
चक्रवात 'अर्नब' के कारण हो रही लगातार बारिश से आंध्र प्रदेश के पूरे श्रीकाकुलम जिले में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. पोंडुरु मंडल के लैडम गांव के पास रेल्लिगड्डा धारा (नाला) भारी बारिश के कारण उफान पर है, जिससे लगभग 50 गांवों का सड़क संपर्क टूट गया है.
पोंडुरु, संथाकाविति और बुर्जा मंडल के निवासियों को इस धारा को पार करने में काफी कठिनाई हो रही है. इमरजेंसी स्थितियों में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि लोग सुरक्षित रूप से कहीं आ-जा नहीं पा रहे हैं. वहीं, सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि बाढ़ के पानी में डूब गई है, जिससे किसान अपनी फसलों को हुए नुकसान को लेकर बेहद परेशान हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि लैडम-रेल्लिगड्डा पुल पर यह समस्या हर बार भारी बारिश के समय आती है. उन्होंने चिंता जताई कि इतने साल बीत जाने के बाद भी इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है. लोगों ने अमादालावालासा के विधायक कुना रविकुमार और राजम के विधायक कोंद्रु मुरली कृष्ण से अपील की है कि वे पहल करें और इस समस्या को हल करने की दिशा में काम करें.
निवासी रेल्लिगड्डा धारा पर एक पक्का पुल बनाने की मांग कर रहे हैं, ताकि बारिश के मौसम और बाढ़ के दौरान बार-बार होने वाली परेशानियों को रोका जा सके. उन्होंने जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे तुरंत कार्रवाई करें और लोगों को आवागमन में हो रही दिक्कतों का स्थायी समाधान निकालें.
तट को पार करने के बाद भी चक्रवात 'अर्नब' का असर इस क्षेत्र में बना हुआ है. श्रीकाकुलम जिले के पलासा और उसके आसपास के इलाकों में अचानक तेज हवाएं चलने लगी हैं. साथ ही हो रही भारी बारिश से स्थानीय लोगों को काफी परेशानी हो रही है.
भारी बारिश और तेज हवाओं को देखते हुए, अधिकारियों ने लोगों को सलाह दी है कि जब तक बहुत जरूरी न हो, तब तक वे अपने घरों से बाहर न निकलें. चक्रवात की स्थिति को देखते हुए प्रशासन को पहले ही अलर्ट पर रखा गया है.
नुकसान के बारे में प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा, "राज्य की सड़कों पर 220 से ज़्यादा पेड़ गिर गए हैं, जिनमें से 170 से ज्यादा को हटा दिया गया है. तटीय जिलों के कुछ हिस्सों में सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और बिजली आपूर्ति बाधित हुई है. बहाली टीमें काम पर लगी हुई हैं."
भारी बारिश के कारण 70,900 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें (मुख्य रूप से धान) जलमग्न हो गईं, इसके अलावा 10,450 हेक्टेयर क्षेत्र में बागवानी फसलें भी प्रभावित हुईं.
नायडू के अनुसार, इसका सबसे अधिक असर कोनासीमा, काकीनाडा, पूर्वी गोदावरी और पश्चिमी गोदावरी जिलों में गोदावरी डेल्टा तट के साथ-साथ कृष्णा और अनाकापल्ली जिलों में देखने को मिला है.
विशाखापत्तनम शहर के चार वार्डों में पानी भर गया, जिसके चलते फायर सर्विस को 220 से अधिक इमरजेंसी कॉल अटेंड करने पड़े. इनमें से ज्यादातर कॉल गिरे हुए पेड़ों को हटाने और बचाव कार्यों से जुड़े थे.
उन्होंने कहा, "हमारी पहली प्राथमिकता बिजली और पीने के पानी की आपूर्ति बहाल करना, सड़कों को साफ करना, प्रभावित इलाकों में साफ-सफाई बनाए रखना और विस्थापित परिवारों की मदद करना है." उन्होंने जोर देकर कहा कि बारिश और तूफान का खतरा टलने तक आपातकालीन राहत टीमें तैनात रहेंगी.