
आम को फलों का राजा कहा जाता है. गर्मियों का मौसम आते ही लोग मीठे और रसीले आम का इंतजार करने लगते हैं. बच्चों से लेकर बड़ों तक हर किसी को आम बहुत पसंद होता है. इस बार प्रयागराज और आसपास के जिलों के लोगों के लिए खुशखबरी है. यहां इस साल आम की फसल बहुत अच्छी हुई है. इससे किसानों के साथ-साथ आम खाने वाले लोग भी काफी खुश हैं.
प्रयागराज जिले में कई तरह के आम उगाए जाते हैं. यहां दशहरी, लंगड़ा, चौसा, सफेदा और आम्रपाली जैसे आम बहुत प्रसिद्ध हैं. इन आमों का स्वाद बहुत मीठा और अच्छा होता है. पिछले कुछ सालों में किसानों ने कुछ नई किस्मों के आम भी उगाने शुरू किए हैं. इनमें रतौल, बॉम्बे ग्रीन, अंबिका अरुणिका और मल्लिका जैसी वैरायटी शामिल हैं.
इन नए आमों की मांग भी बाजार में बढ़ रही है. लोग अलग-अलग स्वाद के आम खाना पसंद कर रहे हैं. इसलिए किसान भी नई किस्मों की खेती की ओर ध्यान दे रहे हैं.
खुसरो बाग स्थित औद्योगिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र के प्रभारी विजय किशोर सिंह ने बताया कि इस बार मौसम आम की फसल के लिए अच्छा रहा. आंधी और तूफान से फसल को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ. आम के पेड़ों में अच्छे बौर आए थे, जिससे इस साल ज्यादा आम लगने की उम्मीद है.
उन्होंने बताया कि प्रयागराज के अलावा प्रतापगढ़ और कौशांबी जिले के आम भी काफी प्रसिद्ध हैं. प्रतापगढ़ के कुंडा इलाके का लंगड़ा और दशहरी आम लोगों को बहुत पसंद आता है. वहीं कौशांबी के सिराथू का फजली आम भी काफी मशहूर है. इन आमों को दूसरे शहरों और देशों तक भेजा जाता है.
प्रयागराज मंडल के प्रयागराज, प्रतापगढ़ और कौशांबी जिलों में बड़े पैमाने पर आम की खेती की जाती है. यहां लगभग 2400 से 2500 हेक्टेयर जमीन पर आम के बाग लगे हुए हैं. इन जिलों में हर साल करीब डेढ़ लाख टन आम का उत्पादन होता है.
अगर केवल प्रयागराज जिले की बात करें तो यहां 600 से 650 हेक्टेयर क्षेत्र में आम की बागवानी की जाती है. जिले में हर साल 10 हजार टन से ज्यादा आम पैदा होता है.
प्रयागराज और आसपास के जिलों का आम सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी पसंद किया जाता है. यहां से हर साल लगभग 50 हजार टन आम संयुक्त अरब अमीरात और ओमान जैसे देशों में भेजा जाता है. विदेशी लोग भी यहां के आम का स्वाद बहुत पसंद करते हैं. इससे किसानों को अच्छी कमाई होती है और क्षेत्र की पहचान भी बढ़ती है.
खुसरो बाग स्थित औद्योगिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र में आम की नई-नई किस्मों की पौध तैयार की जाती है. इन पौधों को किसानों तक पहुंचाया जाता है ताकि वे अच्छी गुणवत्ता वाले आम उगा सकें.
किसानों को आम की खेती से जुड़ी नई जानकारी और प्रशिक्षण भी दिया जाता है. पौधे लगाने के तीन से पांच साल बाद किसानों को अच्छी फसल मिलने लगती है. इससे उनकी आय भी बढ़ती है और खेती में फायदा होता है.
इस बार अच्छी फसल की उम्मीद से किसान काफी खुश हैं. बाजारों में भी जल्द ही मीठे और रसीले आम दिखाई देने लगेंगे. आम की खुशबू से पूरा प्रयागराज और आसपास का इलाका महक उठेगा. बच्चों से लेकर बड़े तक सभी लोग इस बार आम का भरपूर स्वाद ले सकेंगे.
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