कृषि उपज के सुरक्षित भंडारण पर ध्यान देने को कहा गया है.

गेहूं, चना और मसूर की बुआई अभी टालें

मौसम विभाग के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए किसानों को फिलहाल गेहूं, चना और मसूर जैसी रबी फसलों की बुआई नहीं करने की सलाह दी गई है. मौसम साफ होने के बाद नवंबर के पहले सप्ताह से बुआई शुरू करना बेहतर रहेगा.

बारिश के कारण खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान हो सकता है.इसलिए किसानों को खेतों में अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करनी चाहिए. तेज हवाओं से फसलों के गिरने की आशंका को देखते हुए भी जरूरी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.

अनाज और बीजों का सुरक्षित भंडारण करें

बारिश के दौरान अनाज और बीजों को भी नुकसान पहुंच सकता है. ऐसे में किसानों को अपनी उपज को ढककर सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए.अनाज को साफ और हवादार जगह पर रखें। भंडारण से पहले उसे अच्छी तरह सुखाना जरूरी है, ताकि नमी के कारण अनाज खराब न हो.

बीजों को सुरक्षित रखने से पहले उनकी अंकुरण क्षमता और कीटों से बचाव का ध्यान रखें. भंडारण स्थल की छत और फर्श की जांच करें. साथ ही, पानी की निकासी की उचित व्यवस्था करें.विभाग ने मौसम साफ होने तक फसलों में कीटनाशक और खरपतवारनाशक का छिड़काव नहीं करने की सलाह दी है.

 सब्जियों और बागवानी फसलों को कैसे बचाएं?

तेज हवाओं और बारिश से सब्जियों तथा बागवानी फसलों को नुकसान हो सकता है. जिन सब्जियों और फलों की फसल पक चुकी है, उनकी जल्द कटाई या तुड़ाई करके बाजार भेजने की व्यवस्था करें. बागवानी फसलों में खाद का इस्तेमाल मौसम साफ होने के बाद ही करें.फूलगोभी, ब्रोकोली, चुकंदर और पत्तागोभी जैसी रबी सब्जियों की बुआई और रोपाई नवंबर के पहले सप्ताह से शुरू करने की सलाह दी गई है.

करेला, लौकी और दूसरी बेल वाली सब्जियों को तेज हवा से बचाने के लिए सहारा दें. केले के जिन पौधों में फूल या फल आ रहे हैं, उन्हें बांस के सहारे से मजबूती दें.खेतों में पानी जमा न होने दें.

बारिश के बाद आलू की फसल में झुलसा रोग और दूसरी फसलों में बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.इसलिए फसलों की नियमित जांच करें। कीट या बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद कृषि विशेषज्ञ की सलाह से उचित दवा का छिड़काव करें.

 पशुओं को सुरक्षित और सूखी जगह पर रखें

चक्रवात के दौरान पशुओं की सुरक्षा भी जरूरी है.पशुओं को सूखे और सुरक्षित स्थान पर रखें. तेज हवा और बिजली गिरने की आशंका के दौरान उन्हें पेड़ों के नीचे न बांधें. उनके लिए साफ पानी और सूखे चारे की पर्याप्त व्यवस्था करें.

हरा चारा, सूखा चारा और पशु आहार ऐसी जगह रखें, जहां बारिश का पानी न पहुंचे. यदि पशु सुस्त दिखाई दे, खाना कम कर दे या उसे दस्त और सांस लेने में परेशानी हो, तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें.

 मौसम की जानकारी लेकर ही करें खेती के काम

कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार ही खेती से जुड़े काम करें. तेज बारिश और बिजली गिरने के दौरान खेतों में जाने से बचें. जल निकासी, फसल कटाई और भंडारण की व्यवस्था समय रहते कर लें.समय पर सावधानी बरतने से किसान अपनी फसलों, अनाज और पशुधन को चक्रवात के संभावित नुकसान से काफी हद तक बचा सकते हैं.

 

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