
इस साल मार्च में मौसम ने अचानक करवट ले ली है. जहां पहले तेज गर्मी पड़ रही थी, वहीं अब कई राज्यों में बारिश, आंधी और ओलावृष्टि हो रही है. खासकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे गेहूं उगाने वाले राज्यों में इस बदले मौसम का असर देखा जा रहा है. खेतों में खड़ी लगभग तैयार फसल पर तेज हवा और बारिश का सीधा असर पड़ा है, जिससे किसान परेशान हैं. कई किसानों ने बारिश से ठीक पहले अपने खेतों में पानी लगाया था. जब तेज हवा और बारिश आई, तो गेहूं की फसल झुक गई या गिर गई. इससे फसल को नुकसान हुआ है. मेरठ के एक किसान ने बताया कि उनके खेत में लगभग 60 प्रतिशत फसल गिर गई. अगर धूप नहीं निकली, तो उत्पादन में 10 प्रतिशत तक कमी आ सकती है.
कुछ कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि नुकसान बहुत ज्यादा नहीं होगा और यह कुछ इलाकों तक ही सीमित रह सकता है. लेकिन किसानों को डर है कि फसल की पैदावार कम हो सकती है और गेहूं की गुणवत्ता भी खराब हो सकती है. माना जा रहा है कि कुछ राज्यों में 6 से 8 प्रतिशत तक फसल का नुकसान हो सकता है.
अभी देश में गेहूं की कटाई बहुत कम हुई है. कुल मिलाकर केवल 4 प्रतिशत फसल ही काटी गई है. गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र में कटाई काफी हद तक हो चुकी है, लेकिन पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कटाई अप्रैल से शुरू होगी. ऐसे में अगर मौसम और खराब हुआ, तो और नुकसान हो सकता है.
सरकार के अनुसार इस साल गेहूं की बुवाई रिकॉर्ड स्तर पर हुई है. करीब 33.46 मिलियन हेक्टेयर में गेहूं बोया गया है. उम्मीद है कि इस साल करीब 120 मिलियन टन गेहूं उत्पादन होगा, जो पिछले साल से ज्यादा है. सरकार इस बार ज्यादा गेहूं खरीदने की भी योजना बना रही है.
अगर गेहूं की गुणवत्ता खराब होती है, तो बाजार में अच्छे गेहूं की मांग बढ़ सकती है. इससे कीमतें बढ़ सकती हैं. पिछले साल भी कई व्यापारियों ने ज्यादा कीमत पर गेहूं खरीदा था, जिससे उन्हें नुकसान हुआ था. इसलिए इस बार व्यापारी सोच-समझकर खरीदारी करेंगे.
इस समय किसान अपनी फसल को लेकर चिंतित हैं. वे चाहते हैं कि जल्दी धूप निकले ताकि फसल सूख सके और ज्यादा नुकसान न हो. अगर मौसम ठीक रहा, तो नुकसान कम हो सकता है, लेकिन अगर बारिश और आंधी जारी रही, तो किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. इस तरह, असमय बारिश ने किसानों की मेहनत पर असर डाला है. अब सबकी नजर आने वाले मौसम पर टिकी है.
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