
भारत में जुलाई 2026 के दौरान चाय उत्पादन में करीब 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. देश में इस महीने कुल 164 मिलियन किलोग्राम चाय का उत्पादन हुआ, जबकि पिछले साल जुलाई में यह आंकड़ा करीब 182 मिलियन किलोग्राम था. चाय उत्पादन में आई इस कमी की सबसे बड़ी वजह असम और पश्चिम बंगाल में हुई भारी बारिश और बाढ़ को माना जा रहा है. ये दोनों राज्य देश के सबसे बड़े चाय उत्पादक राज्यों में शामिल हैं. हालांकि, दक्षिण भारत में चाय उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है.
असम देश का सबसे बड़ा चाय उत्पादक राज्य है. यहां जुलाई 2026 में चाय का उत्पादन 13 फीसदी घटकर 91.08 मिलियन किलोग्राम रह गया. पिछले साल जुलाई में असम में 105 मिलियन किलोग्राम चाय का उत्पादन हुआ था. जुलाई के दौरान असम के कई हिस्सों में भारी बारिश हुई और कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी. इसका सीधा असर चाय बागानों और पत्तियों की तुड़ाई पर पड़ा. असम वैली में भी चाय उत्पादन में बड़ी गिरावट देखने को मिली. यहां जुलाई 2026 में 86.96 मिलियन किलोग्राम चाय का उत्पादन हुआ, जबकि जुलाई 2025 में यह 99.66 मिलियन किलोग्राम था. यानी इस क्षेत्र में उत्पादन करीब 12.7 फीसदी कम हुआ. वहीं, कछार क्षेत्र में स्थिति और खराब रही. यहां उत्पादन करीब 23 फीसदी घटकर 4.12 मिलियन किलोग्राम रह गया, जो पिछले साल इसी महीने 5.34 मिलियन किलोग्राम था.
असम के पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में भी जुलाई के दौरान चाय उत्पादन पर मौसम की मार पड़ी. राज्य में चाय उत्पादन 14 फीसदी घटकर 43.87 मिलियन किलोग्राम रह गया. पिछले साल जुलाई में पश्चिम बंगाल में 50.96 मिलियन किलोग्राम चाय का उत्पादन हुआ था. राज्य के प्रमुख चाय उत्पादक इलाकों में भी उत्पादन कम हुआ. डुआर्स क्षेत्र में जुलाई 2026 में 24.83 मिलियन किलोग्राम चाय बनी, जबकि पिछले साल यह 28.51 मिलियन किलोग्राम थी. इसी तरह तराई क्षेत्र में उत्पादन 15 फीसदी घटकर 18.23 मिलियन किलोग्राम रह गया. जुलाई 2025 में यहां 21.50 मिलियन किलोग्राम चाय का उत्पादन हुआ था.
दार्जिलिंग की मशहूर चाय पर भी भारी बारिश का असर देखने को मिला. जुलाई 2026 में दार्जिलिंग में चाय उत्पादन 15 फीसदी घटकर 0.81 मिलियन किलोग्राम रह गया. पिछले साल जुलाई में यहां 0.95 मिलियन किलोग्राम चाय का उत्पादन हुआ था. भारी बारिश के कारण चाय की पत्तियों की तुड़ाई और बागानों में काम प्रभावित हुआ, जिससे उत्पादन में कमी आई.
असम और पश्चिम बंगाल के अलावा उत्तर भारत के दूसरे चाय उत्पादक राज्यों में भी जुलाई के दौरान उत्पादन कम रहा. इन राज्यों में कुल चाय उत्पादन 16 फीसदी घटकर 4.82 मिलियन किलोग्राम रह गया. पिछले साल जुलाई में इन राज्यों से 5.73 मिलियन किलोग्राम चाय का उत्पादन हुआ था. इससे पता चलता है कि जुलाई में खराब मौसम का असर देश के कई चाय उत्पादक क्षेत्रों पर पड़ा.
जहां उत्तर भारत में चाय उत्पादन में गिरावट आई, वहीं दक्षिण भारत के तीनों प्रमुख चाय उत्पादक राज्यों में उत्पादन बढ़ा. तमिलनाडु में सबसे अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली. जुलाई 2026 में राज्य में चाय उत्पादन 22 फीसदी बढ़कर 19.45 मिलियन किलोग्राम पहुंच गया. जुलाई 2025 में यह 15.92 मिलियन किलोग्राम था. केरल में भी चाय उत्पादन थोड़ा बढ़ा. राज्य में जुलाई 2026 के दौरान 4.70 मिलियन किलोग्राम चाय का उत्पादन हुआ, जबकि पिछले साल जुलाई में यह 4.64 मिलियन किलोग्राम था. वहीं, कर्नाटक में चाय उत्पादन में 41 फीसदी की बड़ी बढ़ोतरी हुई. यहां उत्पादन 0.29 मिलियन किलोग्राम से बढ़कर 0.41 मिलियन किलोग्राम हो गया.
चाय की किस्मों की बात करें तो जुलाई 2026 में देश में सबसे ज्यादा CTC चाय का उत्पादन हुआ. इस दौरान CTC चाय का उत्पादन 143.10 मिलियन किलोग्राम रहा. CTC चाय का इस्तेमाल आमतौर पर दूध वाली चाय बनाने में बड़े पैमाने पर किया जाता है और भारत में इसकी मांग काफी ज्यादा है. इसके अलावा जुलाई में देश में ऑर्थोडॉक्स चाय का उत्पादन 18.76 मिलियन किलोग्राम रहा. वहीं, ग्रीन टी का उत्पादन 2.47 मिलियन किलोग्राम दर्ज किया गया. इस तरह जुलाई के कुल चाय उत्पादन में CTC चाय की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही.
जुलाई के आंकड़े बताते हैं कि चाय उत्पादन के लिए मौसम कितना महत्वपूर्ण है. असम और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े चाय उत्पादक राज्यों में ज्यादा बारिश और बाढ़ से उत्पादन पर सीधा असर पड़ा है. दूसरी ओर, दक्षिण भारत में बेहतर उत्पादन ने देश की कुल गिरावट को कुछ हद तक कम किया. आने वाले महीनों में चाय उत्पादन किस तरह रहता है, इसमें बारिश, तापमान और बागानों में पत्तियों की तुड़ाई की स्थिति की बड़ी भूमिका रहेगी.
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