पंजाब और हरियाणा के किसानों के लिए खुशखबरी, कम पानी वाली धान की ये किस्में बढ़ाएंगी मुनाफा

पंजाब और हरियाणा के किसानों के लिए खुशखबरी, कम पानी वाली धान की ये किस्में बढ़ाएंगी मुनाफा

पंजाब और हरियाणा के किसानों के लिए धान की कम अवधि में तैयार होने वाली उन्नत किस्में बेहतर विकल्प बनकर उभर रही हैं. पीआर 126, पीआर 121, पीआर 129 और एचकेआर 49 जैसी किस्में कम पानी में अच्छी पैदावार देने के लिए जानी जाती हैं. ये किस्में न केवल भूजल संरक्षण में मदद करती हैं, बल्कि किसानों की लागत भी कम करती हैं. जल्दी पकने के कारण किसान समय पर अगली फसल की बुवाई कर सकते हैं. कृषि विशेषज्ञ इन किस्मों को भविष्य की टिकाऊ खेती के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं, जिससे किसानों की आय बढ़ाने और पानी बचाने में मदद मिल सकती है.

पंजाब हरियाणा के किसान करें इन क़िस्मों की खेतीपंजाब हरियाणा के किसान करें इन क़िस्मों की खेती
प्राची वत्स
  • Noida,
  • Jun 16, 2026,
  • Updated Jun 16, 2026, 1:27 PM IST

पंजाब और हरियाणा में धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों से दोनों राज्यों में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है. धान की फसल में काफी पानी की जरूरत होती है, इसलिए वैज्ञानिक और कृषि विशेषज्ञ किसानों को ऐसी धान की किस्में अपनाने की सलाह दे रहे हैं जो कम समय में तैयार हो जाएं और कम पानी की खपत करें. इससे किसानों की लागत भी कम होगी और पानी की बचत भी होगी.

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में कम अवधि वाली धान की किस्में किसानों के लिए सबसे अच्छा विकल्प बन रही हैं. इन किस्मों से अच्छी पैदावार मिलती है और किसान अगली फसल की बुवाई भी समय पर कर सकते हैं.

पीआर 126: कम समय में तैयार होने वाली लोकप्रिय किस्म

पीआर 126 धान की एक उन्नत किस्म है, जिसे पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) ने विकसित किया है. यह किस्म रोपाई के लगभग 123 दिनों बाद तैयार हो जाती है. कम अवधि में पकने के कारण इसमें पानी की जरूरत भी कम पड़ती है. यही वजह है कि यह किस्म पंजाब के किसानों के बीच काफी लोकप्रिय है. फसल जल्दी तैयार होने से किसान समय पर गेहूं जैसी अगली फसल की बुवाई भी कर सकते हैं. इससे खेती का चक्र बेहतर होता है और किसानों को अधिक लाभ मिलता है.

पीआर 121: अच्छी पैदावार देने वाली भरोसेमंद किस्म

पीआर 121 धान की ऐसी किस्म है जो कम समय में तैयार होने के साथ-साथ अच्छी उपज भी देती है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस किस्म से लगभग 27 से 30 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है. यह किस्म किसानों को बेहतर आमदनी देने में मदद करती है. इसके अलावा कम समय में फसल तैयार होने के कारण पानी और अन्य संसाधनों की भी बचत होती है.

पीआर 129: अधिक उत्पादन और बेहतर कमाई का विकल्प

पीआर 129 भी किसानों के लिए एक बेहतरीन धान की किस्म मानी जाती है. यह कम अवधि में तैयार होती है और इसकी पैदावार भी काफी अच्छी होती है. इस किस्म से लगभग 27 से 30 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन मिल सकता है. कई किसान इसे इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि इससे अच्छी गुणवत्ता का धान प्राप्त होता है और खेती की लागत भी कम रहती है. कम समय में फसल तैयार होने से किसान दूसरी फसल की तैयारी भी जल्दी कर सकते हैं.

एचकेआर 49: हरियाणा के किसानों की पसंद

एचकेआर 49 किस्म को हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) ने विकसित किया है. यह धान की जल्दी पकने वाली किस्मों में शामिल है. रोपाई के लगभग 90 से 95 दिनों बाद यह फसल तैयार हो जाती है. इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कम समय में तैयार होने के बावजूद इसकी पैदावार काफी अच्छी होती है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इससे लगभग 32 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन मिल सकता है. कम पानी की जरूरत और अच्छी उपज के कारण यह किस्म हरियाणा के किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है.

पानी बचाने में मददगार हैं ये किस्में

पंजाब और हरियाणा में पानी की कमी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है. कई इलाकों में पानी का स्तर लगातार नीचे जा रहा है. ऐसे में कम अवधि वाली धान की किस्में किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए लाभदायक साबित हो रही हैं.

जब फसल जल्दी तैयार होती है तो खेत में कम दिनों तक सिंचाई करनी पड़ती है. इससे हजारों लीटर पानी की बचत होती है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अधिक किसान इन किस्मों को अपनाते हैं तो भविष्य में पानी की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

किसानों की आय बढ़ाने का अच्छा मौका

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि कम समय में तैयार होने वाली धान की किस्में किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं. इन किस्मों से अच्छी पैदावार मिलती है, सिंचाई पर खर्च कम आता है और किसान अगली फसल भी समय पर लगा सकते हैं.

इसी कारण कृषि विभाग और कृषि विश्वविद्यालय किसानों को पीआर 126, पीआर 121, पीआर 129 और एचकेआर 49 जैसी उन्नत किस्मों की खेती करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. आने वाले समय में ये किस्में पंजाब और हरियाणा के किसानों के लिए खेती को अधिक लाभदायक और टिकाऊ बनाने में मदद कर सकती हैं.

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