अल नीनो का असर: तेलंगाना सरकार ने किसानों को धान की खेती से किया सावधान

अल नीनो का असर: तेलंगाना सरकार ने किसानों को धान की खेती से किया सावधान

तेलंगाना में घटते जलस्तर और संभावित जल संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने किसानों से रबी सीजन में धान की खेती नहीं करने की अपील की है. सरकार का कहना है कि अल नीनो के प्रभाव के कारण अगले 9-10 महीनों तक पानी की भारी कमी रह सकती है. ऐसे में किसानों को कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों की ओर रुख करने की सलाह दी गई है.

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क‍िसान तक
  • नई दिल्ली,
  • Oct 16, 2026,
  • Updated Oct 16, 2026, 4:16 PM IST

जैसे-जैसे किसान रबी सीजन की तैयारी को आगे बढ़ा रहे हैं, तेलंगाना सरकार ने उनसे इस सीजन में धान की खेती न करने को कहा है, क्योंकि राज्य के सभी जलाशयों में पानी का स्तर बहुत नीचे गिर गया है.

हालांकि कृषि मंत्री टी. नागेश्वर राव और अन्य सरकारी अधिकारियों ने पिछले कुछ हफ्तों में यही बात कही है, लेकिन मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने खुद किसानों से अपील की है कि वे गर्मियों के सीजन में धान की खेती न करें. उन्होंने कहा कि अल नीनो (El Niño) के कारण राज्य को अगले 9-10 महीनों तक पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है.

तेलंगाना उन कुछ राज्यों में से एक है जहां गर्मियों के सीजन में धान की खेती होती है. यहां 21 लाख एकड़ जमीन पर यह मुख्य फसल उगाई जाती है. हालांकि, इसमें से ज्यादातर (उबले हुए चावल) का इस्तेमाल राज्य के भीतर नहीं होता है, लेकिन कांग्रेस सरकार द्वारा 500 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस देने की घोषणा के बाद, किसानों ने 'सुपर फाइन' (बेहतरीन किस्म के) धान की खेती बढ़ानी शुरू कर दी है.

गुरुवार को स्थिति की समीक्षा करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा, "तभी हम तेलंगाना में पीने के पानी की आपूर्ति सुरक्षित रख पाएंगे. अगर किसान पानी की कमी के समय धान की बुवाई करते हैं, तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है और इससे पीने के पानी की स्थिति पर भी असर पड़ सकता है."

किसानों ने सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाए

वहीं, किसान सरकार की तैयारियों में कमी को लेकर उसकी आलोचना कर रहे हैं. तेलंगाना रायतू संघम के सचिव टी. सागर ने कहा, "अगर सरकार ने कालेश्वरम परियोजना और पालमुरु-रंगा रेड्डी परियोजना को फिर से शुरू करने पर ध्यान दिया होता, तो इस सीजन में राज्य के कई हिस्सों में पर्याप्त पानी होता."

"किसानों से धान की खेती न करने के लिए तब कहा जा रहा है, जब बाजार में इसकी भारी मांग है. अभी उत्तर भारत में खुदरा बाजार में चावल (प्रीमियम क्वालिटी) 80 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रहा है." उन्होंने कहा, "अगर हम इस सीजन में धान की खेती नहीं करते हैं, तो आने वाले कुछ महीनों में कीमतें और बढ़ जाएंगी."

विपक्ष ने बिजली आपूर्ति की आलोचना की

विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने खरीफ फसल के अहम चरण में किसानों को अच्छी क्वालिटी वाली बिजली न दे पाने के लिए सरकार की आलोचना की.

कृषि मंत्री ने किसानों से धान की जगह दालें उगाने को कहा, जिनमें कम पानी की जरूरत होती है, ताकि इस स्थिति से निपटने में मदद मिल सके.

जलाशयों में पानी का भंडार काफी कम

मुख्यमंत्री ने बताया कि कृष्णा बेसिन में पिछले साल इसी समय की तुलना में 72% कम पानी है. सामान्य तौर पर, इस समय राज्य के सभी जलाशयों में 462 TMC पानी होता था. लेकिन अभी केवल 200 TMC पानी बचा है.

राज्य सरकार का कहना है कि अक्टूबर में बिजली की मांग बढ़कर 20,000 MW हो गई है, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह 15,000 MW थी.

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