Cotton Price: कपास की कीमतों में तेज उछाल, CCI ने एक दिन में बढ़ाए 2,900 रुपये रेट

Cotton Price: कपास की कीमतों में तेज उछाल, CCI ने एक दिन में बढ़ाए 2,900 रुपये रेट

वैश्विक बाजार में तेजी के बाद CCI ने कपास की कीमतों में 2,900 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की है. ICE पर भी कपास के भाव दो साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचे, जिससे घरेलू बाजार और कपड़ा उद्योग पर असर पड़ा है.

AIKS protest call on cotton importAIKS protest call on cotton import
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • May 05, 2026,
  • Updated May 05, 2026, 7:31 PM IST

सोमवार को घरेलू और वैश्विक बाजार में कपास की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली. कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों को देखते हुए कपास के दामों में 2,900 रुपये प्रति कैंडी (356 किलोग्राम) की बढ़ोतरी कर दी. इसके साथ ही कीमतों में 4 प्रतिशत से अधिक का उछाल दर्ज किया गया.

वैश्विक बाजार में भी कपास के दाम चढ़ते नजर आए. ICE (इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज) पर जुलाई डिलीवरी के लिए कपास का भाव इंट्रा-डे में 84.5 सेंट प्रति पाउंड के पार पहुंच गया. मार्च की शुरुआत से अब तक ICE पर कपास वायदा कीमतों में 28 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है.

एक दिन में सीजन की सबसे बड़ी बढ़ोतरी

व्यापारिक सूत्रों के मुताबिक, CCI द्वारा की गई यह बढ़ोतरी इस सीजन में एक दिन की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है. सीजन की शुरुआत में कपास का भाव 54,600 रुपये प्रति कैंडी के निचले स्तर पर था, जो अब बढ़कर करीब 65,600 रुपये प्रति कैंडी तक पहुंच गया है. यह रेट पिछले दो वर्षों का सबसे अधिक माना जा रहा है.

रायचूर के एक सोर्सिंग एजेंट रामानुज दास बूब के अनुसार, “CCI की इतनी बड़ी बढ़ोतरी ने व्यापार जगत को चौंका दिया है. इसके बावजूद CCI ने दो लाख से ज्यादा गांठें बेच दी हैं,”

कपड़ा उद्योग में बढ़ी चिंता

कपास और सूत की कीमतों में आई इस तेजी को लेकर कपड़ा उद्योग में विरोध शुरू हो गया है. उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि लेबर की भारी कमी है. मशीन आधारित यूनिटों से लेकर पारंपरिक करघों तक उत्पादन प्रभावित है. सूत के दाम बढ़ने से निचले स्तर पर भी डिलीवरी में देरी हो रही है. इसका असर कपड़ों की समय पर आपूर्ति पर पड़ सकता है.

विदेशी मांग से बाजार को सहारा

हाल के हफ्तों में पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हुई है. ऐसे में चीन, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से भारतीय कपास और सूत की मांग बढ़ी है.

Cotyarn Tradlink के आनंद पोपट ने 'बिजनेसलाइन' से कहा, CCI के पास अभी करीब 40 लाख गांठें बिना बिके स्टॉक के रूप में मौजूद हैं, जबकि इस सीजन में कुल खरीद 105 लाख गांठें रही है.

उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी के चलते CCI की बिक्री आगे भी जारी रहने की उम्मीद है. फिलहाल ICE वायदा कीमतों के मुकाबले CCI का प्राइस बेस शून्य के करीब है, जबकि पहले यह 10 सेंट से ज्यादा प्रीमियम पर था. इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) के लिए CCI से कपास खरीदना फायदे का सौदा हो सकता है.

आवक स्थिर, उत्पादन बेहतर

कपास (कच्चा कपास) की आवक फिलहाल प्रतिदिन 35,000 से 45,000 गांठों के बीच बनी हुई है. अनुमान है कि यह स्थिति अगले महीने भी जारी रह सकती है. बेहतर उत्पादन और अतिरिक्त कपास की आवक के चलते अब तक कुल आवक 305 लाख गांठों तक पहुंच चुकी है.

कुल मिलाकर, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही बाजारों में कपास की कीमतें मजबूत बनी हुई हैं. जहां एक ओर किसानों को ऊंची कीमतों का फायदा मिल सकता है, वहीं दूसरी ओर कपड़ा उद्योग के लिए कच्चे माल की महंगाई नई चुनौती बनती नजर आ रही है.

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