Mango production: बैगिंग बावजूद भी खराब हुआ चौसा आम, जानिए एक्सपर्ट ने क्या बताई वजह

Mango production: बैगिंग बावजूद भी खराब हुआ चौसा आम, जानिए एक्सपर्ट ने क्या बताई वजह

पश्चिमी यूपी के सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और मेरठ में इस साल चौसा आम के बागवानों को बड़ा झटका लगा. फसल को बचाने के लिए मेहनत से बैगिंग करने के बावजूद बड़ी तादाद में आम खराब हो गए और उन पर काले दाग पड़ गए. किसान तब और ज्यादा हैरान रह गए जब उन्होंने देखा कि बिना लिफाफे वाले आम, बैगिंग किए गए आमों के मुकाबले काफी महफूज निकले. इससे उनके सामने एक बड़ी उलझन खड़ी हो गई.

बैगिंग के बाद भी  दागी हुआ चौसा आमबैगिंग के बाद भी दागी हुआ चौसा आम
जेपी स‍िंह
  • नई दिल्ली,
  • Aug 02, 2026,
  • Updated Aug 02, 2026, 11:29 AM IST

इस साल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मशहूर आम उत्पादक इलाकों, जैसे कि सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और मेरठ में, किसानों को एक अजीब समस्या का सामना करना पड़ा. इन क्षेत्रों में चौसा उगाने वाले किसान हैरान रह गए, जब उन्होंने देखा कि जिन आमों पर उन्होंने बड़ी मेहनत से बैगिंग यानि फलों को बचाने के लिए लिफाफा चढ़ाई थी, वे भी भारी संख्या में खराब हो गए. उन पर काले दाग पड़ गए। हैरानी की बात रही कि कई बागों में बिना लिफाफे वाले आम तुलना में काफी हद तक सुरक्षित निकले. इस उल्टे नतीजे को देखकर ज्यादातर किसानों ने तुरंत यही सोचा कि शायद खरीदे गए लिफाफों की क्वालिटी खराब थी. कुछ ने मान लिया कि मजदूरों ने लिफाफे बांधने में लापरवाही बरती है.लेकिन जब कारणों की गहराई से जांच की गई, तो कहानी अलग निकली. वास्तव में, यह परेशानी किसी खराब कागज या इंसान की लापरवाही से नहीं, बल्कि मौसम की मार और सतह पर पनपे एक खास इन्फेक्शन के कारण पैदा हुई थी.

लिफाफे की गलती या कुछ और ?

आईसीएआर-सीआईएसएच लखनऊ के डॉ. एच. एस. सिंह मुताबिक इस साल के मौसम के मिजाज और बागों में हुए अचानक बदलावों पर गौर करें, तो साफ समझ में आता है कि आमों के दागी होने की असली वजह लगातार हुई बारिश थी. दरअसल, इस इलाके में करीब 48 घंटे तक बिना रुके जो बारिश हुई, उसने चौसा आम के छिलके पर एक खास तरह की फफूंदी और बीमारी को पनपने का पूरा मौका दे दिया. नमी और उमस भरे माहौल में इन्फेक्शन बहुत तेजी से फैला. जिन जागरूक किसानों ने मौसम का अंदाजा लगाकर बारिश से ठीक पहले या रुकने के तुरंत बाद अपने बागों में फफूंदीनाशक दवाओं का छिड़काव कर दिया था, उनके बागों में इस बीमारी का असर या तो बिल्कुल नहीं दिखा या बहुत कम हुआ. इससे साफ हो गया कि सही समय पर दवा का छिड़काव इस बीमारी को आसानी से रोक सकता था.

क्यों दागी हुआ चौसा आम ? 

अब सबसे बड़ा सवाल उठता है कि आखिर बैगिंग वाले आम ज्यादा खराब क्यों हुए? इसका जवाब डॉ. एच. एस. सिंह ने बताया कि बहुत सीधा और तार्किक है. जिन फलों पर पहले से ही लिफाफे चढ़ाए जा चुके थे, उनके ऊपर जब किसानों ने ट्रैक्टर से दवा का छिड़काव किया, तो दवा सिर्फ लिफाफे के ऊपर ही गिरकर रह गई. कवर की वजह से दवा की एक भी बूंद अंदर बैठे फल तक नहीं पहुंच पाई. नतीजा यह हुआ कि बारिश के कारण जो इन्फेक्शन लिफाफे के अंदर शुरू हो चुका था, उसे रोकने वाला वहां कोई नहीं था. लिफाफे के अंदर की गर्मी और नमी ने बीमारी को और बढ़ा दिया, जिससे फल पूरी तरह दागी हो गए। दूसरी तरफ, जिन खुले फलों पर दवा पड़ी, वे पूरी तरह बच गए। यह भी सच है कि बिना दवा वाले खुले फलों की हालत भी बैगिंग वाले फलों जैसी ही खराब पाई गई.

चौसा के लिए क्या होगी अब नई रणनीति

डॉ. एच. एस. सिंह ने कहा हमारे आम उत्पादकों और कृषि विशेषज्ञों के सामने एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा करता है. हम अच्छी तरह जानते हैं कि चौसा आम काफी देर से पकता है और इसकी तुड़ाई अक्सर मानसून बारिश के बीच ही होती है. ऐसे में, सिर्फ बैगिंग के भरोसे हम फसल को बीमारियों से सुरक्षित नहीं रख सकते. अगर बारिश के दौरान इन्फेक्शन का खतरा हो और बैगिंग की वजह से दवाएं सीधे फल तक न पहुंच पाएं, तो किसानों का सारा पैसा बर्बाद हो सकता है. इसलिए, वर्तमान परिस्थितियों में सिर्फ लिफाफों की क्वालिटी या मजदूरों को दोष देना बिल्कुल गलत होगा. इस समस्या का असली कारण लगातार बारिश और फल तक दवा का न पहुंच पाना है. अब वक्त आ गया है कि कृषि वैज्ञानिक इस गंभीर विषय पर गहराई से शोध करें, ताकि भविष्य में चौसा आम के लिए बैगिंग और बचाव का सटीक तरीका निकाला जा सके.

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