नूंह में खेती का नया मॉडल! ड्रिप सिंचाई के साथ 30 एकड़ में उगाए जा रहे ये फल

नूंह में खेती का नया मॉडल! ड्रिप सिंचाई के साथ 30 एकड़ में उगाए जा रहे ये फल

हरियाणा के नूंह जिले में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत बागवानी को बढ़ावा दिया जा रहा है. नीति आयोग के अनुसार, इस सीजन में 30 एकड़ जमीन को फल उत्पादन के तहत लाया गया है. किसान नींबू, अमरूद, किन्नू, आंवला और अनार की खेती कर रहे हैं. ड्रिप सिंचाई और नर्सरी विकास से फसल विविधीकरण और किसानों की आमदनी बढ़ाने पर जोर है.

नूंह में बागवानी का बढ़ता दायरानूंह में बागवानी का बढ़ता दायरा
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Aug 20, 2026,
  • Updated Aug 20, 2026, 3:08 PM IST

हरियाणा के नूंह जिले में किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ बागवानी की ओर बढ़ाने की कोशिश की जा रही है. नीति आयोग की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PM Dhan-Dhaanya Krishi Yojana) के तहत जिले में फलदार फसलों की खेती और नर्सरी विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है. इस सीजन में करीब 30 एकड़ जमीन को फल उत्पादन के तहत लाया गया है.

30 एकड़ में शुरू हुई फलदार फसलों की खेती

नूंह में किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसी के तहत इस सीजन में 30 एकड़ क्षेत्र में फलदार पौधे लगाए गए हैं. इससे किसानों के पास पारंपरिक खेती के अलावा बागवानी को भी आय के एक विकल्प के रूप में अपनाने का रास्ता खुल रहा है.

बागवानी वाली फसलों में एक बार पौधे तैयार होने के बाद कई वर्षों तक उत्पादन मिलने की संभावना रहती है. ऐसे में किसानों के लिए यह खेती लंबे समय में आमदनी का एक अतिरिक्त जरिया बन सकती है.

नींबू से अनार तक इन फलों की हो रही खेती

नूंह जिले में किसान अलग-अलग तरह के फलों की खेती कर रहे हैं. इनमें नींबू, अमरूद, किन्नू, आंवला और अनार प्रमुख हैं. जिले की जलवायु और खेती की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इन फलों को बढ़ावा दिया जा रहा है.

एक ही तरह की फसल पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग फसलों की खेती करने से किसानों को अपनी आय के स्रोत बढ़ाने में मदद मिल सकती है. यही वजह है कि बागवानी क्षेत्र का विस्तार फसल विविधीकरण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.

ड्रिप सिंचाई से पौधों को दिया जा रहा पानी

फलदार पौधों की खेती में पानी का सही इस्तेमाल बेहद जरूरी है. नूंह में किसान ड्रिप सिंचाई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं. इस तकनीक में पानी बूंद-बूंद करके सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है.

इससे पानी की बर्बादी कम करने और पौधों को जरूरत के मुताबिक पानी देने में मदद मिलती है. खासकर ऐसे क्षेत्रों में जहां पानी की उपलब्धता एक चुनौती है, वहां ड्रिप सिंचाई बागवानी खेती के लिए उपयोगी साबित हो सकती है.

नर्सरी विकास पर भी दिया जा रहा जोर

PM धन-धान्य कृषि योजना के तहत सिर्फ फलदार फसलों का क्षेत्र बढ़ाने पर ही ध्यान नहीं दिया जा रहा है, बल्कि नर्सरी विकास को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है. अच्छी गुणवत्ता वाले पौधों की उपलब्धता बागवानी को बढ़ाने के लिए जरूरी है.

स्थानीय स्तर पर नर्सरी विकसित होने से किसानों को फलदार पौधे आसानी से उपलब्ध हो सकते हैं. इससे बागवानी क्षेत्र को आगे बढ़ाने और नए किसानों को इस खेती से जोड़ने में मदद मिल सकती है.

फसल विविधीकरण से किसानों को फायदा

नूंह में बागवानी को बढ़ावा देने का एक बड़ा उद्देश्य किसानों को पारंपरिक फसलों पर पूरी तरह निर्भर रहने से बचाना है. फलदार फसलों को खेती में शामिल करने से किसानों की फसल संरचना में बदलाव आ सकता है और उनकी आमदनी के नए रास्ते खुल सकते हैं.

नीति आयोग की रिपोर्ट में नूंह में बागवानी क्षेत्र के विस्तार को किसानों की समृद्धि से जोड़कर देखा गया है. 30 एकड़ में फलदार फसलों की शुरुआत इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. नींबू, अमरूद, किन्नू, आंवला और अनार जैसी फसलों के साथ ड्रिप सिंचाई को अपनाने से जिले में आधुनिक और विविध खेती को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

खेती के साथ बढ़ेगी बागवानी की भूमिका

नूंह में चल रही यह पहल बताती है कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है. फल उत्पादन, नर्सरी विकास और पानी की बचत वाली तकनीकों को अपनाकर खेती को ज्यादा विविध और टिकाऊ बनाने की कोशिश की जा रही है.

PM धन-धान्य कृषि योजना के तहत बागवानी क्षेत्र का विस्तार आगे भी जारी रहता है तो इससे नूंह के किसानों को नए फलों की खेती अपनाने, अपनी आमदनी के स्रोत बढ़ाने और जिले में बागवानी आधारित कृषि को मजबूत करने में मदद मिल सकती है.

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