कॉफी पर मौसम की मार! कर्नाटक-केरल में कम बारिश से उत्पादन में गिरावट की आशंका

कॉफी पर मौसम की मार! कर्नाटक-केरल में कम बारिश से उत्पादन में गिरावट की आशंका

कर्नाटक और केरल के प्रमुख कॉफी उत्पादक इलाकों में इस मॉनसून सामान्य से कम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. बारिश की कमी का सबसे ज्यादा असर अरेबिका कॉफी पर पड़ने की आशंका है, जिससे 2026-27 के उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है.

कॉफी की खेतीकॉफी की खेती
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Aug 13, 2026,
  • Updated Aug 13, 2026, 8:50 AM IST

भारत में कॉफी की खुशबू के पीछे जिन इलाकों की सबसे बड़ी भूमिका है, इस बार उन राज्यों में मॉनसून में कम हुई बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. दरअसल, कर्नाटक और केरल के प्रमुख कॉफी उत्पादक क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम रही है. इसका असर अक्टूबर से शुरू होने वाले 2026-27 के कॉफी फसल वर्ष में उत्पादन पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. खास चिंता अरेबिका कॉफी को लेकर है, जबकि फिलहाल रोबस्टा की फसल बेहतर बताई जा रही है. हालांकि, आने वाले कुछ हफ्तों में बारिश का रुख ही यह तय करेगा कि फसल को कितनी राहत मिलती है.

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक के कोडागु, चिकमगलूर और हासन और केरल के वायनाड जिले में बारिश सामान्य से कम रही है. ये चारों जिले देश के कॉफी उत्पादन में बड़ी भूमिका निभाते हैं. वर्ष 2025-26 में देश में उत्पादित 3.73 लाख टन कॉफी में इन चार जिलों की हिस्सेदारी करीब 87 प्रतिशत थी.

कोडागु में 25 फीसदी कम बारिश

'बिजनेस लाइन' के मुताबिक, कर्नाटक का कोडागु देश का सबसे बड़ा कॉफी उत्पादक जिला है. यहां 1 जून से 11 अगस्त के बीच 1260.6 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में करीब 1677.3 मिमी बारिश होती है. यानी जिले में बारिश करीब 25 प्रतिशत कम रही. वहीं, चिकमगलूर की स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर है. यहां सामान्य 1088.2 मिमी के मुकाबले 1071.2 मिमी बारिश हुई है. इस तरह बारिश में करीब 2 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है.

इसके अलावा हासन में स्थिति ज्यादा चिंताजनक है. यहां सामान्य 445.7 मिमी बारिश के मुकाबले केवल 173.7 मिमी बारिश हुई है. यानी बारिश में करीब 61 प्रतिशत की कमी रही. साथ ही केरल के वायनाड में भी मॉनसून कमजोर रहा है. जिले में सामान्य 1904.2 मिमी के मुकाबले अभी तक करीब 955 मिमी बारिश हुई है. यानी यहां बारिश लगभग 50 प्रतिशत कम रही है.

सूखे से बढ़ा व्हाइट स्टेम बोरर का खतरा

कम बारिश का असर सिर्फ मिट्टी की नमी और पौधों की बढ़वार पर ही नहीं पड़ रहा है, बल्कि इससे कॉफी बागानों में कीटों का खतरा भी बढ़ गया है. खासकर व्हाइट स्टेम बोरर (WSB) ने अरेबिका कॉफी उत्पादकों की चिंता बढ़ा दी है. यह एक गंभीर कीट है, जो कॉफी के पौधों के तने में नुकसान पहुंचाता है. इससे पौधे कमजोर हो सकते हैं और गंभीर संक्रमण की स्थिति में पौधे को हटाना तक पड़ सकता है. किसानों का कहना है कि इस साल सूखे के कारण पिछले कुछ वर्षों की तुलना में WSB का प्रकोप ज्यादा देखने को मिल रहा है. कर्नाटक के कॉफी उत्पादक संगठनों से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, अच्छी बारिश होने पर पिछले कुछ वर्षों में इस कीट का असर काफी हद तक नियंत्रित था, लेकिन इस साल कई क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश नहीं होने से स्थिति बदल गई है.

रोबस्टा की फसल फिलहाल बेहतर

UPASI कॉफी कमिटी के सहदेव बालकृष्ण के मुताबिक, जून और जुलाई की शुरुआत में मॉनसून धीमा रहा, लेकिन 15 जुलाई के बाद कई कॉफी उत्पादक क्षेत्रों में बारिश ने रफ्तार पकड़ी. हालांकि बारिश सभी इलाकों में एक जैसी नहीं हुई है. ऐसे में उनका कहना है कि मॉनसून खत्म होने में अभी करीब 2-3 सप्ताह बाकी हैं, इसलिए अभी अंतिम तस्वीर सामने नहीं आई है. उनके मुताबिक फिलहाल रोबस्टा की फसल अच्छी दिखाई दे रही है, लेकिन वास्तविक स्थिति मॉनसून समाप्त होने के बाद ही पता चलेगा. कर्नाटक प्लांटर्स एसोसिएशन के चेयरमैन एम. सलमान बशीर ने भी कहा कि इस साल बारिश का वितरण समान नहीं रहा. उनके मुताबिक रोबस्टा की फसल ठीक है, लेकिन अरेबिका के उत्पादन में गिरावट की आशंका है.

कॉफी बोर्ड ने उत्पादन बढ़ने का अनुमान लगाया

बारिश की चिंता के बावजूद कॉफी बोर्ड ने 2026-27 के लिए 4.04 लाख टन कॉफी उत्पादन का अनुमान लगाया है. इसमें करीब 1.20 लाख टन अरेबिका और 2.84 लाख टन रोबस्टा शामिल है. इसके मुकाबले 2025-26 में कॉफी का अंतिम उत्पादन अनुमान 3.73 लाख टन रहा था. इसमें अरेबिका का उत्पादन करीब 1.11 लाख टन और रोबस्टा का 2.62 लाख टन था.

इस तरह बोर्ड ने अगले फसल वर्ष में कुल उत्पादन बढ़ने का अनुमान लगाया है. हालांकि मौजूदा मौसम की स्थिति और व्हाइट स्टेम बोरर के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए अरेबिका उत्पादन पर जोखिम बना हुआ है. अब किसानों और विशेषज्ञों की नजर अगले कुछ हफ्तों की बारिश पर है. मॉनसून का बाकी समय यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगा कि 2026-27 में देश की कॉफी फसल अनुमान के मुताबिक रहती है या मौसम की मार से उत्पादन प्रभावित होता है. 

MORE NEWS

Read more!