Animal Vaccination: पशुओं का वैक्सीनेशन कराने से पहले जरूर पढ़ें एक्सपर्ट के ये टिप्स 

Animal Vaccination: पशुओं का वैक्सीनेशन कराने से पहले जरूर पढ़ें एक्सपर्ट के ये टिप्स 

Animal Vaccination अंडे और डेयरी प्रोडक्ट की डिमांड एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) की वजह से ही नहीं बढ़ पा रही है. हालांकि साइंटिस्ट के मुताबिक एएमआर की परेशानी को वैक्सीनेशन चार्ट का पूरी तरह से पालन कर दूर किया जा सकता है. अगर ये कंट्रोल हो जाए तो एक्सपोर्ट का आंकड़ा भी और बड़ा हो सकता है.  

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Animal Vaccination: पशुओं का वैक्सीनेशन कराने से पहले जरूर पढ़ें एक्सपर्ट के ये टिप्स गर्भवती पशुओं का टीकाकरण

पशु अगर किसी भी तरह की शारीरिक और मानसिक परेशानी के चलते तनाव में है तो उसका उत्पादन घटना तय है. ये परेशानी संक्रमण और बीमारी किसी भी तरह की हो सकती है. हालांकि एनिमल प्रोडक्ट उत्पादन की बात करें तो हमारा देश दूध, मीट और अंडा उत्पादन में पहले से लेकर चौथे स्थान पर है. लेकिन एनिमल प्रोडक्ट का एक्सपोर्ट ना के बराबर होता है. और इसकी बड़ी वजह है बीमारियां. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो पशुओं की बहुत सारी बीमारियों का एक मात्र इलाज उन्हें कंट्रोल करना ही है. इसी के लिए पशुओं का समय-समय पर वैक्सीनेशन कराया जाता है. लेकिन वैक्सीनेशन कराने में बहुत सावधानी बरतने की जरूरत होती है. 

अगर आप भी अपने पशुओं का वैक्सीनेशन कराने जा रहे हैं तो एक्सपर्ट के बताए टिप्स का पालन जरूर करें. वैक्सीनेशन का एक बड़ा ये भी है कि ये पशुओं में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) को नहीं पनपने देता है. एएमआर की परेशानी पशुओं को बीमारी में एंटी बायोटिक्स खि‍लाने से सामने आती है. और विदेशों में एएमआर फ्री एनिमल प्रोडक्ट की डिमांड की जाती है. जबकि डेयरी, पोल्ट्री और फिशरीज में ये एक बड़ी परेशानी बन चुकी है.  

ये हैं वैक्सीनेशन कराने के फायदे

  • वैक्सीनेशन होने के बाद पशु बीमारियों के अटैक से बचे रहते हैं.  
  • वैक्सीनेशन होने के बाद महामारियों का जल्द असर नहीं होता है. 
  • पशुओं से मनुष्यों में होने वाली संक्रामक बीमारियों से बचाव होता है.
  • बीमारियो के इलाज से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाव होता है.
  • एनिमल प्रोडक्ट से इंसानों में होने वाली बीमारी से बचाव होता है.
  • किसानों की पशुपालन में कम लागत से मुनाफा बढ़ जाता है.

वैक्सीनेशन के लिए हैं ये खास टिप्स 

  • प्रथम टीकाकरण केवल स्वस्थ पशुओं में ही करना चाहिए.
  • टीकाकरण से कम से कम दो सप्ताह पहले कृमिनाशक दवाई देनी चाहिये.
  • टीकाकरण के समय पशुओं का हेल्दी होना जरूरी है. 
  • बीमार और कमजोर पशुओं का टीकाकरण नहीं करना चाहिए. 
  • बीमारी फैलने से करीब 20-30 दिन पहले टीकाकरण करा लेना चाहिए. 
  • रोग फैलने के संभावित समय से करीब 20-30 दिन पहले करना चाहिए.
  • मानकों के अनुसार कोल्ड बॉक्स में रखे टीके ही पशुओं को लगाने चाहिए. 
  • जहां पशु ज्यादा हों वहां झुण्ड में पशुओं का टीकाकरण करना जरूरी होता है.
  • गर्भावस्था के दौरान टीकाकरण नहीं करना चाहिए.
  • टीकाकरण का रिकार्ड रखने के लिये हमेशा पशु स्वास्थ्य कार्ड बनाएं.
  • टीकाकरण के दौरान हर पशु के लिये अलग-अलग सूईयों का इस्तेमाल करें. 
  • टीके में इस्तेमाल की गई सूई और सिरिज को नियमानुसार डिस्पोज करें.

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