
हरियाणा के रेवाड़ी जिले में लगातार हुई भारी बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. खेतों में 2 से 3 फीट तक पानी भरने से कटाई के लिए तैयार बाजरे की फसल डूब गई है. कई खेतों में खड़ी फसल सड़ने लगी है. ऐसे में किसानों के सालभर की मेहनत और खेती में लगाई गई लागत बर्बाद होने के बाद किसान बेहद परेशान हैं. हालात इतने खराब हैं कि कुछ किसान अपनी ही खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाकर उसे खेत से हटाने को मजबूर हो रहे हैं.
किसानों के मुताबिक, बारिश के बाद खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से बाजरे की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. फसल कटाई के लिए लगभग तैयार थी, लेकिन पानी भरने के कारण बालियां और पौधे खराब होने लगे. किसानों का कहना है कि अब फसल से किसी तरह की आमदनी की उम्मीद नहीं बची है. ऐसे में खेती पर खर्च की गई रकम निकालना भी मुश्किल हो गया है.
इस आपदा का सबसे ज्यादा असर उन किसानों पर पड़ा है, जिन्होंने जमीन बटाई या ठेके पर लेकर खेती की थी. इन किसानों ने जमीन का किराया देने के साथ बीज, खाद, जुताई और दूसरी कृषि गतिविधियों पर काफी पैसा खर्च किया था. लेकिन अब फसल बर्बाद होने के बाद उनके सामने खर्च की गई रकम और ठेके की राशि चुकाने का संकट खड़ा हो गया है. किसानों का कहना है कि वे पहले से ही कर्ज के दबाव में हैं. पिछली खराब फसलों का मुआवजा भी अभी तक उनके खातों में नहीं पहुंचा है. ऐसे में नई बारिश ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है.
भारी बारिश का असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं है. ग्रामीण इलाकों में जलभराव के कारण सड़क और आवागमन भी प्रभावित हुआ है. किशनगढ़-बालावास अंडरपास में पानी भर जाने से घासेड़ा, राजपुरा और बालावास समेत कई गांवों का संपर्क प्रभावित हो गया है. ग्रामीणों का कहना है कि रास्ता बंद होने से लोगों को काफी परेशानी हो रही है. यहां तक कि किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर शव को अंतिम संस्कार के लिए करीब 20 किलोमीटर का अतिरिक्त रास्ता तय करके ले जाना पड़ रहा है.
ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासन से जल्द से जल्द खेतों और गांवों से पानी निकालने की व्यवस्था करने की मांग की है. किसानों का कहना है कि नुकसान का सही आकलन करने के लिए विशेष गिरदावरी कराई जाए और बर्बाद फसलों का उचित मुआवजा दिया जाए. इसके साथ ही किसानों ने पिछली फसलों के लंबित मुआवजे की राशि भी जल्द खातों में भेजने की मांग की है. ग्रामीणों का आरोप है कि इतनी बड़ी परेशानी के बावजूद अब तक प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने नहीं आए हैं. किसानों का कहना है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली, तो उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो सकती है. (देशराज सिंह की रिपोर्ट)