जैविक खेती से बदली किसान की तकदीर: सब्जियों से लाखों की कमाई, एप्पल की खेती से बनाई नई पहचान

जैविक खेती से बदली किसान की तकदीर: सब्जियों से लाखों की कमाई, एप्पल की खेती से बनाई नई पहचान

छत्तीसगढ़ के मल्हार के प्रगतिशील किसान जदुनंदन वर्मा ने जैविक सब्जियों और एप्पल की खेती से नई पहचान बनाई है. एक एकड़ में जैविक सब्जियों से सालाना करीब 2 लाख रुपये की आय अर्जित करने वाले जदुनंदन पिछले 10 वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और अब अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं.

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जैविक खेती से बदली किसान की तकदीर: सब्जियों से लाखों की कमाई, एप्पल की खेती से बनाई नई पहचान

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के नगर पंचायत मल्हार के प्रगतिशील किसान जदुनंदन वर्मा ने जैविक खेती और आधुनिक कृषि नवाचारों के जरिए सफलता की नई कहानी लिखी है. उन्होंने रासायनिक खेती से दूरी बनाकर पूरी तरह जैविक खेती को अपनाया और आज एक एकड़ में जैविक सब्जियों की खेती से प्रतिवर्ष लगभग दो लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं. इसके साथ ही आधा एकड़ भूमि में जैविक एप्पल की सफल खेती कर उन्होंने क्षेत्र के किसानों के लिए एक नई मिसाल कायम की है.

दस वर्षों से पूरी तरह कर रहे हैं जैविक खेती

जदुनंदन वर्मा पिछले लगभग दस वर्षों से पूरी तरह जैविक पद्धति से खेती कर रहे हैं. उनका मानना है कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के लगातार उपयोग से मिट्टी की उर्वरता कम होती है, पर्यावरण प्रदूषित होता है और मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. इसी सोच के साथ उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित खेती को अपनाया और आज बेहतर उत्पादन के साथ अच्छी आमदनी भी प्राप्त कर रहे हैं.

जैविक सब्जियों से सालाना दो लाख रुपये की आय

जदुनंदन वर्मा एक एकड़ भूमि में विभिन्न प्रकार की जैविक सब्जियों का उत्पादन करते हैं.जैविक खेती अपनाने से उनकी उत्पादन लागत में कमी आई है, जबकि उपज की गुणवत्ता बेहतर होने से बाजार में अच्छे दाम मिल रहे हैं. इसी का परिणाम है कि वे हर वर्ष लगभग दो लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं.

जैविक एप्पल की खेती बनी क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र

जदुनंदन वर्मा ने करीब साढ़े तीन वर्ष पहले आधा एकड़ भूमि में जैविक एप्पल के पौधे लगाए थे.पिछले दो वर्षों से उनके बगीचे में एप्पल का उत्पादन मिलने लगा है। क्षेत्र में जैविक एप्पल की सफल खेती लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है.

उनके खेत में तैयार होने वाले जैविक एप्पल की मांग लगातार बढ़ रही है. ग्राहक सीधे उनके खेत पर पहुंचकर फल खरीदते हैं, जिससे उन्हें बाजार की तुलना में बेहतर मूल्य मिलता है और उपभोक्ताओं को शुद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण जैविक फल उपलब्ध हो रहे हैं.

गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट और जीवामृत से तैयार होती है फसल

जदुनंदन वर्मा अपनी खेती में गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत तथा अन्य जैविक संसाधनों का उपयोग करते हैं.इससे मिट्टी की उर्वरता लगातार बढ़ रही है, उत्पादन लागत कम हुई है और फसलों की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है. उनकी खेती पूरी तरह प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित है.

कृषि विज्ञान केंद्र के प्रशिक्षण से मिला नया मार्गदर्शन

जदुनंदन वर्मा ने कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा आयोजित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेकर जैविक खाद निर्माण, जैविक कीट एवं रोग प्रबंधन तथा आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त की. इन प्रशिक्षणों से मिली तकनीकी जानकारी को उन्होंने अपनी खेती में सफलतापूर्वक अपनाया, जिसका सकारात्मक परिणाम आज उनकी आय और उत्पादन दोनों में दिखाई दे रहा है.

सरकारी योजनाओं का भी मिल रहा लाभ

जदुनंदन वर्मा को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ भी नियमित रूप से मिल रहा है.इस आर्थिक सहायता से खेती की लागत कम करने और आवश्यक कृषि निवेश करने में उन्हें मदद मिलती है.

जैविक खेती को मानते हैं भविष्य की खेती

जदुनंदन वर्मा का कहना है कि जैविक खेती केवल किसानों की आय बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मिट्टी की उर्वरता, पर्यावरण संरक्षण और लोगों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए भी बेहद आवश्यक है. उनका मानना है कि यदि किसान वैज्ञानिक तकनीकों, जैविक पद्धतियों और सरकारी योजनाओं का समुचित लाभ उठाएं, तो खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है.

अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बने जदुनंदन वर्मा

जदुनंदन वर्मा की सफलता यह साबित करती है कि सीमित संसाधनों में भी नवाचार, वैज्ञानिक सोच और जैविक खेती के माध्यम से बेहतर उत्पादन और अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है. आज वे न केवल अपने क्षेत्र बल्कि पूरे प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं और उनकी सफलता जैविक खेती की बढ़ती संभावनाओं का सशक्त उदाहरण है.

 

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