
भारत की कॉफी दुनिया भर में तेजी से लोकप्रिय हो रही है. साल 2026 के जनवरी से अप्रैल के बीच देश की कॉफी निर्यात में 27 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसकी सबसे बड़ी वजह रोबस्टा और इंस्टेंट कॉफी की बढ़ती मांग मानी जा रही है.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल जनवरी-अप्रैल के दौरान भारत ने 1.74 लाख टन कॉफी का निर्यात किया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 1.37 लाख टन था. भारत मुख्य रूप से अरेबिका, रोबस्टा और इंस्टेंट कॉफी का निर्यात करता है.
कॉफी निर्यात बढ़ने से देश की कमाई में भी इजाफा हुआ है. इस साल चार महीनों में कॉफी निर्यात का कुल मूल्य बढ़कर 936.57 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह 757.07 करोड़ रुपये था. वहीं प्रति टन कॉफी की कीमत भी बढ़ी है.
कॉफी बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार रोबस्टा कॉफी के निर्यात में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिली है. जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच रोबस्टा कॉफी का निर्यात 36 प्रतिशत बढ़कर 85,168 टन पहुंच गया. पिछले साल इसी अवधि में यह 62,736 टन था.
इसी तरह इंस्टेंट कॉफी का निर्यात भी बढ़कर 20,332 टन हो गया, जो पिछले साल 17,504 टन था. वहीं इंस्टेंट कॉफी के री-एक्सपोर्ट यानी दूसरे देशों से प्रोसेसिंग के बाद दोबारा भेजी जाने वाली कॉफी का निर्यात भी बढ़ा है.
जहां रोबस्टा कॉफी की मांग बढ़ी है, वहीं अरेबिका कॉफी के निर्यात में भारी गिरावट दर्ज की गई है. इस साल अरेबिका कॉफी का निर्यात घटकर 30,589 टन रह गया, जबकि पिछले साल यह 72,479 टन था.
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का कॉफी सेक्टर अब तेजी से आगे बढ़ रहा है. पहले भारत को केवल रोबस्टा कॉफी उत्पादक देश के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब देश वैश्विक कॉफी बाजार में अपनी नई पहचान बना रहा है.
कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया के अनुमान के अनुसार 2025-26 सीजन में भारत में रिकॉर्ड 4.03 लाख टन कॉफी उत्पादन हो सकता है. कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु जैसे प्रमुख कॉफी उत्पादक राज्यों में उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है.
अनुमान है कि अरेबिका कॉफी का उत्पादन करीब 1.18 लाख टन और रोबस्टा कॉफी का उत्पादन 2.84 लाख टन से ज्यादा हो सकता है. बेहतर बारिश और मिट्टी में नमी की वजह से फसल अच्छी रहने की संभावना जताई जा रही है.
हालांकि विशेषज्ञों ने मौसम में लगातार बदलाव और जलवायु जोखिम को कॉफी सेक्टर के लिए बड़ी चुनौती बताया है. अगर मौसम में अस्थिरता बढ़ती है तो इसका असर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर पड़ सकता है.
फिलहाल बढ़ते निर्यात और मजबूत मांग ने भारतीय कॉफी उद्योग को नई ऊर्जा दी है, जिससे आने वाले समय में किसानों और कारोबारियों दोनों को फायदा मिलने की उम्मीद है.
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