पोषण से भरपूर और जलवायु-अनुकूल सब्जी किस्मेंभारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी और महाराष्ट्र राज्य बीज निगम लिमिटेड (महाबीज) ने सब्जियों की खेती करने वाले किसानों के लिए बड़ी पहल की है. इस पहल से महाराष्ट्र के किसानों को जल्द ही ऐसी सब्जी किस्मों और हाइब्रिड बीजों का लाभ मिल सकता है, जो कम पानी में अच्छी उपज देने के साथ बदलते मौसम का सामना करने में सक्षम होंगी. महाराष्ट्र राज्य बीज निगम लिमिटेड (महाबीज), अकोला के प्रबंध निदेशक दिलीप स्वामी ने IIVR संस्थान का भ्रमण किया.
बता दें कि यह महाराष्ट्र की सरकारी बीज कंपनी है जो 40,000 से अधिक किसानों के साथ बीज उत्पादन कर किसानों को लाभ पहुंचा रही है. उनकी इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य आईआईवीआर द्वारा विकसित प्रमुख सब्जी किस्मों एवं हाइब्रिड तकनीक को महाराष्ट्र के किसानों के लिए उपयुक्त बनाकर प्रदेश के किसानों तक पहुंचाना था. उनके साथ महाबीज के महाप्रबंधक डॉ. प्रफुल्ल लहाने ने भी संस्थान का भ्रमण किया और वैज्ञानिकों के साथ गहन संवाद किया.
प्रभारी निदेशक डॉ. अनंत बहादुर ने संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों पर विस्तृत प्रस्तुति दी. उन्होंने बताया कि संस्थान ने अब तक 60 से अधिक उन्नत सब्जी किस्में विकसित की हैं, जो देश के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों के लिए उपयुक्त हैं. उन्होंने कहा कि संस्थान सब्जी उत्पादक किसानों को हर प्रकार की तकनीक एवं उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराने के लिए तत्पर है. डॉ. अनंत बहादुर ने यह भी बताया कि संस्थान जीनोम एडिटिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से पोषण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित, कम रसायन वाली और अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों के विकास में जुटा है.
बैठक के दौरान दिलीप स्वामी ने कहा कि महाराष्ट्र के किसान बड़ी मात्रा में टमाटर, मिर्च, बैंगन, प्याज और पत्तेदार सब्जियों की खेती करते हैं और निर्यात से अच्छा लाभ कमा रहे हैं, परंतु वर्तमान में कीटनाशकों व रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी, पानी, किसान के स्वास्थ्य और सब्जी की गुणवत्ता पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ रहा है.
1. अधिक रसायन से उत्पादन लागत बढ़ रही है और उपज में कीटनाशक अवशेषों के कारण निर्यात में बाधा आ रही है.
2. जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान और बेमौसम बारिश से फसलें प्रभावित हो रही हैं, इसलिए क्लाइमेट रेजिलिएंट, हीट टॉलरेंट, रोग-प्रतिरोधी और कम पानी में अधिक उपज देने वाली किस्मों की तत्काल आवश्यकता है.
3. महाबीज ऐसी ही किस्में चाहता है जिनका प्रदर्शन विशेष रूप से विदर्भ जैसे सूखाग्रस्त क्षेत्र में बेहतर हो.
उन्होंने कहा कि वे IIVR के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर काम करते हुए महाराष्ट्र के लिए अनुशंसित, जलवायु-अनुकूल और पोषण-समृद्ध किस्मों को महाबीज की सीड चेन के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
महाप्रबंधक डॉ. प्रफुल्ल लहाने ने कहा कि कॉरपोरेशन विदर्भ क्षेत्र के लिए ऐसे हाइब्रिड बीज चाहता है जिसका प्रदर्शन वहां बेहतर रहे और जिसे राज्य के लिए अनुशंसित किया गया हो, उसे वे बड़े पैमाने पर किसानों के साथ आगे बढ़ाएंगे.
इस अवसर पर निदेशक, आईआईवीआर, डॉ. राजेश कुमार ने कि "आईआईवीआर का लक्ष्य केवल अधिक उपज नहीं, बल्कि सुरक्षित और टिकाऊ सब्जी उत्पादन है. हमारी जलवायु-अनुकूल, जैविक खेती के अनुकूल और कम कीटनाशक मांग वाली किस्में महाराष्ट्र जैसे प्रगतिशील राज्य के किसानों के लिए वरदान होंगी. महाबीज के साथ यह साझेदारी लैब से लैंड तक तकनीक पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होगी."
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