Wheat Variety: गेहूं की अगेती बुवाई के लिए ये 5 किस्में हैं बेस्ट, जानिए खासियत

Wheat Variety: गेहूं की अगेती बुवाई के लिए ये 5 किस्में हैं बेस्ट, जानिए खासियत

धान की कटाई के बाद किसान गेहूं की बुवाई की तैयारी में जुट गए हैं. ऐसे में अच्छी पैदावार के लिए उन्नत किस्मों का चुनाव करना जरूरी है. आइए जानते हैं गेहूं की कुछ अगेती किस्मों की खासियत, बुवाई का सही समय.

wheat farming tips gehu Gyanwheat farming tips gehu Gyan
संदीप कुमार
  • New Delhi,
  • Oct 22, 2026,
  • Updated Oct 22, 2026, 11:43 AM IST

देश के कई राज्यों में धान की कटाई शुरू हो गई है और किसान अब गेहूं की बुवाई की तैयारी में जुट गए हैं. लेकिन अच्छी पैदावार के लिए सिर्फ समय पर बुवाई करना ही काफी नहीं है, बल्कि सही किस्म का चुनाव करना भी बेहद जरूरी है. कई बार किसान उन्नत किस्मों को लेकर असमंजस में पड़ जाते हैं और अपने खेत की मिट्टी, जलवायु और सिंचाई की सुविधा के हिसाब से सही बीज नहीं चुन पाते. ऐसे में आइए जानते हैं गेहूं की कुछ अगेती उन्नत किस्मों के बारे में, जो किसानों को बेहतर उत्पादन हासिल करने में मदद कर सकती हैं.गेहूं की

गेहूं की 5 अगेती किस्मों की खासियत

1. DBW 303 (करण वैष्णवी): ये गेहूं की एक खास किस्म है. इस किस्म को भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल द्वारा विकसित किया गया है. यह किस्म उत्तर-पश्चिमी भारत में अगेती बुवाई और सिंचित परिस्थितियों के लिए बेस्ट है. इस किस्म की औसत पैदावार करीब 32 क्विंटल प्रति एकड़ और संभावित पैदावार लगभग 39 क्विंटल प्रति एकड़ तक है. वहीं, इसके दानों में करीब 12.1% प्रोटीन पाया जाता है और यह पीले और भूरे रतुआ जैसे रोगों के प्रति प्रतिरोधी है.

2. WH 1270: ये गेहूं की अगेती किस्म है. इस वैरायटी को हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किया गया है. गेहूं की ये किस्म कम अवधि में अच्छी पैदावार देने और मोटे दानों के लिए जानी जाती है. अनुकूल मौसम और उचित देखभाल मिलने पर इसकी पैदावार करीब 28 से 30 क्विंटल प्रति एकड़ तक हो सकती है.

3. DBW 327 (करण शिवानी): करण शिवानी गेहूं की अगेती की एक खास किस्म है. गेहूं की इस किस्म का तना मजबूत होता है, जिससे तेज हवा और बारिश के दौरान फसल गिरने यानी बिछने का खतरा कम हो सकता है. इसकी पैदावार क्षमता 30 क्विंटल प्रति एकड़ से अधिक हो सकती है.

4. HD 3226 (पूसा यशस्वी): गेहूं की यह उन्नत किस्म उत्तर-पश्चिमी भारत के सिंचित क्षेत्रों में समय पर बुवाई के लिए बेस्ट है. ICAR के मुताबिक, इसकी औसत पैदावार 57 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है. इसमें लगभग 12.8% प्रोटीन पाया जाता है. इसके अलावा, यह पीले, भूरे और काले रतुआ समेत गेहूं के कई प्रमुख रोगों के प्रति अच्छी प्रतिरोधक क्षमता रखती है.

5. DBW 187 (करण वंदना): गेहूं की यह उन्नत किस्म लगभग 120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. इसमें पीले और भूरे रतुआ जैसे प्रमुख रोगों के प्रति अच्छी प्रतिरोधक क्षमता पाई जाती है. ICAR के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, असम और पश्चिम बंगाल सहित उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्रों में सिंचित और समय पर बुवाई के लिए इसकी औसत पैदावार करीब 19 क्विंटल प्रति एकड़ तक है.

किसान ऐसे करें गेहूं की खेती

गेहूं की खेती के लिए सबसे पहले खेत को अच्छे से जोतकर तैयार करें. फिर बीज उपचार करके बुवाई करें. बीज उपचार करने के लिए बीज को कार्बेंडाजिम 50% W जैसे किसी रसायन से उपचारित करें. समय पर बुवाई के लिए 40 किलो प्रति एकड़ बीज की जरूरत होती है. वहीं, बुवाई की बात करें तो लाइन से लाइन की दूरी 22-25 सेमी रखते हुए सीड ड्रिल से बीज बोएं. बुवाई के समय डीएपी, यूरिया और पोटाश जैसी खाद डालें. उसके बाद फसल को 3-4 बार पानी दें.

MORE NEWS

Read more!