
देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच महाराष्ट्र सरकार ने गन्ना किसानों और चीनी उद्योग से जुड़े बड़े फैसले का ऐलान किया है. राज्य सरकार ने 2026-27 के गन्ना पेराई सीजन की शुरुआत 15 अक्टूबर 2026 से करने की मंजूरी दे दी है. सरकार का कहना है कि इससे गणेश उत्सव, दशहरा, दिवाली और क्रिसमस जैसे प्रमुख त्योहारों के दौरान चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहेगी और बाजार में कीमतों को नियंत्रित किया जा सकेगा.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में मुंबई में हुई मंत्रियों की समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया. बैठक में गन्ने की उपलब्धता, चीनी उत्पादन, किसानों को मिलने वाला एफआरपी, इथेनॉल उत्पादन और चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई. सरकार ने दावा किया कि किसानों और चीनी उद्योग दोनों के हितों को ध्यान में रखकर यह निर्णय लिया गया है.
हालांकि सरकार के फैसले के खिलाफ किसान संगठनों और चीनी मिलों ने आवाज उठानी शुरू कर दी है. स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के अध्यक्ष राजू शेट्टी ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में गन्ने की फसल अभी पूरी तरह पकी नहीं है.
राजू शेट्टी के मुताबिक, पिछले साल नवंबर में पर्याप्त बारिश नहीं हुई थी, जिससे गन्ने की बढ़वार प्रभावित हुई. इस साल भी कई इलाकों में बारिश जारी है और गन्ने में अभी चीनी बनने की प्रक्रिया चल रही है. ऐसे में समय से पहले कटाई करने पर गन्ने में मौजूद चीनी की मात्रा कम रह जाएगी और चीनी रिकवरी घट जाएगी.
उन्होंने दावा किया कि जल्दी पेराई शुरू होने से रिकवरी में करीब डेढ़ प्रतिशत तक की कमी आ सकती है. इसका सीधा असर किसानों और चीनी मिलों की आय पर पड़ेगा.
राजू शेट्टी का कहना है कि अभी गन्ने के पत्तों में मौजूद चीनी पूरी तरह तने में नहीं पहुंची है. यदि इस समय कटाई शुरू होती है तो गन्ने से कम चीनी निकलेगी.
उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में एक टन गन्ने से केवल 80 से 90 किलो चीनी निकल पाएगी, जबकि पूरी तरह परिपक्व फसल से 120 किलो प्रति टन तक चीनी मिल सकती है. ऐसे में किसानों को प्रति क्विंटल लगभग 50 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है.
शेट्टी ने चेतावनी दी कि जल्दी कटाई का असर केवल इस साल की आय पर नहीं पड़ेगा, बल्कि अगले सीजन की फसल पर भी पड़ सकता है.
किसान नेता का दावा है कि यदि निर्धारित समय से पहले पेराई शुरू होती है तो महाराष्ट्र की चीनी मिलों को करीब 20 लाख टन चीनी उत्पादन का नुकसान हो सकता है. इसका असर इथेनॉल उत्पादन और गुड़ उद्योग पर भी दिखाई दे सकता है.
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और कर्नाटक देश के कुल चीनी उत्पादन में सबसे बड़ा योगदान देते हैं. पिछले सीजन में महाराष्ट्र में करीब 99 लाख टन और कर्नाटक में लगभग 58 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था. ऐसे में इन राज्यों में समय से पहले कटाई शुरू होने का असर पूरे देश के चीनी उद्योग पर पड़ सकता है.
राजू शेट्टी ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में फिलहाल चीनी की कोई कमी नहीं है. उनके अनुसार पिछले सीजन में देश में लगभग 338 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था. इसमें से 8 लाख टन चीनी का निर्यात किया गया और 245 लाख टन चीनी घरेलू बाजार में जारी की गई. इसके बावजूद करीब 85 लाख टन चीनी का स्टॉक अभी भी उपलब्ध है.
उनका कहना है कि जब देश में पर्याप्त चीनी मौजूद है तो किसानों को नुकसान पहुंचाने वाला फैसला लेने की जरूरत नहीं थी.
किसानों का कहना है कि यदि सरकार जल्दी पेराई का फैसला वापस नहीं लेती है तो उसे रिकवरी में होने वाले नुकसान की भरपाई करनी चाहिए. राजू शेट्टी ने मांग की है कि सरकार एफआरपी में बढ़ोतरी करे या किसानों को नुकसान के बदले अतिरिक्त मुआवजा दे.
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसान संगठनों ने फैसला लिया है कि जब तक रिकवरी नुकसान की भरपाई के लिए उचित व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक गन्ने की कटाई शुरू नहीं होने दी जाएगी. इसके लिए किसान धरना-प्रदर्शन भी करेंगे.
किसान संगठनों का मानना है कि त्योहारों के दौरान चीनी की आपूर्ति सुनिश्चित करना जरूरी है, लेकिन इसकी कीमत किसानों और चीनी मिलों को नुकसान पहुंचाकर नहीं चुकाई जानी चाहिए. ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और किसान संगठनों के बीच टकराव बढ़ने की संभावना है.