जशपुर के किसान अनारथ साय ने एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय एकीकृत कृषि प्रणाली, फसल विविधीकरण, उद्यानिकी और संरक्षित खेती को अपनाने पर जोर दिया है.उनका मानना है कि उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग और आधुनिक तकनीक से खेती का जोखिम कम कर सालभर आय के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं.
मुंगेली के रोहराकला गांव की आदर्श महिला स्व-सहायता समूह ने प्राकृतिक बीजों से पर्यावरण-अनुकूल राखियां बनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है. बिहान योजना के सहयोग से महिलाओं को इस सीजन में 30 से 40 हजार रुपये अतिरिक्त आय की उम्मीद है.
रायगढ़ के किसान सुखदेव सिदार ने धान का रकबा घटाकर 4 एकड़ में सन बीज की खेती शुरू की है. इस खेती से करीब 4 लाख रुपये आय की उम्मीद है. कृषक उन्नति योजना, जैविक खेती और डेयरी मॉडल के जरिए वे फसल विविधीकरण की प्रेरक मिसाल बने हैं.
छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले की महिला किसान विमला दीदी ने आईएफसी के प्रशिक्षण के बाद मचान विधि से बरबटी की खेती अपनाकर उत्पादन और आय दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है.उनकी सफलता अब अन्य महिला किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है.
सरगुजा की महिला किसान एरिन भगत ने कृषि विभाग के मार्गदर्शन में जीवामृत और वर्मी कम्पोस्ट अपनाकर रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम की है. जैविक खेती से उनकी लागत घटी है, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ी है और वे अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गई हैं.
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पाटन में पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से धान की रोपाई किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है. इससे रोपाई की लागत लगभग आधी हो रही है, मजदूरों पर निर्भरता कम हो रही है और उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है. कृषि विभाग ने किसानों से आधुनिक कृषि यंत्र अपनाने की अपील की है.
छत्तीसगढ़ की कृषक उन्नति योजना के तहत किसान अब पारंपरिक धान की खेती छोड़कर अदरक जैसी लाभकारी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं.सरगुजा के किसान अमित कुमार सिंह ने आधुनिक तकनीक से एक एकड़ में अदरक की खेती कर करीब 5 लाख रुपये की आय अर्जित की. सरकार प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की आदान सहायता देकर फसल विविधीकरण को बढ़ावा दे रही है.
छत्तीसगढ़ के सुकमा की सोढ़ी तिरपो ने बिहान योजना और कस्टम हायरिंग सेंटर के प्रशिक्षण से हल-बैल छोड़ आधुनिक पावर टिलर अपनाया.जानिए कैसे आधुनिक खेती ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बना दिया.
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव के किसान वीरेंद्र कुमार साहू ने धान की जगह गेंदा फूल की खेती शुरू कर फसल विविधीकरण की नई मिसाल पेश की है.कम पानी, कम लागत, बेहतर बाजार और सरकार की 15 हजार रुपये की आदान सहायता के सहारे वे खेती को अधिक लाभकारी और जलवायु अनुकूल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में प्रगतिशील किसान हिमांशु बंजारे ने ढैंचा की हरी खाद अपनाकर प्राकृतिक खेती का सफल उदाहरण पेश किया है.ढैंचा मिट्टी में प्राकृतिक नाइट्रोजन बढ़ाकर उर्वरता सुधारता है, रासायनिक खाद की जरूरत कम करता है और खेती की लागत घटाने में मदद करता है.
धमतरी के केरेमुड़ा में किसानों को ग्राफ्टेड टमाटर और बैंगन की वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया.1 लाख से अधिक ग्राफ्टेड पौधों के वितरण के साथ शुरू हुई इस पहल से कम लागत में अधिक उत्पादन, रोग प्रतिरोधक क्षमता और किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है.
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नगरी विकासखंड में 250 किसानों ने वैज्ञानिक तरीके से हल्दी की खेती शुरू की है। प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और एफपीओ आधारित विपणन मॉडल के जरिए किसानों को बेहतर दाम दिलाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में यह अहम पहल मानी जा रही है।
अल नीनो और अनियमित बारिश के दौर में कोदो-कुटकी किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बन रही हैं.कम पानी और कम लागत में उगने वाली इन मिलेट फसलों को बेहतर बाजार मूल्य मिलने से किसानों की आय बढ़ने की नई संभावनाएं खुल रही हैं.
छत्तीसगढ़ के मल्हार के प्रगतिशील किसान जदुनंदन वर्मा ने जैविक सब्जियों और एप्पल की खेती से नई पहचान बनाई है. एक एकड़ में जैविक सब्जियों से सालाना करीब 2 लाख रुपये की आय अर्जित करने वाले जदुनंदन पिछले 10 वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और अब अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं.
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