
राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में लगे विंड पावर के काम नहीं आने वाली भूमि को आदिवासी काश्तकारों को देने की कार्यवाही की जाएगी. चूंकि यह जमीन तहसीलदार और पटवारी की रिपोर्ट में सिवायचक भूमि के रूप में दर्ज है इसीलिए उसे नियमानुसार आदिवासियों को आवंटित किया जाएगा. राजस्थान विधानसभा में यह जानकारी राजस्व मंत्री रामलाल जाट ने दी. उन्होंने कहा कि प्रतापगढ़ विंड पावर के लिए सरकारी भूमि को ही कंपनी को आवंटित किया गया था.
आवंटित भूमि के जिस हिस्से को तकनीकी कारणों से विंड मिल नहीं लग पा रही है उसका आवंटन निरस्त किया जाएगा और उस जमीन को आदिवासी किसानों के लिए आवंटित किया जाएगा.
जाट ने विधानसभा में जानकारी दी कि साल 2012-13 में प्रतापगढ़ में विंड पावर प्रोजेक्ट की स्थापना के लिए दो कंपनियों को 465.81 हैक्टेयर भूमि का आवंटन किया गया था. यह सरकारी जमीन थी. कम्पनियों ने यहां 438 मेगावाट बिजली बनाने की शर्त पर जमीन दी गई थी, लेकिन इन कंपनियों ने 438 मेगावाट के स्थान पर 390 मेगावाट के लिए ही प्लांट स्थापित किया. इस तरह लगभग 174.88 हेक्टेयर भूमि पर ट्रांसमिशन लाइन नहीं होने के कारण कंपनियों ने इसे काम में नहीं लिया. अब कम्पनी अपने प्लांट को 132 केवी से 220 केवी ग्रिड में अपग्रेड कर रही है. अगर इस अपग्रेडेशन के बाद भूमि बचेगी तो उस अनुपयोगी भूमि का आवंटन कंपनी के नाम से निरस्त किया जाएगा.
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राजस्व मंत्री ने कहा कि विण्ड पावर कम्पानियों को आवंटित अनुपयोगी भूमियों के आवंटन निरस्त करने के लिए कम्पनियों ने खुद ही आवेदन दिए हैं. उन्होंने कहा कि नियमानुसार आवंटन निरस्ति के बाद इस जमीन को यहां खेती करने वाले आदिवासियों को आवंटित किया जाएगा, हालांकि आवंटन के कुछ नियम हैं जिन्हें अमल में लाकर भूमि आवंटन किया जाएगा.
राजस्व मंत्री रामलाल जाट ने विधायक रामलाल मीणा के प्रश्न के जवाब में कहा कि प्रतापगढ़ में राजकीय भूमियों पर विण्ड पावर पवन ऊर्जा कंपनियों को स्वीकृत 438 MW पॉवर प्रोजेक्ट के लिए दो डेवलपर कम्पनियों एमएस रीगन पॉवर और वेल्पसन कंपनी के नाम 465.81 हैक्टेयर भूमि का आवंटन किया गया था. इस आवंटित भूमि पर रीगन पावर की ओर से कुल 1.5 मेगावाट की 151 इकाइयां स्थापित की गई हैं. इसी तरह वेल्पसन ने कुल दो मेगावाट की 71 इकाईयों की स्थापना की है.
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मुख्य रूप से पटवार हल्का रामपुरिया, रतनपुरिया, देवगढ़ से संबंधित कुल 18 राजस्व गांवों की कुल 174.88 हैक्टेयर भूमि की भौगोलिक स्थिति एवं तकनीकी कारणों ( जिनमें हवा के प्रवाह क्षेत्र की दिशा अलग होने, प्लांट के स्थान पर खाई होने व अत्यधिक ढलाननुमा स्थिति तथा अन्य कारणों से) अनुपयोगी रही है. इसीलिए इसे फिर से आदिवासी किसानों के लिए आवंटित किया जाएगा.
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