
मध्य प्रदेश में मॉनसून की शुरुआत भले ही इस बार थोड़ी देर से हुई हो, लेकिन अच्छी बारिश के बाद अब सोयाबीन की बुवाई ने रफ्तार पकड़ ली है. सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) का कहना है कि राज्य के प्रमुख उत्पादक इलाकों में बारिश बेहतर होने से किसान तेजी से सोयाबीन की बुवाई में जुट गए हैं. संगठन को उम्मीद है कि इस साल सोयाबीन का कुल रकबा पिछले साल की तुलना में अधिक रहेगा. SOPA ने खरीफ 2026 की बुवाई का एक त्वरित सर्वे किया है. इसके अनुसार, 30 जून तक देश में लगभग 28.9 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुवाई हो चुकी है. वहीं, कृषि मंत्रालय के सरकारी आंकड़ों में यह रकबा केवल 6.9 लाख हेक्टेयर बताया गया है. SOPA का कहना है कि दोनों आंकड़ों में अंतर की वजह सरकारी रिपोर्टिंग में 7 से 10 दिन की देरी है.
SOPA के कार्यकारी निदेशक डी.एन. पाठक ने बताया कि मॉनसून देर से आने के कारण इस बार बुवाई पिछले साल की तुलना में कुछ देर से शुरू हुई. हालांकि, जून के अंतिम सप्ताह में अच्छी बारिश होने से किसानों ने तेजी से बुवाई शुरू कर दी है. उनके अनुसार, मध्य प्रदेश में जून के अंत तक करीब 15.56 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुवाई हो चुकी थी, जबकि सरकारी आंकड़ों में यह रकबा केवल 4.3 लाख हेक्टेयर बताया गया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि अगर मौसम अनुकूल रहा तो 15 जुलाई तक पूरे राज्य में सोयाबीन की बुवाई पूरी हो जाएगी.
SOPA के मुताबिक, महाराष्ट्र में अब तक लगभग 8.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुवाई हुई है, जबकि सरकारी आंकड़ा 1.19 लाख हेक्टेयर है. हालांकि राज्य के सभी जिलों में स्थिति एक जैसी नहीं है. कुछ जिलों में 40 से 50 प्रतिशत तक बुवाई पूरी हो चुकी है, जबकि कुछ क्षेत्रों में यह केवल 5 से 10 प्रतिशत तक ही हो पाई है. राजस्थान में भी सोयाबीन की बुवाई लगातार आगे बढ़ रही है. SOPA के अनुसार, वहां लक्ष्य वाले क्षेत्र का लगभग 35 से 40 प्रतिशत हिस्सा बोया जा चुका है और कुल रकबा करीब 3.5 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान है.
डी.एन. पाठक का कहना है कि इस बार कई किसान दोबारा सोयाबीन की खेती की ओर लौट रहे हैं. पिछले वर्ष जिन किसानों ने मक्का की खेती अपनाई थी, वे इस साल बेहतर बाजार भाव मिलने की उम्मीद में फिर से सोयाबीन बो रहे हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम उत्पादन पूरी तरह आने वाले तीन महीनों में होने वाली बारिश पर निर्भर करेगा. यदि मॉनसून सामान्य रहा, तो इस बार सोयाबीन का रकबा और उत्पादन दोनों पिछले साल से बेहतर रहने की संभावना है.