गंगा के उफान में डूबी किसानों की उम्मीद, चंदौली में सैकड़ों बीघे परवल की फसल बर्बाद

गंगा के उफान में डूबी किसानों की उम्मीद, चंदौली में सैकड़ों बीघे परवल की फसल बर्बाद

चंदौली में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से कछार में सब्जी की खेती करने वाले किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. सहजौर गांव में सैकड़ों बीघे परवल की फसल पानी में डूब गई है. किसान अजय की 10 बीघे में लगी फसल में 8 बीघे जलमग्न हो चुके हैं. किसानों को बाकी फसल और लागत डूबने का डर सता रहा है.

चंदौली में डूब गई परवल की फसलचंदौली में डूब गई परवल की फसल
उदय गुप्ता
  • Chandauli,
  • Aug 19, 2026,
  • Updated Aug 19, 2026, 5:02 PM IST

लगातार हो रही बारिश के कारण गंगा नदी इन दिनों उफान पर है. पूर्वी उत्तर प्रदेश के चंदौली में भी गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. इसके चलते नदी के किनारे बसे इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. हालांकि अभी रिहायशी इलाकों में पानी नहीं पहुंचा है, लेकिन गंगा के कछार में खेती करने वाले किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. नदी का पानी कछार के खेतों में पहुंचने से परवल समेत कई सब्जियों की फसल डूब गई है. किसानों को डर है कि अगर जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो बाकी बचे खेत भी पानी में डूब जाएंगे.

सहजौर गांव में जलमग्न हुए सब्जी के खेत

चंदौली के सहजौर गांव में गंगा का बढ़ता पानी खेतों के लिए मुसीबत बन गया है. गांव के पास गंगा नदी के कछार वाले इलाके में बड़ी संख्या में किसान सब्जियों की खेती करते हैं. यहां हर साल किसान परवल समेत कई तरह की सब्जियां उगाते हैं. पिछले करीब एक सप्ताह से गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. इसका असर अब खेतों पर साफ दिखाई दे रहा है. कछार में बने सैकड़ों बीघे सब्जी के खेत पानी में डूब चुके हैं. कई जगह परवल के पौधे पूरी तरह पानी में डूबे हुए हैं, जबकि कुछ खेतों में पानी तेजी से बढ़ रहा है.

10 बीघे में लगाई थी परवल, 8 बीघा फसल डूबी

सहजौर गांव के किसान अजय ने बताया कि उन्होंने गंगा नदी के किनारे कछार वाले इलाके में करीब 10 बीघे जमीन पर परवल की खेती की थी. इस खेती में उन्होंने काफी पैसा और मेहनत लगाई थी, लेकिन गंगा का पानी बढ़ने के कारण उनकी 8 बीघे की फसल जलमग्न हो चुकी है. अब उनके पास सिर्फ 2 बीघे फसल बची है. अजय को चिंता है कि अगर नदी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो बची हुई फसल भी पानी में डूब जाएगी और उनकी पूरी मेहनत बर्बाद हो जाएगी.

एक बीघे की फसल बर्बाद, किसानों को लागत निकलने की चिंता

गांव के ही किसान गुड्डू ने बताया कि उन्होंने करीब 3 बीघे में परवल की खेती की थी. इसमें से एक बीघा खेत बाढ़ के पानी में डूब चुका है और वहां लगी पूरी फसल बर्बाद हो गई है. गुड्डू समेत दूसरे किसानों की चिंता अब सिर्फ फसल बचाने की नहीं है, बल्कि खेती में लगी लागत निकालने की भी है. किसानों का कहना है कि परवल की खेती में बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और दूसरी चीजों पर काफी खर्च होता है. अगर पानी बढ़ने से पूरी फसल खराब हो गई तो उनकी लागत भी वापस नहीं आएगी.

पानी और बढ़ा तो बढ़ सकता है नुकसान

किसानों का कहना है कि फिलहाल वे पानी में डूबी फसल से जितनी सब्जी निकाल सकते हैं, निकालने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन लगातार बढ़ता जलस्तर उनके लिए बड़ी चिंता बना हुआ है. अगर गंगा का पानी इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो कछार के बाकी खेत भी जलमग्न हो सकते हैं. इससे न केवल परवल बल्कि दूसरी सब्जियों की फसल को भी नुकसान पहुंचेगा. किसानों को डर है कि बाढ़ का पानी लंबे समय तक खेतों में रहा तो फसल पूरी तरह खराब हो जाएगी और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा.

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