हरियाणा कृषि मेला में सीएम नायब सिंह सैनीचौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित दो दिवसीय कृषि मेला (खरीफ) का उद्घाटन सोमवार को नायब सिंह सैनी ने किया. इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण, पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य मंत्री श्याम सिंह राणा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज ने की.
इस वर्ष मेले की थीम “सतत कृषि: समृद्धि की राह” रखी गई है. मुख्यमंत्री ने मेले में अमर शहीदों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल तकनीक के आदान-प्रदान का मंच नहीं, बल्कि किसानों के नवाचार और समर्पण का उत्सव है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा देश के खाद्यान्न भंडार में अहम योगदान दे रहा है और इसका श्रेय किसानों, वैज्ञानिकों और सरकार की नीतियों को जाता है. उन्होंने डिजिटल कृषि, ड्रोन तकनीक और क्लाइमेट स्मार्ट फार्मिंग अपनाने पर जोर देते हुए युवाओं से कृषि को स्टार्टअप और व्यवसाय के रूप में अपनाने की अपील की.
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि यह मेला केवल ज्ञान और तकनीक के आदान-प्रदान का मंच नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत, समर्पण और नवाचार का उत्सव है. मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा आज देश के खाद्यान्न भंडार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, जिसका श्रेय किसानों, वैज्ञानिकों और सरकार की समन्वित नीतियों को जाता है. उन्होंने डिजिटल कृषि, ड्रोन तकनीक और क्लाईमेट स्मार्ट फार्मिंग को अपनाने पर बल देते हुए युवाओं से कृषि को व्यवसाय और स्टार्टअप के रूप में अपनाने का आह्वान किया.
उन्होंने मृदा स्वास्थ्य कार्ड, जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ जल संरक्षण के लिए धान की सीधी बुवाई पर 4500 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि देने की जानकारी दी. साथ ही ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को बढ़ावा देने की बात कही.
मेले में किसानों को ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ जैसी डिजिटल सेवाओं और विश्वविद्यालय की मौसम पूर्वानुमान प्रणाली के जरिए समय पर जानकारी उपलब्ध कराने पर भी प्रकाश डाला गया. बताया गया कि इस प्रणाली से 6 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिल रहा है.
कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने फसल विविधीकरण और जल संरक्षण पर जोर देते हुए किसानों से दलहनी और तिलहनी फसलों की पैदावार बढ़ाने का आह्वान किया. उन्होंने प्राकृतिक खेती को पर्यावरण के अनुकूल बताते हुए देसी गाय पालन को बढ़ावा देने की सलाह दी.
वहीं कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, मृदा क्षरण और जल संकट जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक और सतत कृषि पद्धतियों को अपनाना जरूरी है. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित उन्नत और कम अवधि में तैयार होने वाली किस्में किसानों की आय बढ़ाने में सहायक साबित हो रही हैं.
मेले में उन्नत बीज, आधुनिक कृषि यंत्र, जैविक खेती, पशुपालन और बागवानी से जुड़ी नई तकनीकों का प्रदर्शन किया गया, जहां किसान, वैज्ञानिक और कृषि विशेषज्ञों के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान हुआ.
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