सोन नदी का रौद्र रूप! पानी बढ़ते ही टीलों पर खेती करने वाले किसानों को किया गया अलर्ट

सोन नदी का रौद्र रूप! पानी बढ़ते ही टीलों पर खेती करने वाले किसानों को किया गया अलर्ट

रोहतास के डेहरी में सोन नदी का जलस्तर बढ़ने से किसानों और पशुपालकों को अलर्ट किया गया है. विभिन्न जलाशयों और बराज से करीब 2 लाख क्यूसेक अतिरिक्त पानी पहुंचने के बाद नदी में तेजी से पानी बढ़ा. नदी के बीच बने बालू के टीलों पर खेती करने वाले किसानों से सुरक्षित स्थान पर लौटने की अपील की गई है.

सोन नदी के बीच खेती करने वालों सावधान!सोन नदी के बीच खेती करने वालों सावधान!
क‍िसान तक
  • Rohtas,
  • Aug 20, 2026,
  • Updated Aug 20, 2026, 6:35 PM IST

रोहतास जिले के डेहरी इलाके में सोन नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से प्रशासन सतर्क हो गया है. नदी में पानी बढ़ने के बाद जल संसाधन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने सोन नदी के बीच बने बालू के टीलों और ऊंचे स्थानों पर रहने वाले किसानों और पशुपालकों को सावधान रहने की सलाह दी है. प्रशासन ने लोगों से कहा है कि वे समय रहते इन जगहों को खाली कर सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं, क्योंकि जलस्तर में अचानक फिर बढ़ोतरी हो सकती है.

सोन नदी में अचानक बढ़ा पानी

बताया जा रहा है कि पिछले दिन विभिन्न बराज और जलाशयों से करीब दो लाख क्यूसेक अतिरिक्त पानी सोन नदी में पहुंचा. इसके बाद नदी के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी देखने को मिली. पानी बढ़ने के कारण नदी के बीच बने कई ऊंचे बालू के टीले भी अब खतरे की नजर से देखे जा रहे हैं.

बरसात के मौसम में सोन नदी का जलस्तर सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाता है. ऐसे में जब अलग-अलग जलाशयों से अतिरिक्त पानी छोड़ा जाता है तो नदी में पानी की मात्रा और बढ़ जाती है. इसी वजह से प्रशासन ने नदी के बीच रहने वाले लोगों को पहले से ही अलर्ट कर दिया है.

सोन नदी के बीच टीलों पर किसान करते हैं खेती

सोन नदी के बीच कई जगह पानी से ऊपर ऊंचे बालू के टीले बने हुए हैं. स्थानीय किसान इन जगहों का इस्तेमाल खेती के लिए करते हैं. इन टीलों पर कुछ किसान परवल, खीरा और दूसरी मौसमी सब्जियों की खेती करते हैं. खेती के साथ कुछ लोग अपने मवेशियों को भी इन्हीं जगहों पर रखते हैं.

नदी का पानी बढ़ने के कारण अब इन किसानों और पशुपालकों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है. प्रशासन ने उन्हें सलाह दी है कि वे अपनी फसल और मवेशियों को लेकर समय रहते नदी के बीच बने इन ऊंचे स्थानों से बाहर निकल जाएं. अधिकारियों का कहना है कि पानी का स्तर कभी भी तेजी से बढ़ सकता है, इसलिए आखिरी समय का इंतजार करना ठीक नहीं होगा.

नाव के सहारे सुरक्षित जगह लौट रहे लोग

जलस्तर बढ़ने के बाद सोन नदी के बीच खेती करने वाले कुछ लोग अब नाव के जरिए वापस आने लगे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि वे लोग हर साल नदी के बीच बने ऊंचे स्थानों पर खेती करते हैं, लेकिन बरसात के दौरान पानी बढ़ने पर वहां से वापस लौटना पड़ता है. हालांकि, अभी भी कुछ किसान अपनी फसल बचाने की कोशिश में नदी के बीच मौजूद हैं. कई पशुपालक भी अपने मवेशियों को लेकर वहीं रुके हुए हैं. ऐसे लोगों को प्रशासन की ओर से विशेष रूप से सावधान रहने को कहा गया है.

सिंचाई विभाग ने कहा- घबराने की जरूरत नहीं

सोन नदी का जलस्तर बढ़ने के बावजूद सिंचाई विभाग ने लोगों से घबराने की अपील नहीं की है. सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता अजय कुमार सिंह ने बताया कि फिलहाल सोन नदी का जलस्तर नियंत्रण में है और अभी किसी तरह की पैनिक की स्थिति नहीं है.

उन्होंने बताया कि नॉर्थ कोयल सहित अन्य जलाशयों से करीब दो लाख क्यूसेक पानी सोन नदी में पहुंचा था. इसी वजह से नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई. हालांकि अब स्थिति स्थिर हो गई है और फिलहाल खतरे जैसी कोई स्थिति नहीं है.

नदी किनारे रहने वालों को भी किया गया अलर्ट

अधिकारियों ने भले ही फिलहाल खतरे की स्थिति से इनकार किया है, लेकिन नदी के किनारे और नदी के बीच बने ऊंचे स्थानों पर रहने वाले लोगों को अलर्ट कर दिया गया है. प्रशासन का कहना है कि बारिश और जलाशयों से छोड़े जाने वाले अतिरिक्त पानी के कारण नदी का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है.

ऐसे में लोगों से अपील की गई है कि वे नदी के बीच जाने से बचें और पानी बढ़ने की स्थिति में तुरंत सुरक्षित जगह पर चले जाएं. खासकर किसानों और पशुपालकों को अपने मवेशियों को लेकर किसी तरह का जोखिम नहीं उठाने की सलाह दी गई है.

इंद्रपुरी बराज से नहरों में भी छोड़ा जा रहा अतिरिक्त पानी

सोन नदी में पानी बढ़ने के साथ इंद्रपुरी के सोन बराज से अतिरिक्त पानी विभिन्न नहरों में भी छोड़ा जा रहा है. बरसात के दौरान जब जलाशयों और बराज में पानी की मात्रा बढ़ जाती है, तब अतिरिक्त पानी को नियंत्रित तरीके से नदी और नहरों में छोड़ा जाता है.

फिलहाल सोन नदी का जलस्तर स्थिर बताया जा रहा है. इसके बावजूद प्रशासन और जल संसाधन विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. लोगों को सलाह दी गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, लेकिन प्रशासन की चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए सोन नदी के बीच और किनारे के संवेदनशील इलाकों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें.

किसानों के लिए जरूरी है समय पर सावधानी

सोन नदी के बीच खेती करने वाले किसानों के लिए इस समय सबसे जरूरी अपनी सुरक्षा और मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना है. फसल को बचाने की कोशिश में नदी के बीच रुकना जोखिम भरा हो सकता है. पानी का बहाव बढ़ने पर कुछ ही समय में हालात बदल सकते हैं. इसलिए प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि जलस्तर सामान्य दिखने पर भी नदी के बीच बने टीलों पर ज्यादा देर न रुकें. समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंचना ही सबसे बेहतर और सुरक्षित कदम है. (रंजन कुमार)

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