
राजस्थान का नागौर जिला इन दिनों भीषण ठंड की चपेट में है. उत्तरी बर्फीली हवाओं के तेज प्रभाव से शुक्रवार रात न्यूनतम तापमान में अचानक 18 डिग्री की गिरावट दर्ज हुई और पारा 0.4 डिग्री सेल्सियस पर आ पहुंचा. इससे नागौर, प्रदेश का दूसरा सबसे ठंडा जिला बन गया. फसलों पर बर्फ जैसी सफेद चादर जम गई, जिसे स्थानीय लोग "पाला" या "बर्फ जमना" कह रहे हैं. शनिवार को भी ठंड में कोई खास राहत नहीं मिली. अधिकतम तापमान 18.3 डिग्री और न्यूनतम 4 डिग्री दर्ज किया गया. 22 किमी/घंटा की रफ्तार से चल रही ठंडी हवाओं ने शीतलहर जैसा एहसास दिलाया, जिससे रातें और भी असहनीय हो गईं.
नागौर के किसानों के लिए यह ठंड सबसे बड़ी मार साबित हुई है. खासकर खड़ी सरसों की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है. किसान नवरतन लाल मेघवाल ने बताया कि इतनी बर्फ आज पड़ी है कि सरसों की फसल खराब हो गई है, ज्यादा पाला पड़ने से फूल और फलियां प्रभावित हो गई हैं, पैदावार बहुत कम होगी या लगभग नहीं ही होगी. उन्होंने आगे कहा कि हम पिछले 4 महीने से इसी फसल पर अपनी सारी उम्मीदें लगाए हुए थे. अब इस ठंड और बर्फ ने सारी मेहनत पर पानी फेर दिया है. ऐसे में उन्होंने सरकार से फसल बीमा के तहत मुआवजे की मांग की. कई अन्य किसानों ने भी बताया कि खेतों में जमे पानी और बर्फ से सरसों के पौधे झुलस गए हैं. कुछ इलाकों में गेहूं और जीरे को भी नुकसान की आशंका जताई जा रही है.