बारिश के इंतजार में विदर्भ, सोयाबीन की फली और कपास की ग्रोथ पर मंडरा रहा खतरा

बारिश के इंतजार में विदर्भ, सोयाबीन की फली और कपास की ग्रोथ पर मंडरा रहा खतरा

विदर्भ में बारिश के लंबे ब्रेक ने खरीफ फसलों पर संकट खड़ा कर दिया है. अकोला समेत कई जिलों में सोयाबीन फ्लावरिंग स्टेज पर है, जबकि कपास की फसल को लगातार नमी की जरूरत है. खेतों में मिट्टी की नमी तेजी से घट रही है और किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं. अमरावती में 32%, चंद्रपुर में 29%, नागपुर में 27% और अकोला में 25% बारिश की कमी दर्ज की गई है. बांधों में फिलहाल पर्याप्त पानी है, लेकिन बारिश नहीं होने पर रबी सीजन और पेयजल आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है.

कपास पर संकट है भारीकपास पर संकट है भारी
धनंजय साबले
  • अकोला,
  • Aug 21, 2026,
  • Updated Aug 21, 2026, 7:09 PM IST

विदर्भ में मॉनसून की रफ्तार थमने से किसानों की चिंता बढ़ गई है. जुलाई के अंतिम सप्ताह में हुई अच्छी बारिश से किसानों को राहत मिली थी, लेकिन अगस्त की शुरुआत से कई जिलों में बारिश का लंबा अंतराल बना हुआ है. इसका सबसे ज्यादा असर सोयाबीन और कपास जैसी प्रमुख खरीफ फसलों पर दिखाई देने लगा है. खेतों में नमी लगातार कम हो रही है और फसलें ऐसे समय में पानी की कमी झेल रही हैं, जब उन्हें सबसे अधिक नमी की आवश्यकता है.

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सोयाबीन इस समय फ्लावरिंग और पॉड डेवलपमेंट यानी फूल और फली बनने की अवस्था में है. वहीं कपास की फसल भी तेजी से बढ़वार के दौर में है. ऐसे समय में बारिश का लंबा ब्रेक फसल की उत्पादकता को प्रभावित कर सकता है.

सोयाबीन किसान की बढ़ी चिंता

अकोला जिले के गुलधी गांव के किसान विनोद पाटील ने इस साल सोयाबीन की खेती की है. उनके खेत में फसल खड़ी है, लेकिन लगातार बारिश नहीं होने से जमीन की नमी तेजी से घट रही है. सोयाबीन की फसल फिलहाल बढ़वार के स्टेज में है और उसे पर्याप्त नमी की जरूरत है.

विनोद पाटिल का कहना है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो फसल की बढ़वार और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं. सिंचाई के सीमित साधनों के कारण उन्हें पूरी तरह मॉनसून पर निर्भर रहना पड़ रहा है. उनका कहना है कि खेत सूखने लगे हैं और हर दिन के साथ चिंता बढ़ती जा रही है.

45 एकड़ कपास पर भी संकट

दूसरी ओर अकोला के यावलखेड़ रोड क्षेत्र में किसान भीमा सदाशिव लगभग 45 एकड़ क्षेत्र में कपास की खेती कर रहे हैं. इनमें 22 एकड़ उनकी खुद की भूमि है, जबकि करीब 23 एकड़ भूमि उन्होंने किराए पर ली है.

बारिश की कमी के कारण कपास की बढ़वार प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है. फसल को सुरक्षित रखने के लिए वे कीटनाशकों और जरूरी कृषि प्रबंधन उपायों का सहारा ले रहे हैं, लेकिन पर्याप्त बारिश के बिना फसल को लंबे समय तक बचाए रखना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है.

उनका कहना है कि खेती का भविष्य अब पूरी तरह आने वाली बारिश पर निर्भर है. यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन में गिरावट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.

विदर्भ में कहां कितनी बारिश की कमी

1 जून से 20 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार विदर्भ के कई जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है.

  • अमरावती : 32% कमी
  • चंद्रपुर : 29% कमी
  • नागपुर : 27% कमी
  • अकोला : 25% कमी
  • गढ़चिरौली : 24% कमी
  • वाशिम : 20% कमी
  • वर्धा : 19% कमी
  • भंडारा : 14% कमी

जबकि गोंदिया, यवतमाल और बुलढाणा की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बताई जा रही है.

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में बारिश नहीं हुई तो न केवल खरीफ उत्पादन प्रभावित होगा बल्कि मिट्टी की नमी में और गिरावट आने से कृषि संकट गहरा सकता है.

बांधों में फिलहाल पानी, लेकिन नई आवक जरूरी

बारिश की कमी का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं है. जलाशयों और बांधों में पानी की आवक भी प्रभावित हो रही है. नागपुर डिवीजन के 387 स्रोतों में औसत पानी करीब 58.37 प्रतिशत दर्ज किया गया है.

नागपुर डिवीजन में प्रमुख पानी का स्तर

  • वर्धा : 71.46%
  • गढ़चिरौली : 61.86%
  • नागपुर : 59.28%
  • चंद्रपुर : 57.74%
  • गोंदिया : 56.37%
  • भंडारा : 51.48%

वहीं अमरावती डिवीजन में औसत पानी का स्तर करीब 56.35 प्रतिशत है.

अमरावती डिवीजन में पानी का स्तर

  • यवतमाल : 86.02%
  • बुलढाणा : 70.73%
  • अमरावती : 46.91%
  • वाशिम : 40.19%
  • अकोला : 37.92%

विशेषज्ञों का मानना है कि जलाशयों में फिलहाल स्थिति संतोषजनक दिख रही है, लेकिन मॉनसून के बाकी दौर में नई आवक नहीं हुई तो रबी सीजन की सिंचाई और अगले गर्मी सीजन की पेयजल व्यवस्था पर असर पड़ सकता है.

मौसम पर टिकी किसानों की उम्मीद

डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय, अकोला के मौसम वैज्ञानिक डॉ. अरविंद तुपे के अनुसार आगामी दिनों में होने वाली बारिश की मात्रा और समय दोनों महत्वपूर्ण होंगे. उनका मानना है कि केवल बारिश होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि वह फसलों की जरूरत के समय और पर्याप्त मात्रा में हो.

फिलहाल विदर्भ के किसानों की नजर मॉनसून के अगले सिस्टम पर टिकी हुई है. खेतों में खड़ी सोयाबीन और कपास की फसलें बारिश का इंतजार कर रही हैं. किसानों का कहना है कि इस समय उनकी फसल की हालत "ऑक्सीजन पर" है और वह ऑक्सीजन बारिश ही है.

अगर जल्द अच्छी बारिश हुई तो खरीफ फसलों को राहत मिल सकती है, लेकिन बारिश का यह लंबा ब्रेक जारी रहा तो इसका असर केवल खरीफ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रबी फसल, सिंचाई और आने वाले महीनों की जल उपलब्धता पर भी दिखाई दे सकता है.

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