
गेहूं रबी मौसम की सबसे ज़रूरी फसलों में से एक है. हमारे घरों में रोज़ जो रोटी बनती है, वह गेहूं से ही बनती है. किसान जब गेहूं की अच्छी खेती करते हैं, तो घर-परिवार और देश दोनों को फायदा होता है. गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए समय पर सिंचाई बहुत जरूरी होती है. अगर पानी कम या ज्यादा हो जाए, तो फसल को नुकसान हो सकता है.
गेहूं की खेती में दूसरी सिंचाई बहुत अहम मानी जाती है. इस समय पौधे बड़े होने लगते हैं और उनमें बालियां बनने की तैयारी शुरू हो जाती है. इन्हीं बालियों में बाद में दाने बनते हैं. अगर इस समय पानी सही मात्रा में न मिले, तो दाने कम बनते हैं और फसल कमजोर हो जाती है. इसलिए किसान को इस समय बहुत सावधानी रखनी चाहिए.
कृषि विशेषज्ञ शिव शंकर वर्मा बताते हैं कि गेहूं की दूसरी सिंचाई बुवाई के करीब 40 से 45 दिन बाद करनी चाहिए. इस समय को गांठ बनने या टिलरिंग का समय कहा जाता है. इस दौर में पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और नई शाखाएं निकलती हैं. अगर इस समय खेत सूखा रहे, तो पौधों की बढ़त रुक जाती है और उपज कम हो सकती है.
दूसरी सिंचाई के समय यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि खेत में न तो ज्यादा पानी भरे और न ही बहुत कम पानी दिया जाए. ज्यादा पानी देने से पौधों की जड़ें सड़ सकती हैं और कम पानी देने से पौधे सूख सकते हैं. हल्की और बराबर सिंचाई करना सबसे अच्छा तरीका माना जाता है. इससे पानी पौधों तक सही तरह पहुंचता है.
सिंचाई से पहले मौसम की जानकारी लेना भी बहुत जरूरी है. अगर बारिश होने वाली हो, तो सिंचाई कुछ दिनों के लिए रोक देना अच्छा होता है. इससे पानी की बचत होती है और खेत में जरूरत से ज्यादा नमी नहीं होती. समझदारी से लिया गया यह फैसला फसल को नुकसान से बचा सकता है.
दूसरी सिंचाई के समय खेत में खरपतवार यानी बेकार घास भी उग आती है. ये खरपतवार पानी और खाद को अपने पास खींच लेते हैं, जिससे गेहूं के पौधों को पूरा पोषण नहीं मिल पाता. इसलिए दूसरी सिंचाई से पहले या बाद में निराई-गुड़ाई करना बहुत फायदेमंद होता है. इससे खेत साफ रहता है और पौधों को हवा और पोषक तत्व अच्छे से मिलते हैं.
दूसरी सिंचाई के साथ संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन खाद डालना भी जरूरी होता है. इससे गेहूं के पौधे अच्छे से बढ़ते हैं और बालियां मजबूत बनती हैं. लेकिन खाद तभी डालनी चाहिए जब खेत में नमी हो. सूखी मिट्टी में खाद डालने से पौधों को नुकसान हो सकता है.
अगर किसान दूसरी सिंचाई सही समय पर और सही तरीके से करते हैं, तो गेहूं की फसल मजबूत और स्वस्थ रहती है. इससे दाने अच्छे बनते हैं और पैदावार बढ़ती है. थोड़ी सी सावधानी और सही जानकारी से किसान अपनी मेहनत का पूरा फल पा सकते हैं.
गेहूं की दूसरी सिंचाई फसल की नींव जैसी होती है. अगर इस समय सही देखभाल की जाए, तो आगे चलकर फसल बहुत अच्छी होती है. इसलिए कम पानी भी न दें और ज्यादा पानी भी नहीं, बल्कि संतुलन बनाकर सिंचाई करें. यही अच्छी और भरपूर गेहूं की पैदावार का सही रास्ता है.
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