हाईटेंशन लाइनों पर योगी सरकार का बड़ा फैसला, अब किसानों को मिलेगा दोगुना मुआवजा

हाईटेंशन लाइनों पर योगी सरकार का बड़ा फैसला, अब किसानों को मिलेगा दोगुना मुआवजा

उत्तर प्रदेश सरकार ने हाईटेंशन बिजली लाइनों से प्रभावित किसानों के लिए मुआवजा बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है. अब टावर के नीचे की जमीन पर 200% और लाइन कॉरिडोर पर 30% मुआवजा मिलेगा. इस फैसले से किसानों को पहले से अधिक आर्थिक लाभ होगा और उनकी आय बढ़ने की उम्मीद है.

योगी सरकार का बड़ा फैसलायोगी सरकार का बड़ा फैसला
क‍िसान तक
  • Noida,
  • May 05, 2026,
  • Updated May 05, 2026, 7:46 AM IST

गांवों में रहने वाले ज्यादातर लोग खेती करते हैं और उनकी सबसे बड़ी पूंजी उनकी जमीन होती है. इसी जमीन पर किसान अनाज उगाते हैं और अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं. लेकिन कई बार खेतों के ऊपर से बिजली की बड़ी-बड़ी हाईटेंशन लाइनें गुजरती हैं या खेत के बीच में बड़े टावर (खंभे) लगा दिए जाते हैं. इससे किसानों को अपनी जमीन का पूरा उपयोग करने में परेशानी होती है. अब इस समस्या को समझते हुए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है, जिससे किसानों को उनकी जमीन के बदले ज्यादा मुआवजा मिलेगा और उन्हें आर्थिक राहत भी मिलेगी.

क्या है सरकार का नया फैसला?

उत्तर प्रदेश की सरकार ने हाईटेंशन बिजली लाइनों से प्रभावित किसानों के लिए मुआवजा बढ़ाने का निर्णय लिया है. अब जिन किसानों के खेत में बिजली का टावर लगेगा, उन्हें उस जमीन की कीमत का 200% यानी दोगुना पैसा मिलेगा. इसका मतलब है कि अगर जमीन की कीमत 1 लाख रुपये है, तो किसान को 2 लाख रुपये मिलेंगे.

इसके अलावा, जिन खेतों के ऊपर से सिर्फ बिजली की तारें गुजरती हैं, वहां भी किसानों को जमीन की कीमत का 30% मुआवजा दिया जाएगा. इस फैसले से किसानों को पहले की तुलना में 21% से 33% तक ज्यादा फायदा मिलने का अनुमान है.

पहले क्या थी स्थिति?

अगर हम पहले की बात करें, तो 2018 से पहले किसानों को इस तरह की जमीन के लिए लगभग कोई मुआवजा नहीं मिलता था. इससे किसानों को नुकसान होता था और वे नाराज भी रहते थे.

फिर 2018 में कुछ बदलाव किए गए और टावर के नीचे आने वाली जमीन के लिए करीब 85% मुआवजा दिया जाने लगा. लेकिन तब भी जिन खेतों के ऊपर से बिजली की लाइन गुजरती थी, उनके लिए कोई पैसा नहीं मिलता था. इस कारण किसान अपनी जमीन का सही उपयोग नहीं कर पाते थे और उन्हें आर्थिक नुकसान होता था.

अब क्या बदला है?

नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब टावर के नीचे की जमीन के लिए दोगुना मुआवजा मिलेगा. साथ ही, बिजली की तारों के नीचे आने वाली जमीन के लिए भी 30% मुआवजा दिया जाएगा.

यह मुआवजा जिलाधिकारी द्वारा तय किए गए सर्किल रेट के आधार पर दिया जाएगा. यानी सरकार जमीन की तय कीमत के अनुसार ही किसानों को पैसा देगी, जिससे उन्हें सही और न्यायपूर्ण भुगतान मिल सके.

किसानों को कैसे होगा फायदा?

इस फैसले से किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा. अब उन्हें अपनी जमीन के उपयोग पर अच्छा पैसा मिलेगा, जिससे उनकी आय बढ़ेगी.

अगर आसान भाषा में समझें, तो पहले किसान को या तो पैसा नहीं मिलता था या बहुत कम मिलता था. लेकिन अब उसे अपनी जमीन के बदले ज्यादा पैसा मिलेगा. इससे किसान खुश होंगे और उन्हें लगेगा कि उनकी मेहनत और जमीन की सही कीमत मिल रही है.

विकास और किसानों के बीच संतुलन

सरकार का कहना है कि यह फैसला किसानों के हित में लिया गया है. इससे न केवल किसानों को फायदा होगा, बल्कि बिजली परियोजनाओं को भी पूरा करना आसान होगा.

पहले किसान मुआवजा कम मिलने के कारण कई बार इन परियोजनाओं का विरोध करते थे, जिससे काम रुक जाता था. लेकिन अब जब उन्हें अच्छा मुआवजा मिलेगा, तो वे इन योजनाओं में सहयोग करेंगे और विकास कार्य तेजी से पूरे हो सकेंगे.

अगर आपके खेत में कोई बड़ा खंभा लगा दिया जाए या उसके ऊपर से तार गुजर जाएं, तो आप उस जमीन का पूरा इस्तेमाल नहीं कर सकते. इसलिए अब सरकार कह रही है कि “हम आपको ज्यादा पैसे देंगे, ताकि आपका नुकसान पूरा हो सके.” कुल मिलाकर, यह फैसला किसानों के लिए बहुत फायदेमंद है. इससे उन्हें उनकी जमीन के बदले ज्यादा और सही मुआवजा मिलेगा. साथ ही, विकास के काम भी तेजी से पूरे होंगे. यह कदम किसानों की आय बढ़ाने और उनके हितों की रक्षा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है.

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