
महाराष्ट्र के लातूर जिले में बारिश के साथ अचानक हुई ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है. मंगलवार शाम हुई इस मौसमीय घटना ने खड़ी और कटी हुई दोनों तरह की फसलों को नुकसान पहुंचाया, जिससे रबी सीजन के चरम पर किसानों की चिंता बढ़ गई है. जिले में इस समय गेहूं, चना और ज्वार जैसी प्रमुख रबी फसलों की कटाई चल रही है. इसके अलावा आम, तरबूज, खरबूज, केला और सब्जियों की खेती भी बड़े पैमाने पर की जा रही है.
ऐसे में व्यापक स्तर पर ओलावृष्टि का असर से देखा गया है, जिससे खेतों में तैयार फसलें प्रभावित हुई हैं. देवनी तहसील में गिरे ओलों का आकार और वजन भी नुकसान का कारण बना. किसानों ने कहा कि 25 से 50 ग्राम तक के ओलों ने खेतों में खड़ी फसल को सीधे नुकसान पहुंचाया है. कई जगहों पर तेज बारिश के साथ ओले गिरने से फसल की क्वालिटी और उत्पादन दोनों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक, करीब 52 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल प्रभावित हुई है, जिसमें निलंगा और देवनी क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं. प्रशासन की ओर से तहसील स्तर पर नुकसान का विस्तृत आकलन कराया जा रहा है, ताकि प्रभावित किसानों को राहत दी जा सके. इसी बीच, स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी प्रशासन से जल्द सर्वे कर मुआवजा देने की मांग उठाई है.
उन्होंने कहा कि लगातार बदलते मौसम के कारण किसान पहले ही दबाव में हैं और ऐसे हालात में तत्काल सहायता जरूरी है. मौसम विभाग ने आने वाले दिनों को लेकर भी सतर्क रहने की सलाह दी है. विदर्भ और मराठवाड़ा के कुछ हिस्सों में 20 से 21 मार्च के बीच फिर से बारिश और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ सकती है. (पीटीआई)