यूपी से पूरे दक्षिण एशिया तक, खेती में नई क्रांति लाएगा आगरा का इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर

यूपी से पूरे दक्षिण एशिया तक, खेती में नई क्रांति लाएगा आगरा का इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर

आगरा में अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र की एक अहम बैठक हुई. इसका मकसद इसे पूरे दक्षिण एशिया के लिए आलू और शकरकंद रिसर्च का मुख्य हब बनाना है. बैठक में तय हुआ कि नई तकनीकें अब सिर्फ लैब तक नहीं, बल्कि सीधे किसानों के खेतों में पहुंचेंगी। इससे पैदावार और किसानों की आमदनी तेजी से बढ़ेगी। साथ ही, पड़ोसी देशो के साथ मिलकर एक मजबूत नेटवर्क बनाने पर जोर दिया गया, ताकि खराब मौसम में भी फसलें महफूज रहें और किसानों को मेहनत का पूरा मुनाफा मिल सके.

आगरा बनेगा आलू रिसर्च का 'ग्लोबल हब'आगरा बनेगा आलू रिसर्च का 'ग्लोबल हब'
क‍िसान तक
  • नई दिल्ली,
  • Aug 22, 2026,
  • Updated Aug 22, 2026, 3:41 PM IST

उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर आगरा में 21 अगस्त 2026 को एक बेहद खास बैठक का आयोजन हुआ,यह अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (CIP) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (सीसार्क) की दूसरी समन्वय समिति की अहम बैठक थी. इसका मुख्य मकसद सीसार्क को केवल भारत नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के लिए आलू और शकरकंद की बेहतरीन रिसर्च का विश्वस्तरीय केंद्र बनाना है. भारत और यूपी सरकार के अधिकारियों के साथ नेपाल, बांग्लादेश और भूटान के कृषि विशेषज्ञों ने भी इसमें हिस्सा लिया. सीआईपी के महानिदेशक डॉ. सीमोन हेक और कृषि मंत्रालय के सचिव श्री अतिश चंद्रा ने इस शानदार कार्यक्रम की अध्यक्षता की. दिग्गजों ने जोर दिया कि सीसार्क महज स्थानीय सेंटर न रहे, बल्कि ज्ञान और तजुर्बे साझा करने का एक बड़ा क्षेत्रीय मंच बने. आगरा का यह केंद्र भारत की मजबूत वैज्ञानिक ताकत और दक्षिण एशियाई मुल्कों की जरूरतों के बीच एक अहम पुल बनेगा. इसका फायदा यह होगा कि हमारे यहां विकसित आधुनिक तकनीकें सरहदों के पार पहुंचेंगी और हम पड़ोसी मुल्कों के सफल तजुर्बों से सीख सकेंगे. अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र रीजनल डायरेक्टर डॉ. सुधांशु सिंह की देखरेख में आयोजित की गई.

किसानों की आमदनी बढ़ाने का पक्का समाधान 

इस बैठक के दौरान इस बात पर सबसे ज्यादा तवज्जो दी गई कि विज्ञान और नई खोज का असली फायदा तभी है, जब वह प्रयोगशाला से निकलकर सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचे. सीसार्क को एक ऐसा बेहतरीन मंच बनाने की कोशिश है, जो किसानों की जमीनी जरूरतों को समझकर पक्का समाधान दे. बदलते मौसम को देखते हुए ऐसी फसलें तैयार करना जरूरी है जो जलवायु की मार आसानी से बर्दाश्त कर सकें. इसलिए, उन्नत किस्मों, अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों, नई तकनीकों और बीमारियों की सटीक पहचान पर खास फोकस है. कृषि सचिव अतिश चंद्रा ने साफ शब्दों में कहा कि सीसार्क भारतीय खेती को तकनीक पर आधारित, बाजार के लायक और दुनिया में मुकाबले के लिए तैयार करने में बड़ी भूमिका निभाएगा. खेती के इन नए तरीकों का सीधा असर किसान की पैदावार और आमदनी पर दिखना चाहिए। इससे न सिर्फ किसानों की जेब में पैसा आएगा, बल्कि लोगों को बेहतर पोषण मिलेगा, जिससे पूरे समाज की सेहत और खुशहाली में एक बड़ा सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा.

य़ूपी से पूरे दक्षिण एशिया के किसानों की बदलेगी किस्मत 

आगरा में इस बड़े केंद्र की स्थापना का अपना अलग और खास महत्व है. उत्तर प्रदेश आलू की पैदावार का बड़ा राज्य है और आगरा इसका अहम गढ़ है. बैठक में तय हुआ कि सीसार्क के कामों को सिर्फ यूपी, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और ओडिशा तक सीमित न रखकर गुजरात, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश जैसे अन्य अहम राज्यों तक भी फैलाया जाएगा. इसके अलावा, "दक्षिण-दक्षिण सहयोग" के नजरिए से पड़ोसी देशों के साथ आपसी रिश्तों को और भी ज्यादा मजबूत करने पर पूरी रजामंदी बनी. सीआईपी और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के बीच पचास सालों से जो मजबूत साझेदारी चल रही है, उसे अब नई ऊर्जा देने का वक्त आ गया है. इस पहल से न सिर्फ ज्ञान का लेन-देन बढ़ेगा, बल्कि अच्छे बीजों और वैज्ञानिकों की काबिलियत का भी एक-दूसरे के मुल्कों में जमकर फायदा उठाया जाएगा. इससे पूरे दक्षिण एशिया में खेती का एक ऐसा मजबूत नेटवर्क बनेगा जो सभी किसानों को तरक्की के सुनहरे रास्ते पर ले जाएगा.

खेत से बाजार तक' का विजन और स्मार्ट फार्म

 समिति ने सीसार्क के बुनियादी ढांचे, वैज्ञानिक कार्यक्रमों और शानदार साझेदारियों की अब तक की तरक्की की बारीकी से समीक्षा की. बैठक में साल 2025-26 के कार्यक्रमों और 2026-31 की लंबी विकास योजना पर भी गहराई से विचार-विमर्श किया गया ताकि भविष्य का रास्ता एकदम साफ हो. सभी इस बात पर सहमत हुए कि सीसार्क को एक ऐसा मंच बनाया जाए जहाँ से "खेत से बाजार तक" नई तकनीकों को आसानी से पहुँचाया जा सके. इस शानदार बैठक के खत्म होने के बाद, सदस्यों ने आगरा के सिंगना गांव में स्थित सीसार्क फार्म का भी दौरा किया. इस दौरे की अगुवाई एनबीसीसी के कार्यकारी निदेशक श्री प्रदीप शर्मा ने की. यहाँ सभी मेहमानों को कैंपस के निर्माण कार्य और वहां दी जाने वाली आधुनिक सुविधाओं की बारीकी से जानकारी दी गई। उन्होंने अपनी आंखों से देखा कि कैसे इस जगह को आलू और शकरकंद की नई खोजों के लिए एक बेहतरीन और विश्वस्तरीय ठिकाना बनाया जा रहा है, जो आने वाले कल में किसानों के लिए बहुत मददगार साबित होगा.

कृषि दिग्गजों और नीति-निर्माताओं का महाजुटान 

 इस बैठक में सीआईपी के महानिदेशक डॉ. साइमन हेक, कृषि सचिव श्री अतीश चंद्र और सीएसएआरसी के डायरेक्टर डॉ. सुधांशु सिंह मुख्य रूप से शामिल हुए। इनके साथ ही, हॉर्टिकल्चर कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार, उत्तर प्रदेश सरकार के हॉर्टिकल्चर विभाग के अपर मुख्य सचिव  बाबूलाल मीणा, सीआईपी के उप महानिदेशक डॉ. ह्यूगो कैम्पोस और राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के चेयरमैन श्री कपिल मीणा भी मौजूद रहे. पड़ोसी देश नेपाल के कृषि अनुसंधान परिषद से डॉ. युवराज भुसाल ने भी इसमें भाग लिया. इसके अलावा, तकनीक की मदद से भूटान कृषि विभाग के डायरेक्टर श्री योनटेंग यांगत्सन और बांग्लादेश कृषि मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री मुस्तफा कमाल वीडियो कॉल के जरिए जुड़े. इतने सारे खास और बड़े लोगों की मौजूदगी ने इस सेंटर के महत्व को और भी ज्यादा बढ़ा दिया है.

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