Kharif Sowing: राजस्‍थान में धान और दलहन बुवाई में बढ़त, बाजरा-मक्का और कपास को बड़ा झटका

Kharif Sowing: राजस्‍थान में धान और दलहन बुवाई में बढ़त, बाजरा-मक्का और कपास को बड़ा झटका

राजस्थान में खरीफ 2026 की बुवाई ने रफ्तार पकड़ ली है. 29 जून तक 48.05 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है, जो लक्ष्य का 29 प्रतिशत है. धान, मूंग, मूंगफली और ग्वार का रकबा बढ़ा है, जबकि बाजरा, मक्का, सोयाबीन और कपास की बुवाई अभी पिछले साल से पीछे चल रही है.

Kharif Season Sowing Kharif Season Sowing
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jun 30, 2026,
  • Updated Jun 30, 2026, 8:49 PM IST

राजस्थान में पहले प्री मॉनसून की सक्रियता और अब मॉनसून की एंट्री नजदीक होने के साथ ही खरीफ फसलों की बुवाई तेजी पकड़ने लगी है. कृषि विभाग के 29 जून 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल 48.05 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है. यह राज्य के 165.39 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य का करीब 29 प्रतिशत है. हालांकि, कई प्रमुख फसलों की बुवाई अभी पिछले साल की तुलना में पीछे चल रही है, लेकिन धान, दलहन, मूंगफली और ग्वार जैसी फसलों में अच्छी बढ़त देखने को मिल रही है. अनाज वाली फसलों की बुवाई की बात करें तो फिलहान तस्वीर मिली-जुली है. धान की बुवाई में हल्की बढ़त दर्ज हुई है. पिछले साल 27 जून तक जहां 35.41 हजार हेक्टेयर में धान बोया गया था.

वहीं, इस साल 29 जून तक यह बढ़कर 36.67 हजार हेक्टेयर पहुंच गया है. इसके उलट बाजरा, जो राजस्थान की सबसे बड़ी खरीफ फसल मानी जाती है, उसकी बुवाई पिछले साल के 18.74 लाख हेक्टेयर से घटकर 13.42 लाख हेक्टेयर रह गई है. इसी तरह मक्का की बुवाई में भी बड़ी गिरावट दिखाई दे रही है. पिछले साल इसी अवधि तक 3.14 लाख हेक्टेयर में मक्का बोया गया था, जबकि इस बार यह केवल 1.12 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा है. ज्वार का रकबा भी 2.30 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.92 लाख हेक्टेयर रह गया है.

राजस्‍थान में दलहन बुवाई का ऐसा है हाल

वहीं, दलहन फसलों की बात करें तो यहां किसानों का रुझान बढ़ता दिखाई दे रहा है. सबसे ज्‍यादा बढ़ोतरी मूंग में दर्ज हुई है. पिछले साल 7.34 लाख हेक्टेयर में बोई गई मूंग इस बार बढ़कर 8.31 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है. यानी करीब 97 हजार हेक्टेयर अधिक क्षेत्र में मूंग की खेती हुई है. मोठ की बुवाई भी 1.12 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 1.79 लाख हेक्टेयर हो गई है. चवला का रकबा भी बढ़कर 32.87 हजार हेक्टेयर हो गया है.

वहीं, उड़द का रकबा घटकर 19.86 हजार हेक्टेयर रह गया है, जो पिछले साल 25.38 हजार हेक्टेयर था. अरहर की खेती में सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली है. इसका रकबा 1,366 हेक्टेयर से घटकर केवल 117 हेक्टेयर रह गया है. इस तरह, दलहन फसलों का रकबा पिछले साल के 9.01 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 10.63 लाख हेक्टेयर हो गया है.

तिलहन में मूंगफली ने पकड़ी रफ्तार

इधर, तिलहन फसलों में मूंगफली की खेती में किसानों ने सबसे ज्यादा रुचि दिखाई है. इसका रकबा पिछले साल के 5.77 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 7.13 लाख हेक्टेयर हो गया है यानी करीब 1.36 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है. दूसरी ओर सोयाबीन की बुवाई में भारी गिरावट आई है.

पिछले साल 2.61 लाख हेक्टेयर में बोई गई सोयाबीन इस बार केवल 63 हजार हेक्टेयर तक सीमित है. तिल का रकबा भी 28.72 हजार हेक्टेयर से घटकर 12.30 हजार हेक्टेयर रह गया है. वहीं, अरंडी की बुवाई भी घटकर 750 हेक्टेयर रह गई है. इसके बावजूद कुल तिलहन क्षेत्र 7.89 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है.

कपास की खेती भी पिछड़ी

राजस्‍थान कृषि विभाग के अनुसार, कपास की खेती भी फिलहाल पिछड़ती नजर आ रही है. पिछले साल 27 जून तक 5.80 लाख हेक्टेयर में कपास बोई गई थी, जबकि इस साल यह घटकर 4.87 लाख हेक्टेयर रह गई है. इसके उलट ग्वार की बुवाई में जबरदस्त उछाल आया है. पिछले साल 2.59 लाख हेक्टेयर में बोया गया ग्वार इस बार बढ़कर 6.41 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है. गन्ने का रकबा भी मामूली बढ़कर 3.90 हजार हेक्टेयर हो गया है.

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