कश्मीर की पारंपरिक धान किस्मों को पहचान दिलाने में जुटे वैज्ञानिक, किसानों की इनकम बढ़ाने का प्‍लान

कश्मीर की पारंपरिक धान किस्मों को पहचान दिलाने में जुटे वैज्ञानिक, किसानों की इनकम बढ़ाने का प्‍लान

कश्मीर में पारंपरिक धान की किस्मों को बढ़ावा देने के लिए SKUAST-K का खुडवानी केंद्र काम कर रहा है. यहां मुश्कबुदजी जैसे सुगंधित धान के संरक्षण के साथ शालीमार राइस जैसी अधिक उपज देने वाली किस्मों को प्रोत्साहित किया जा रहा है.

Kashmir Rice Varieties revivalKashmir Rice Varieties revival
अशरफ वानी
  • Srinagar/Kulgam,
  • Oct 19, 2026,
  • Updated Oct 19, 2026, 1:39 PM IST

शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कश्मीर (SKUAST-K) के वैज्ञानिक जम्मू-कश्मीर की पारंपरिक धान की किस्मों को दोबारा खेती में बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं. विश्वविद्यालय के माउंटेन रिसर्च सेंटर फॉर फील्ड क्रॉप्स (MRCFC), खुडवानी, कुलगाम में पारंपरिक सुगंधित धान की किस्मों को संरक्षित करने के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है. इस पहल का उद्देश्य कश्मीर की कृषि विरासत को बचाना और किसानों के लिए धान की खेती को ज्‍यादा फायदेमंद बनाना है.

पारंपरिक मुश्कबुदजी की खेती को बढ़ावा

कश्मीर की पहचान से जुड़ी सुगंधित धान की किस्म मुश्कबुदजी को दोबारा खेती में लोकप्रिय बनाने पर खास ध्यान दिया जा रहा है. इसके साथ ही शालीमार राइस जैसी अधिक उपज देने वाली किस्मों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है. वैज्ञानिकों की यह कोश‍िश पारंपरिक किस्मों की खासियतों को सुरक्षित रखने और आधुनिक कृषि जरूरतों के बीच संतुलन बनाने पर केंद्रित है. इससे किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल किस्मों के विकल्प उपलब्ध कराने और उनकी आय बढ़ाने की संभावनाओं को मजबूत करने में मदद मिल सकती है.

1950 के दशक से धान अनुसंधान का केंद्र

कश्मीर में धान प्रमुख अनाज फसलों में शामिल है और बड़ी संख्या में किसान परिवारों की आजीविका इससे जुड़ी है. इसी महत्व को देखते हुए खुडवानी में 1950 के दशक की शुरुआत में धान अनुसंधान एवं क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना की गई थी. केंद्र का प्रमुख उद्देश्य ऐसी धान किस्मों का विकास करना है, जो अधिक उपज देने के साथ कम समय में पकें और क्षेत्र में मौजूद जैविक तथा पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर सकें.

20 हेक्टेयर क्षेत्र में अनुसंधान और बीज उत्पादन

MRCFC खुडवानी करीब 20 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है. इसमें 15 हेक्टेयर भूमि अनुसंधान और बीज उत्पादन के लिए उपलब्ध है. केंद्र कश्मीर की अलग-अलग कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप फसल तकनीक विकसित करने में योगदान दे रहा है. यहां धान के अलावा सरसों और गेहूं की किस्मों पर भी काम किया गया है. इन अनुसंधान गतिविधियों का उद्देश्य घाटी के मैदानी इलाकों से लेकर 2,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले ठंडे क्षेत्रों तक खेती की जरूरतों के मुताबिक समाधान विकसित करना है.

आधुनिक तकनीकों से खेती को बेहतर बनाने की कोशिश

पारंपरिक किस्मों के संरक्षण और नई किस्मों के विकास के साथ केंद्र में फसल उत्पादन और फसल सुरक्षा से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का भी प्रदर्शन किया जा रहा है. इन तकनीकों के जरिए खेती के तरीकों में सुधार, फसल की सुरक्षा और किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने पर जोर है. अनुसंधान को खेतों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ना इस पहल का अहम हिस्सा है.

कृषि विरासत के साथ किसानों की आय पर ध्यान

कश्मीर में धान की खेती के सामने चुनौती केवल उत्पादन बढ़ाने की नहीं, बल्कि क्षेत्र की विशिष्ट पारंपरिक किस्मों को बचाए रखने की भी है. SKUAST-K का खुडवानी केंद्र अनुसंधान, बेहतर खेती पद्धतियों और क्‍वालिटी के बीज उत्पादन के माध्यम से इन दोनों लक्ष्यों को साथ लेकर चलने की दिशा में काम कर रहा है. पारंपरिक सुगंधित धान को बढ़ावा देने और अधिक उपज वाली किस्मों को अपनाने के प्रयासों से किसानों को खेती के बेहतर विकल्प मिल सकते हैं.

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