
त्रिपुरा सरकार राज्य में किसानों की कमाई बढ़ाने और पाम ऑयल का उत्पादन बढ़ाने के लिए खेती का दायरा बढ़ा रही है. सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में 6,000 हेक्टेयर जमीन पर ऑयल पाम की खेती करने का लक्ष्य रखा है. इसमें से 4,700 हेक्टेयर जमीन पर खेती की जा चुकी है. बाकी 1,300 हेक्टेयर में मार्च 2027 तक खेती करने की योजना है. राज्य सरकार किसानों को मुफ्त पौधे और आर्थिक सहायता देकर इस खेती से जोड़ रही है.
त्रिपुरा के कृषि एवं किसान कल्याण और बागवानी विभाग के निदेशक पीबी जमातिया ने बताया कि राज्य में ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. वित्त वर्ष 2026-27 में 6,000 हेक्टेयर जमीन पर इसकी खेती करने का लक्ष्य रखा गया है. अब तक 4,700 हेक्टेयर जमीन पर ऑयल पाम लगाया जा चुका है. बाकी जमीन पर मार्च 2027 तक खेती पूरी करने की योजना है. उन्होंने बताया कि राज्य में ऑयल पाम उगाने वाले किसानों की संख्या 10,000 से ज्यादा हो गई है. सरकार खासकर पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को इस खेती के लिए जागरूक कर रही है. विभाग का मानना है कि इन क्षेत्रों में ऑयल पाम की खेती किसानों के लिए कमाई का एक अच्छा साधन बन सकती है.
त्रिपुरा सरकार किसानों को ऑयल पाम की खेती शुरू करने में मदद दे रही है. इसके लिए निजी संस्थाओं की ओर से संचालित नर्सरी के माध्यम से किसानों को मुफ्त पौधे दिए जा रहे हैं. इससे किसानों को खेती शुरू करने के लिए पौधे खरीदने पर ज्यादा पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा. इसके अलावा, केंद्र सरकार भी ऑयल पाम की खेती करने वाले किसानों को चार साल तक आर्थिक सहायता दे रही है. इसका उद्देश्य किसानों को नई फसल अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है. शुरुआती वर्षों में पौधों के बड़े होने और फल देने में समय लगता है. ऐसे में आर्थिक सहायता से किसानों को खेती की शुरुआत में मदद मिल सकती है.
ऑयल पाम की खेती की एक खास बात यह है कि किसान इसके साथ दूसरी फसलें भी उगा सकते हैं. विभाग के निदेशक पीबी जमातिया के अनुसार, रबर की खेती के मुकाबले ऑयल पाम के साथ दूसरी फसलें उगाने का विकल्प किसानों को अतिरिक्त कमाई का मौका दे सकता है. ऑयल पाम के पौधे को पूरी तरह तैयार होने में करीब चार साल लगते हैं. एक बार पौधा फल देने लगता है, तो यह लगभग 30 साल तक उत्पादन दे सकता है. इससे किसानों को लंबे समय तक कमाई का अवसर मिल सकता है. हालांकि, वास्तविक कमाई मौसम, देखभाल, उत्पादन और खेती की लागत पर भी निर्भर करेगी.
ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने इसके बीजों की खरीद के लिए सुनिश्चित कीमत की घोषणा की है. इससे किसानों को अपनी उपज का उचित दाम मिलने की उम्मीद है. खेती के साथ-साथ फसल की खरीद और बाजार तक पहुंच भी किसानों के लिए महत्वपूर्ण है. त्रिपुरा सरकार का कहना है कि राज्य की जलवायु और खेती से जुड़ी परिस्थितियां ऑयल पाम के उत्पादन के लिए अनुकूल हैं. इसी वजह से सरकार आने वाले वर्षों में इसका रकबा और बढ़ाना चाहती है. हालांकि, किसानों को खेती शुरू करने से पहले स्थानीय मौसम, पानी की उपलब्धता और दूसरी फसलों पर पड़ने वाले असर को भी ध्यान में रखना होगा.
त्रिपुरा सरकार ने अगले वित्त वर्ष 2027-28 के लिए ऑयल पाम की खेती का लक्ष्य बढ़ाकर 10,000 हेक्टेयर करने की योजना बनाई है. इसके लिए किसानों को जागरूक करने और उन्हें खेती से जुड़ी सुविधाएं देने पर जोर दिया जाएगा. अगर यह लक्ष्य पूरा होता है, तो राज्य में ऑयल पाम की खेती का क्षेत्र और बढ़ सकता है. इससे किसानों को पारंपरिक फसलों के अलावा कमाई का एक नया विकल्प मिल सकता है. सरकार की योजना खेती के साथ-साथ फसल की खरीद और प्रसंस्करण की सुविधाएं विकसित करने की भी है.
ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देने के लिए त्रिपुरा सरकार नलकाटा और बेलबारी में प्रसंस्करण फैक्ट्रियां लगाने की दिशा में काम कर रही है. नलकाटा में प्रस्तावित फैक्ट्री नॉर्थ त्रिपुरा जिले में और बेलबारी में प्रस्तावित फैक्ट्री वेस्ट त्रिपुरा जिले में होगी. विभाग के अनुसार, दोनों फैक्ट्रियों को दिसंबर 2027 के अंत तक चालू करने की उम्मीद है. इन इकाइयों में ऑयल पाम से जुड़ी उपज को प्रोसेस किया जा सकेगा. इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए राज्य से बाहर के बाजारों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है.
त्रिपुरा में ऑयल पाम की खेती बढ़ाने की योजना के तहत सरकार मुफ्त पौधे, आर्थिक सहायता और प्रसंस्करण सुविधाओं पर काम कर रही है. राज्य में अभी 10,000 से ज्यादा किसान इस खेती से जुड़े हैं और सरकार आने वाले वित्त वर्ष में इसका दायरा बढ़ाना चाहती है. ऑयल पाम की खेती से किसानों को लंबे समय तक कमाई का मौका मिल सकता है, लेकिन इसके लिए सही देखभाल, उपज की खरीद और बाजार की सुविधा जरूरी होगी. प्रस्तावित फैक्ट्रियां चालू होने के बाद किसानों को अपनी उपज बेचने में मदद मिलने की उम्मीद है.
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