छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में आत्मनिर्भरता दलहन मिशन के तहत 55 हेक्टेयर में छत्तीसगढ़ अरहर-1 और अरहर-2 किस्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है. फसल फूल आने की अवस्था में पहुंच गई है. कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक किसानों को फसल प्रबंधन, पोषण, कीट नियंत्रण और गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन की तकनीकी जानकारी दे रहे हैं.
महासमुन्द के गुलझर गांव के किसान गौरव कुठारे ने धान के साथ ग्राफ्टेड बैंगन की खेती अपनाकर आमदनी बढ़ाई.राष्ट्रीय कृषि विकास योजना से मिले 30 हजार रुपये के अनुदान और ड्रिप-मल्चिंग तकनीक की मदद से एक एकड़ में करीब 23 टन बैंगन का उत्पादन कर लगभग 2.65 लाख रुपये की सकल आमदनी हासिल की.
गुलाब की खेती ने बस्तर के किसान विकास कुमार श्रीवास्तव की कमाई बढ़ा दी. 8,000 वर्गमीटर में संरक्षित खेती से उन्होंने करीब 1.60 लाख गुलाब के डंठल पैदा किए और ₹8 लाख की आय हासिल की. ₹4.20 लाख की लागत निकालने के बाद उन्हें करीब ₹3.80 लाख का शुद्ध लाभ मिला.
घर से मशरूम उत्पादन शुरू कर मिथिला दीदी हर महीने करीब ₹50 हजार की कमाई कर रही हैं.बेहतर गुणवत्ता और स्थानीय बाजार में बढ़ती मांग ने उनके कारोबार को नई पहचान दी है.उनकी सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक मिसाल बन गई है.
रायगढ़ के किसान राज कुमार साहू ने वैज्ञानिक खेती और सरकारी योजना की मदद से बरबटी-खीरा की खेती में मुनाफे को 78 हजार से बढ़ाकर 2.70 लाख रुपये तक पहुंचाया.
किसान अंकित ने खेती को आधुनिक व्यवसाय के रूप में अपनाने की दिशा में पहल की है.जमीन-पानी का बेहतर नियोजन, सरकारी योजनाओं का लाभ और कृषि गतिविधियों में नवाचार के जरिए उनका खेत ग्रामीण उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रहा है.
धान की फसल में कीटों के संभावित प्रकोप को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है. डॉ. पी. के. राय ने नियमित निगरानी, प्रभावित पौधों को हटाने, कीटों के संरक्षण और जरूरत पड़ने पर ही अनुशंसित मात्रा में कीटनाशी इस्तेमाल करने की सलाह दी है.
छत्तीसगढ़ में सतावर की खेती किसानों के लिए कम लागत में अतिरिक्त आमदनी का नया जरिया बन रही है. धमतरी, कांकेर और कोंडागांव के 65 किसान करीब 140 एकड़ में इसकी खेती कर रहे हैं.
बस्तर की महिलाओं ने ऑर्गेनिक काजू और गुड़ से बिना शक्कर वाली खास काजू-कतली तैयार की है. वन धन विकास केंद्र, बकावंड की स्व-सहायता समूह की महिलाओं के इस नवाचार को वन मंत्री केदार कश्यप ने सराहा.बस्तर दशहरा और दीपावली पर ‘संजीवनी’ आउटलेट के जरिए इसकी बिक्री की तैयारी है.
बीजापुर में गाजर घास के बढ़ते खतरे को रोकने के लिए सात दिवसीय जागरूकता एवं उन्मूलन अभियान चलाया गया. किसानों और विद्यार्थियों को गाजर घास से फसल, पशु और स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान के साथ इसके सुरक्षित उन्मूलन के तरीके बताए गए.
आजीविका डबरियों और नवा तरिया में करीब 1 लाख मछली के बीज डाले जा रहे हैं. इससे 45 गांवों के 50 परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा. इस पहल से मछली उत्पादन बढ़ेगा और ग्रामीण परिवारों के लिए कमाई और रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे.
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