
तेलंगाना में इस साल खरीफ फसलों की बुवाई सामान्य रकबे तक पहुंच गई है, वहीं कपास की खेती का क्षेत्रफल भी उम्मीदों के उलट बढ़ा है. अल नीनो के असर और बारिश की अनिश्चितता के कारण कपास का रकबा घटने की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन राज्य में कपास की खेती करीब 3 लाख एकड़ यानी 1.21 लाख हेक्टेयर बढ़ गई है. कपास की आवक बढ़ने की संभावना को देखते हुए भारतीय कपास निगम यानी CCI ने अपने निर्धारित खरीद केंद्रों पर तैयारियां शुरू कर दी हैं. राज्य सरकार ने CCI से खरीद प्रक्रिया को सुचारू रखने को कहा है और इसके लिए हरसंभव मदद का भरोसा दिया है.
'बिजनेसलाइन' की रिपोर्ट के मुताबिक, तेलंगाना के कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने कपास की संभावित आवक को देखते हुए मिल मालिकों को अगले 2-3 हफ्तों में अपनी मिलें शुरू करने के निर्देश दिए हैं. सरकार का उद्देश्य कपास की आवक बढ़ने पर किसानों को बिक्री में परेशानी से बचाना और उपज के लिए पर्याप्त प्रसंस्करण क्षमता उपलब्ध रखना है.
इस साल तेलंगाना में खरीफ फसलों का कुल रकबा 47.71 लाख एकड़ यानी करीब 19.31 लाख हेक्टेयर रहा है. यह राज्य में खरीफ सीजन के सामान्य बुवाई क्षेत्र के बराबर है. हाल के हफ्तों में बारिश में देरी और अनियमित बारिश के कारण फसल उत्पादन को लेकर चिंता जरूर बनी हुई है.
कपास खरीद की निगरानी के लिए कृषि विभाग को जिला स्तर पर निगरानी समितियां गठित करने के निर्देश दिए गए हैं. इन समितियों में किसानों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि खरीद केंद्रों पर आने वाली व्यावहारिक समस्याओं की जानकारी सीधे किसानों से मिल सके.
हालांकि, किसानों ने कपास की बिक्री के लिए स्लॉट बुकिंग की व्यवस्था को लेकर शिकायतें दर्ज कराई हैं. किसानों के मुताबिक, पहले राज्य सरकार के ऐप पर मंडल स्तर के खरीद केंद्रों के लिए स्लॉट मिलते थे, लेकिन अब जिला स्तर पर स्लॉट आवंटित किए जा रहे हैं. इससे किसानों को अपने नजदीकी खरीद केंद्र पर उपज बेचने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है.
खम्मम जिले के किसान रामबाबू ने बताया कि स्लॉट बुकिंग की पुरानी व्यवस्था में किसानों को मंडल के हिसाब से खरीद केंद्र चुनने की सुविधा मिलती थी, जबकि मौजूदा व्यवस्था में जिला स्तर पर स्लॉट दिए जा रहे हैं.
किसानों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कृषि मंत्री ने केंद्र सरकार से किसान कपास ऐप में जरूरी बदलाव करने और किसानों के सुझावों को शामिल करने का आग्रह किया है. सरकार का जोर कपास खरीद व्यवस्था को किसान के लिए आसान बनाने पर है.
इस बीच, कुछ किसानों का कहना है कि हाल में कम बारिश से एक फायदा भी हुआ है. बारिश कम होने से खेतों में खरपतवार का प्रकोप घटा है, जिससे फसल की देखभाल में उन्हें कुछ राहत मिली है. हालांकि, कपास उत्पादन पर बारिश के असर को लेकर स्थिति आने वाले समय में और साफ होगी.