
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया 31 जनवरी को समाप्त हो चुकी है, लेकिन धान का पूरा उठाव अब तक नहीं हो पाया है. इसके कारण जून महीने तक भी हजारों मीट्रिक टन धान खरीदी केंद्रों में पड़ा हुआ है, जिससे धान के खराब होने (सुखत) की समस्या बनी हुई है. इसी बीच धान सुखत के नाम पर फर्जीवाड़े और वित्तीय घोटाले के मामले भी सामने आ रहे हैं. दरअसल, छुरिया ब्लॉक के कूहीमाल और डोंगरगढ़ ब्लॉक के मोहारा के बाद अब बागरेकसा धान उपार्जन केंद्र में भी बड़ा घोटाला उजागर आया है. जांच में यहां करीब 52.57 लाख रुपये मूल्य के 1,696 क्विंटल धान के गबन का मामला सामने आया है. अधिकारियों के अनुसार, रिकॉर्ड में धान मौजूद दिखाया गया था, लेकिन मौके पर धान नहीं मिला.
जिला खाद्य अधिकारी रविंद्र सोनी ने बताया कि जिले के 80 धान उपार्जन केंद्रों पर अब भी करीब 59 हजार मीट्रिक टन धान का उठाव बाकी है. जांच के दौरान यह भी पाया गया कि कुछ समितियों में धान का स्टॉक रिकॉर्ड में तो दर्ज था, लेकिन वास्तविक रूप से वहां धान मौजूद नहीं था. वहीं, एक अन्य मामले में रिकॉर्ड में धान का पूरा उठाव दिखाया गया था, जबकि हकीकत में समिति स्तर पर धान को बिचौलियों को बेचा जा रहा था. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रशासन अब पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी में जुटा है.
जिले में मॉनसून की दस्तक के साथ ही खरीदी केंद्रों में खुले में रखे धान को बचाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं. हालांकि प्रशासन का दावा है कि धान को बारिश और अन्य नुकसान से बचाने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं. इसके बावजूद बड़ी मात्रा में धान का उठाव लंबित होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है.
जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जिले में 15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू की गई थी. इस दौरान राजनांदगांव जिले के करीब 1.24 लाख रजिस्टर्ड किसानों से 6.25 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया. खरीदी पूरी होने के बाद धान को मिलरों और गोदामों तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन अब तक पूरा उठाव नहीं हो सका है.
खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बचे हुए धान को सुरक्षित रखा गया है और उसके उठाव की प्रक्रिया लगातार जारी है. विभाग का दावा है कि बचा हुआ धान भी जल्द ही मिलरों और भंडारण केंद्रों तक पहुंचा दिया जाएगा. वहीं, बारिश के मौसम को देखते हुए प्रशासन धान को नुकसान से बचाने के लिए विशेष निगरानी भी कर रहा है. (परमानंद रजक की रिपोर्ट)