यूपी में आम का होगा बंपर उत्पादन, CISH लखनऊ-मेटा एग्रीटेक ने किसानों के लिए की खोजी नई तकनीक

यूपी में आम का होगा बंपर उत्पादन, CISH लखनऊ-मेटा एग्रीटेक ने किसानों के लिए की खोजी नई तकनीक

Mango Production: अवध आम उत्पादक बागवानी समिति के महासचिव उपेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि, इस अधुनिक मशीन से प्रदेश के लाखों किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा. जहां एक तरफ पैदावार बढ़ेगी, वहीं किसानों की आमदनी भी डबल होगी. उन्होंने बताया कि इस खास मशीन के प्रयोग से आम के पेड़ सुरक्षित रहेंगे, वहीं, आम में ना तो कीड़े लगेंगे. ना ही उनके साइज छोटे होंगे.

mango storyइन तकनीकों से आम की पैदावार बढ़ाने की संभावना हैmango storyइन तकनीकों से आम की पैदावार बढ़ाने की संभावना है
नवीन लाल सूरी
  • LUCKNOW,
  • Oct 21, 2026,
  • Updated Oct 21, 2026, 8:38 AM IST

आम का सीजन खत्म होते ही पेड़ों का रखरखाव बहुत जरूरी होता है. अक्सर देखने को मिलता है कि बड़े-बड़े आम के पेड़ के टहनियां एक दूसरे के साथ उलझी रहती है. ऐसे में आम के उत्पादन पर बहुत बड़ा असर पड़ता है. क्योंकि पेड़ की टहनियों के एक दूसरे के साथ उलझने से हवा और रोशनी का प्रभाव कम होता है, जिससे आम की पैदावार प्रभावित होती है. इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहमानखेड़ा स्थित केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (CISH) और मेटा एग्रीटेक ने इस समस्या का हल खोज निकाला है. CISH की पहल पर मेटा एग्रीटेक प्राइवेट लिमिटेड ने एक आधुनिक यंत्र का डेमोस्ट्रेशन मलिहाबाद में किया है. इसका प्रयोग करने से किसानों को लाभ होता है, वहीं आम के उत्पादन में वृद्धि होती है और उनकी आमदनी बढ़ती है. 

बेहतर फल गुणवत्ता और पैदावार बढ़ाने पर जोर

दरअसल, उत्तर प्रदेश में आम का उत्पादन बढ़ाने के लिए ICAR-CISH लखनऊ और Meta Agro ने आम के बागों के कायाकल्प, बेहतर फल गुणवत्ता और पैदावार बढ़ाने से जुड़ी तकनीकों पर काम जारी है. उधर, आम की बागवानी करने वाले लखनऊ के किसान अशफाक उत्तर प्रदेश के जाने-माने प्रगतिशील किसान हैं. अशफाक ने बताया कि बड़े-बड़े आम के पेड़ के टहनियां एक दूसरे के साथ उलझी रहती है. जिससे पेड़ों में हवा और लाइट का संचार नहीं हो पाता है. उन्होंने बताया कि जिसका सीधा असर आम की पैदावार पर पड़ता हैं.

आधुनिक मशीन का किया डेमोस्ट्रेशन

वहीं केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (CISH) और मेटा एग्रीटेक ने एक खास किस्म की आधुनिक मशीन का डेमोस्ट्रेशन किया. जिसके जरिए आम के पेड़ों की शाखाओं को अलग-अलग कर देगा. जिससे उसमें हवा और रोशनी का संचार होगा. किसान अशफाक ने आगे बताया कि इस पहल से आम का साइज भी बड़ा होगा, दूसरा उत्पादन भी बढ़ेगा. इन तकनीकों से आम की पैदावार बढ़ाने की संभावना है.

लाखों किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ 

अवध आम उत्पादक बागवानी समिति के महासचिव उपेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि, इस अधुनिक मशीन से प्रदेश के लाखों किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा. जहां एक तरफ पैदावार बढ़ेगी, वहीं किसानों की आमदनी भी डबल होगी. उन्होंने बताया कि इस खास मशीन के प्रयोग से आम के पेड़ सुरक्षित रहेंगे, वहीं, आम में ना तो कीड़े लगेंगे. ना ही उनके साइज छोटे होंगे ना ही उनका रंग फीका पड़ेगा. जिससे किसानों को मार्केट में अच्छे दाम मिलेगा. आम के प्रगतिशील किसान उपेंद्र सिंह ने कहा कि, सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉर्टीकल्चर (CISH) लखनऊ और मेटा एग्रीटेक छोटे आम उत्पादक किसानों को इस मशीन की ट्रेनिंग दे रही है. 

प्रदेश के 3.27 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में आम की बागवानी

बता दें कि उत्तर प्रदेश आम उत्पादन के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर है. प्रदेश के 3.27 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में लगभग 61.96 लाख मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता है, जो पूरे देश के कुल आम उत्पादन का लगभग 26.22 प्रतिशत है. उत्तर प्रदेश के दशहरी, लंगड़ा, चौसा, गौरजीत, लखनऊ सफेदा, रटौल और आम्रपाली जैसी प्रजातियां दुनिया भर में विख्यात हैं. इनका लखनऊ, सहारनपुर, मेरठ, मुरादाबाद, वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज मण्डलों में बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है.

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