
देश में खरीफ सीजन के दौरान सोयाबीन उत्पादन में मामूली गिरावट आने का अनुमान है. सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के पहले फसल अनुमान के मुताबिक, इस साल उत्पादन 2.11 फीसदी घटकर 107.93 लाख टन रह सकता है. मध्य प्रदेश और राजस्थान में अच्छी पैदावार के कारण महाराष्ट्र समेत कुछ राज्यों में हुए फसल नुकसान का असर काफी हद तक कम होने की उम्मीद है.
SOPA के मुताबिक, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना में लंबे समय तक बारिश नहीं होने और मिट्टी में नमी की कमी से सोयाबीन की फसल को नुकसान पहुंचा है. इन तीनों राज्यों में कुल 7.02 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई फसल पूरी तरह नष्ट हो गई, जिससे उसकी कटाई नहीं हो सकी.
देश के सबसे बड़े सोयाबीन उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में इस साल उत्पादन बढ़कर 57.16 लाख टन पहुंचने का अनुमान है. पिछले खरीफ सीजन में राज्य में 43.24 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन हुआ था. इस तरह राज्य में उत्पादन में 32.2 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है.
SOPA के अनुसार, मध्य प्रदेश में सोयाबीन का रकबा भी बढ़ा है. पिछले साल के 48.64 लाख हेक्टेयर के मुकाबले इस बार रकबा 52.09 लाख हेक्टेयर हो गया है. वहीं, औसत उत्पादकता 889 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 1,108 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रहने का अनुमान है.
राजस्थान में सोयाबीन उत्पादन 48.2 फीसदी बढ़कर 9.47 लाख टन पहुंचने का अनुमान है. इसके उलट महाराष्ट्र में उत्पादन 33.2 फीसदी घटकर 34.88 लाख टन रह सकता है. SOPA के मुताबिक, मध्य प्रदेश और राजस्थान में बेहतर पैदावार ने महाराष्ट्र में उत्पादन घटने से होने वाले नुकसान की काफी हद तक भरपाई की है.
SOPA के आंकड़ों के मुताबिक, चालू खरीफ सीजन में देशभर में 117.73 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई हुई है. पिछले साल यह रकबा 112.14 लाख हेक्टेयर था. यानी इस साल सोयाबीन का कुल रकबा करीब 5 लाख हेक्टेयर बढ़ा है.
हालांकि, कम नमी और सूखे जैसी परिस्थितियों के कारण 7.76 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ. इसके चलते सोयाबीन की वास्तविक कटाई का क्षेत्र घटकर 109.98 लाख हेक्टेयर रह गया.
SOPA के अनुमान के मुताबिक, इस साल कटाई वाले क्षेत्र में सोयाबीन की औसत उत्पादकता 981 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रहने की संभावना है. इसके आधार पर कुल उत्पादन 107.93 लाख टन रहने का अनुमान है. पिछले खरीफ सीजन में देश में 110.26 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन हुआ था और औसत उत्पादकता 983 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रही थी.
SOPA के कार्यकारी निदेशक डी. एन. पाठक ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि इस बार मध्य प्रदेश में सोयाबीन की फसल अच्छी रही है और राजस्थान में भी उत्पादकता बेहतर रही है. उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों में अधिक उत्पादन से महाराष्ट्र में हुए नुकसान की लगभग भरपाई हो गई है. देश में सोयाबीन का रकबा भी पिछले सीजन की तुलना में करीब 5 लाख हेक्टेयर बढ़ा है.