तेजी से बढ़ा सोयाबीन आयात: मई में 65% उछाल, घरेलू कीमतें चार साल के उच्च स्तर पर

तेजी से बढ़ा सोयाबीन आयात: मई में 65% उछाल, घरेलू कीमतें चार साल के उच्च स्तर पर

भारत में सोयाबीन की बढ़ती कीमतों के चलते मई 2026 में इसका आयात 65% बढ़कर 2 लाख टन तक पहुंच गया. घरेलू आपूर्ति की कमी और ऊंची कीमतों के कारण व्यापारियों ने अफ्रीकी देशों से बड़ी मात्रा में खरीदारी की है. इससे पोल्ट्री उद्योग को राहत मिलने की उम्मीद है, जबकि SOPA ने पूरे साल के आयात अनुमान को बढ़ाकर 9 लाख टन कर दिया है.

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तेजी से बढ़ा सोयाबीन आयात: मई में 65% उछाल, घरेलू कीमतें चार साल के उच्च स्तर परदेश में सोयाबीन का आयात बढ़ा

देश में सोयाबीन की ऊंची कीमतों के बीच मई महीने में इसके आयात में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है. उद्योग से जुड़े संगठन के मुताबिक, मई 2026 में भारत का सोयाबीन आयात 65 फीसदी बढ़कर 2 लाख टन तक पहुंच गया, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर है. इससे पहले अप्रैल में यह आंकड़ा 1.21 लाख टन था, जबकि पिछले साल इस अवधि में आयात लगभग न के बराबर था.

विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू बाजार में सोयाबीन की कीमतें चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के कारण व्यापारियों ने अफ्रीकी देशों से बड़े पैमाने पर खरीदारी शुरू कर दी है. इससे अफ्रीकी निर्यातकों को वैश्विक कीमतों के मुकाबले प्रीमियम कीमत पर सोयाबीन बेचने का मौका मिला है.

आयात का अनुमान बढ़कर 9 लाख टन

सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) ने बढ़ती मांग को देखते हुए 2025-26 मार्केटिंग साल के लिए आयात का अनुमान बढ़ाकर 9 लाख टन कर दिया है, जो पहले 6 लाख टन था. भारत केवल गैर-जेनेटिकली मॉडिफाइड (Non-GM) सोयाबीन के आयात की अनुमति देता है, जिसकी वजह से बेनिन, नाइजर, टोगो और नाइजीरिया जैसे चुनिंदा अफ्रीकी देशों से ही सप्लाई संभव हो पाती है.

उद्योग के जानकारों का कहना है कि घरेलू बाजार में कीमतों में तेजी का असर सोयामील पर भी पड़ा है, जो पशुपालन और विशेष रूप से पोल्ट्री सेक्टर के लिए एक अहम चारा है. कीमतों में करीब 200 डॉलर प्रति टन की वृद्धि के कारण निर्यातकों के लिए अपने कॉन्ट्रेक्ट को पूरा करना मुश्किल हो गया. ऐसे में मई और जून के लिए कई निर्यात सौदों को आपसी सहमति से रद्द करना पड़ा, जिन्हें ‘वॉशआउट’ कहा जाता है. खास बात यह है कि सोयामील व्यापार में इस तरह की घटनाएं बेहद कम देखने को मिलती हैं.

अफ्रीकी देशों से सबसे अधिक आयात

वर्तमान में अफ्रीकी देशों से सोयाबीन की कीमत 700 से 760 डॉलर प्रति टन (CIF आधार) के बीच बनी हुई है. व्यापारियों ने इस महीने कम से कम 80 हजार टन सोयाबीन की खरीदारी कर ली है और घरेलू कीमतों में मजबूती के चलते आयात का सिलसिला जारी रहने की संभावना है. महाराष्ट्र के लातूर स्थित प्रोसेसरों के अनुसार, नई फसल के सितंबर-अक्टूबर में बाजार में आने तक देश में सोयाबीन की उपलब्धता सीमित रहने की आशंका है. यही वजह है कि आयात के जरिए आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश की जा रही है.

विशेषज्ञ मानते हैं कि बढ़ते आयात से घरेलू बाजार में कीमतों पर कुछ नियंत्रण संभव हो सकेगा और इससे पोल्ट्री उद्योग सहित अन्य उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है.

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