Pusa Rice Hybrid 10 और Pusa Basmati 1637: धान की दो किस्में जो बढ़ा सकती हैं किसानों की कमाई

Pusa Rice Hybrid 10 और Pusa Basmati 1637: धान की दो किस्में जो बढ़ा सकती हैं किसानों की कमाई

आईसीएआर-आईएआरआई द्वारा विकसित पूसा राइस हाइब्रिड 10 और पूसा बासमती 1637 धान की दो उन्नत किस्में हैं. जहां पूसा राइस हाइब्रिड 10 भारत की पहली खुशबूदार और बारीक दाने वाली हाइब्रिड धान किस्म है, वहीं पूसा बासमती 1637 ब्लास्ट रोग प्रतिरोधी बासमती किस्म है. दोनों किस्में किसानों को बेहतर पैदावार, अच्छी क्वालिटी और अधिक मुनाफा दिलाने में मदद कर रही हैं.

Pusa Rice Hybrid 10Pusa Rice Hybrid 10
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Aug 13, 2026,
  • Updated Aug 13, 2026, 7:49 PM IST

धान की खेती में बढ़ती लागत, रोगों का प्रकोप और बेहतर क्वालिटी वाले अनाज की मांग के बीच भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI) में तैयार दो किस्में किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रही हैं. पूसा राइस हाइब्रिड 10 और पूसा बासमती 1637 ऐसी उन्नत किस्में हैं, जो न केवल अच्छी पैदावार देती हैं बल्कि क्वालिटी और बाजार मूल्य के मामले में भी किसानों को बेहतर लाभ दिलाने की क्षमता रखती हैं.

भारत की पहली खुशबूदार हाइब्रिड धान किस्म

पूसा राइस हाइब्रिड 10 को भारत में धान रिसर्च की एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है. इसे साल 2001 में केंद्रीय किस्म विमोचन समिति (CVRC) ने हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड के सिंचित क्षेत्रों में व्यावसायिक खेती के लिए मंजूरी दी थी.

इस किस्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह भारत की पहली खुशबूदार और बहुत ही बारीक दाने वाली हाइब्रिड धान किस्म है. इससे पहले देश में उपलब्ध अधिकांश हाइब्रिड धान किस्में मोटे दानों और बिना सुगंध वाली थीं. वैज्ञानिकों ने हाइब्रिड तकनीक की अधिक उत्पादन क्षमता को बासमती जैसे लंबे, पतले और सुगंधित दानों की क्वालिटी के साथ जोड़कर यह उपलब्धि हासिल की.

7 टन प्रति हेक्टेयर तक पैदावार

पूसा राइस हाइब्रिड 10 औसतन 7 टन प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देने की क्षमता रखती है, जो कई पारंपरिक बासमती किस्मों से काफी अधिक है. यह किस्म केवल 110 से 115 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को कम समय में फसल मिल जाती है.

कम अवधि के कारण सिंचाई की जरूरत घटती है, उत्पादन लागत कम होती है और खेत में अगली फसल लगाने का समय भी जल्दी मिल जाता है. इसकी अधिक उत्पादकता और खुशबूदार बारीक दाने किसानों को बाजार में बेहतर कीमत दिलाने में मदद करते हैं.

ब्लास्ट रोग के खिलाफ मजबूत सुरक्षा

दूसरी ओर, पूसा बासमती 1637 को खास तौर पर ब्लास्ट रोग से बचाव के लिए तैयार किया गया है. यह किस्म मशहूर पूसा बासमती 1 का उन्नत वर्जन है, जिसमें आधुनिक मार्कर-असिस्टेड सिलेक्शन (MAS) तकनीक के जरिए Pi9 जीन शामिल किया गया है.

यह जीन पौधों को लीफ ब्लास्ट रोग के खिलाफ प्रभावी सुरक्षा देता है. धान की खेती में ब्लास्ट रोग को सबसे नुकसानदायक रोगों में गिना जाता है, जो उत्पादन को भारी नुकसान पहुंचा सकता है.

कई ट्रायल में पूसा बासमती 1637 ने ब्लास्ट रोग के प्रति मजबूत प्रतिरोध दिखाया. जहां पूसा बासमती 1 में रोग की संवेदनशीलता अधिक पाई गई, वहीं नई किस्म ने काफी बेहतर काम किया. इससे उन क्षेत्रों के किसानों को विशेष लाभ मिल सकता है जहां ब्लास्ट रोग का खतरा अधिक रहता है.

बासमती क्वालिटी और निर्यात की क्षमता

पूसा बासमती 1637 की औसत पैदावार 4.2 टन प्रति हेक्टेयर है और यह लगभग 130 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. इसके दाने लंबे, पतले और आकर्षक होते हैं. कच्चे चावल की लंबाई करीब 7.3 मिलीमीटर तथा पकने के बाद दाने की लंबाई लगभग 13.8 मिलीमीटर तक पहुंच जाती है.

इस किस्म में पारंपरिक बासमती की तेज और विशिष्ट खुशबू मौजूद है. यही वजह है कि यह प्रीमियम बासमती बाजार और निर्यात की क्वालिटी जरूरतों को पूरा करती है.

किसानों के लिए क्यों खास हैं दोनों किस्में?

विशेषज्ञों के अनुसार पूसा राइस हाइब्रिड 10 और पूसा बासमती 1637 अलग-अलग जरूरतों को पूरा करने वाली किस्में हैं. पूसा राइस हाइब्रिड 10 उन किसानों के लिए बेहतर विकल्प है जो कम समय में अधिक उत्पादन और अधिक लाभ चाहते हैं. पूसा बासमती 1637 उन किसानों के लिए उपयोगी है जो बासमती धान की खेती करते हैं और ब्लास्ट रोग से होने वाले नुकसान से बचना चाहते हैं.

दोनों किस्में बेहतर क्वालिटी, अधिक आय और उन्नत तकनीक का लाभ किसानों तक पहुंचाती हैं. बासमती उत्पादन वाले क्षेत्रों में इन किस्मों से निर्यात क्षमता और किसानों की आमदनी दोनों बढ़ सकती हैं. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि उन्नत बीजों का उपयोग, वैज्ञानिक खेती और रोग प्रतिरोधी किस्मों को अपनाकर किसान उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेती को अधिक लाभकारी बना सकते हैं. पूसा राइस हाइब्रिड 10 और पूसा बासमती 1637 इसी दिशा में महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में उभर रही हैं.

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