El Nino का बड़ा खतरा! भारत में कमजोर पड़ सकता है मॉनसून, धान-मक्का की फसल पर संकट

El Nino का बड़ा खतरा! भारत में कमजोर पड़ सकता है मॉनसून, धान-मक्का की फसल पर संकट

FAO ने चेतावनी दी है कि El Nino के प्रभाव से भारत का मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे धान और मक्का जैसी खरीफ फसलों पर असर पड़ने की आशंका हैमॉनसून कम बारिश से किसानों की आय, कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा प्रभावित हो सकती हैमॉनसून विशेषज्ञों ने समय रहते तैयारी और मौसम की निगरानी पर जोर दिया है.

फसलों पर मॉनसून का खतराफसलों पर मॉनसून का खतरा
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jun 16, 2026,
  • Updated Jun 16, 2026, 9:18 AM IST

संयुक्त राष्ट्र की संस्था खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने चेतावनी दी है कि El Nino की वापसी भारत के मॉनसून और कृषि क्षेत्र के लिए चुनौती बन सकती है. FAO के अनुसार El Nino के कारण भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे खरीफ सीजन की प्रमुख फसलें जैसे धान (चावल) और मक्का प्रभावित हो सकती हैं. इन फसलों की खेती काफी हद तक बारिश पर निर्भर करती है, इसलिए कम वर्षा होने पर उत्पादन में गिरावट आने का खतरा बढ़ जाता है.

क्या होता है El Nino?

El Nino एक प्राकृतिक मौसमीय घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है. इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है. भारत में El Nino अक्सर मॉनसून को कमजोर करने के लिए जाना जाता है. जब मॉनसून कमजोर पड़ता है तो कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश होती है, जिससे खेती प्रभावित होती है.

धान और मक्का की फसल पर सबसे ज्यादा असर

FAO ने कहा है कि भारत में धान और मक्का जैसी वर्षा आधारित फसलें सबसे अधिक प्रभावित हो सकती हैं. खरीफ सीजन में किसान मॉनसून की बारिश पर निर्भर रहते हैं. यदि बारिश कम होती है तो फसलों की बुवाई, बढ़वार और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है. इससे किसानों की आय भी प्रभावित हो सकती है.

संस्था ने याद दिलाया कि 2015-16 के El Nino के दौरान भारत में मक्का उत्पादन में लगभग 4 प्रतिशत और चावल उत्पादन में करीब 1 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी. यह दर्शाता है कि मौसम में थोड़े बदलाव का भी कृषि उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है.

केवल भारत ही नहीं, कई देशों पर खतरा

FAO के अनुसार दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देश इस खतरे की चपेट में आ सकते हैं. इनमें भारत, पाकिस्तान, म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम, फिलीपींस और इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हैं. इन क्षेत्रों में कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था काफी हद तक बारिश पर निर्भर है.

पिछले बड़े El Nino के दौरान दक्षिण-पूर्व एशिया में करीब 1.5 करोड़ टन चावल का नुकसान हुआ था. इसके कारण खाद्यान्न की कीमतें बढ़ गई थीं और आयात पर निर्भर देशों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था.

किसानों और खाद्य सुरक्षा पर बढ़ेगी चिंता

FAO के विशेषज्ञों का कहना है कि जब बारिश कम होती है तो सबसे पहले खेती प्रभावित होती है. फसल खराब होने पर किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. कई बार पशुधन पर भी असर पड़ता है, जिससे उनकी आजीविका संकट में पड़ सकती है. ऐसे हालात खाद्य सुरक्षा के लिए भी चुनौती बन जाते हैं, क्योंकि उत्पादन घटने से बाजार में अनाज की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है.

पहले से ज्यादा गंभीर हो सकता है यह El Nino

FAO का मानना है कि इस बार का El Nino पहले की तुलना में ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है. इसकी वजह यह है कि दुनिया का तापमान लगातार बढ़ रहा है और कई देशों में पहले से ही खाद्य संकट और आर्थिक चुनौतियां मौजूद हैं. ऐसे में कमजोर समुदायों पर इसका असर अधिक पड़ सकता है.

समय रहते तैयारी करना जरूरी

FAO ने कहा है कि यदि सरकारें और किसान समय रहते तैयारी करें तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है. मौसम की सही जानकारी, सूखा सहन करने वाली फसलें, जल संरक्षण और समय पर चेतावनी प्रणाली किसानों की मदद कर सकती है. संस्था का कहना है कि समय पर दी गई चेतावनी तभी प्रभावी होती है जब उस पर तुरंत कार्रवाई की जाए.

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में मॉनसून की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि इसका सीधा संबंध किसानों की आय, खाद्य उत्पादन और देश की कृषि अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ है.

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